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इंदौर पशुपालन में डिप्टी की मिलीभगत, महिला डॉक्टरों को संरक्षण तो पुरुष अधिकारी पर शिकंजा

आरटीआई से खुली पोल, इंदौर पशुपालन में दोहरी मानसिकता; डिप्टी पर संरक्षण और मिलीभगत के गंभीर आरोप

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इंदौर पशुपालन में डिप्टी की मिलीभगत, महिला डॉक्टरों को संरक्षण तो पुरुष अधिकारी पर शिकंजा

 

आरटीआई से खुली पोल, इंदौर पशुपालन में दोहरी मानसिकता; डिप्टी पर संरक्षण और मिलीभगत के गंभीर आरोप

 

सार्थक ऐप का मजाक, फर्जी अटेंडेंस पर पुरुष निलंबित, महिला डॉक्टरों को डिप्टी की ढाल

 

मनीष कुमार राठौर/8109571743

 

इंदौर। सार्थक ऐप पर फर्जी उपस्थिति दर्ज करना और उसके बदले वेतन हड़पना, ये गंभीर अपराध है। लेकिन हैरानी तब होती है जब इसी गुनाह के लिए एक पुरुष अधिकारी पर तो गाज गिरती है, लेकिन महिला चिकित्सकों को डिप्टी डायरेक्टर की ढाल मिल जाती है। मध्यप्रदेश के इंदौर पशुपालन विभाग में ऐसी ही दोहरी मानसिकता का मामला सामने आया है।

 

पुरुष पर शिकंजा, महिलाओं को संरक्षण

विभागीय सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक पुरुष सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी श्री माधु वर्मा और श्री राजेंद्र पिंगले (AVFO) को सार्थक ऐप पर फर्जी तरीके से उपस्थिति दर्ज करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। मगर निष्पक्षता की परतें तब खुलती हैं जब आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार विभाग की कई महिला डॉक्टरों के खिलाफ भी इसी तरह के आरोप थे, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ये वही महिलाएं हैं जिन्हें कथित रूप से डिप्टी डायरेक्टर का संरक्षण प्राप्त है।

 

आरटीआई ने खोली परतें

आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, महिला चिकित्सकों के खिलाफ गंभीर सबूत मिले यह जानकारी सिर्फ एक महीने की है इसी प्रकार पिछले 5 महीने से उपस्थिति में फर्जीवाड़ा चल रहा है और डिप्टी इन अधिकारी को बचाने में लगा है ?

 

· मिताली मेहता: रिहायशी इलाकों और अन्य शहरी लोकेशनों से फर्जी उपस्थिति दर्ज करने के साथ 11 बार विलंब से हाजिरी लगाने का मामला।

· डॉ. टीनू जैन: तलावली चांदा क्षेत्र जैसे अन्य स्थानों से हाजिरी दर्ज कराने के साथ 8 बार देर से उपस्थिति दर्ज की गई।

· डॉ. नेहा वास्कल और डॉ. रश्मि खंडेलवाल: 9-9 बार देर से उपस्थिति।

· अंजलि सिंह और श्वेता कांबले: 8-8 बार लेट मार्क किया।

· डॉ. सुप्रिया शर्मा, डॉ. सुमनलता सोनी और लेखा पनवेल: 7-7 बार देर से हाजिरी। इसके अलावा विगत कुछ माह पहले पशु चिकित्सालय क्षिप्रा में पदस्थ डॉ गोल्डी जोशी को फर्जी उपस्थिति लगाने के मामले में कमिश्नर कार्यालय से कारण बताओ सूचना पत्र भी जारी हुआ! इस मामले में भी जाँच को दबा दिया गया!

 

जहां एक पुरुष अधिकारी पर इन्हीं आरोपों के चलते निलंबन की तलवार लटका दी गई, वहीं इन महिला डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे साफ जाहिर है कि डिप्टी पशुपालन ने महिला अधिकारियों को संरक्षण दिया।

 

नियमों का मजाक, सवालों के घेरे में डिप्टी

विभागीय नियमों के अनुसार, सार्थक ऐप पर जीपीएस लोकेशन से ही अटेंडेंस वैध मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कठोरता से जांचा जाता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में बैठी महिला चिकित्सकों की मनमानी पर कोई रोक नहीं है। मामला साफ है, डिप्टी डायरेक्टर की मिलीभगत से सार्थक ऐप की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

जनता के पैसे की लूट

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि फर्जी उपस्थिति के आधार पर वेतन का भुगतान सरकारी खजाने पर सीधा आघात है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर डिप्टी पशुपालन को कार्रवाई से कौन रोक रहा है? क्यों एक पुरुष अधिकारी पर कठोर कार्रवाई करने वाला डिप्टी इन महिलाओं पर नरमी बरत रहा है? क्या यह सिर्फ संरक्षण का मामला है या फिर इसके पीछे कोई और सौदेबाजी है?

 

डिप्टी की जवाबदेही तय हो

 

अब वक्त आ गया है कि पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव इस मामले में हस्तक्षेप करें। इंदौर पशुपालन के डिप्टी डायरेक्टर को तत्काल हटाया जाए और सभी दोषी महिला चिकित्सकों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। यदि फर्जी उपस्थिति का गुनाह पुरुष के लिए निलंबन का कारण बन सकता है तो महिलाओं के लिए भी यही नियम समान रूप से लागू होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह साबित होगा कि मध्यप्रदेश सरकार केवल दिखावे के लिए ई-अटेंडेंस लागू कर रही है और अपने ही बनाए नियमों को तोड़ना कुछ खास लोगों के लिए आसान है।

 

क्या कहना है ।

 

इनको खबर के वर्जन के लिए कॉल किया गया था कॉल रिसीव नहीं किया गया ।

 

डॉ पाटिल डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग इंदौर

 

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