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कुपोषण का गंभीर संकट: पोषण आहार योजना की धज्जियां उड़ता बैतूल का महिला बाल विकास विभाग

बच्चों के खाने में इल्ली,कीड़े और कच्ची रोटी मामले के बाद भी बैतूल कलेक्टर डीपीओ के आगे बौने साबित हो रहे

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कुपोषण का गंभीर संकट: पोषण आहार योजना की धज्जियां उड़ता बैतूल का महिला बाल विकास विभाग

 

बच्चों के खाने में इल्ली,कीड़े और कच्ची रोटी मामले के बाद भी बैतूल कलेक्टर डीपीओ के आगे बौने साबित हो रहे

 

बैतूल/सारनी। केंद्र सहित प्रदेशों में इन दोनों पोषण आहार अभियान के तहत एक माह का कार्यक्रम चल रहा है तो वही दूसरी ओर योजना को पलीता लगाते हुए सारनी परियोजना अंतर्गत बच्चों को इल्ली, कीड़े, कच्ची रोटी युक्त भोजन परोस कर उनके जीवन से खिलवाड़ कर उन्हें कुपोषित बनाने का कार्य किया जा रहा है। जिससे सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की छवि खराब हो रही है। उसके बाद भी लापरवाह जिला कलेक्टर कार्रवाई के नाम पर जांच का लॉलीपॉप पकड़ा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास परियोजना सारणी में पदस्थ प्रभारी अधिकारी संगीता धुर्वे सुपरवाइजर रश्मि अकोदिया के कार्यकाल में लगातार आंगनबाड़ियों के संचालन में अनियमितता लापरवाही आए दिन देखी जा रही है। फील्ड पर न जाना, अभियान में आने वाली सामग्री को बेचना, समूह वालों से पैसे लेना, ऑफिस ना आकर घर पर आराम फरमाना, रिश्वत लेकर अधीन कर्मचारियों का पत्रक भरना, योजना का लाभ दिलवाने पैसों की मांग करना, कोई बड़ी-बड़ी अनियमितता खुलकर इस परियोजना में हुए हैं। ताजा मामला कुछ दिन पूर्व वार्ड क्रमांक एक आंगनबाड़ी भाग 2 में नन्हे मुन्ने बच्चों को पोषण माह अभियान के दौरान परोसे जाने वाले भोजन में स्पष्ट रूप से पार्षद एवं उपस्थित अभिभावकों ने इल्ली कीड़े देखे पंचनामा बनाया गया, अगले दिन वही आंगनवाड़ी में बच्चों को कच्ची रोटी परोसी गई। जिसकी खबर जिले के समस्त अखबारों में प्रकाशित हुई। दोनों ही मामले में परियोजना अधिकारी संगीता द्वारा वसूली कर फील्ड पर भ्रमण ना करते हुए घर पर आराम करने का खुलासा सहित बड़ी अनियमितता उजागर हुई है। उसके बाद कलेक्टर ने संगीता धुर्वे को बैतूल तलब किया लेकिन कार्यवाही के नाम पर जांच का झुनझुना पकड़ा दिया गया। जिसके बाद विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि जिला कार्यक्रम अधिकारी गौतम अधिकारी द्वारा पैसे लेनदेन कर मामला रफा दफा करने की फूल सेटिंग की जाती है। पूर्व में भी आमला आंगनवाड़ी में नौकरी लगने के नाम पर एक सीडीपीओ द्वारा पैसे लेने सहित भ्रष्टाचार के सारे सबूत के बाद भी उन्हें इन डीपीओ गौतम अधिकारी द्वारा बचाकर मात्रा चिचोली ट्रांसफर करवा दिया गया। जिससे पता चलता है कि साहब पैसों में बहुत दम होता है।

 

पोषण आहार पर 1 साल में 8 करोड़ 50 लाख खर्च हुए, फिर भी बच्चों को परोसा जा रहा इल्ली, कीड़े, कच्ची रोटी युक्त भोजन

 

जिले में कुल करीब 2400 आंगनबाड़ी केंद्र है। 1 वर्ष में कुल 8 करोड 50 लाख रुपए का पोषण आहार का बजट जिले का आया है। उसके बाद भी जिले में 1068 बच्चे कुपोषण का शिकार हुए हैं। और होंगे भी जब तक जिले में ऐसे भ्रष्ट गौतम अधिकारी जैसे अधिकारी होंगे। देखा जाए तो सभी परियोजना को नियंत्रण करने वाले सीडीपीओ से हर माह एक मोटी रकम जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा वसूली जाती है। और उनकी शिकायत होने पर उनके सामने ढाल बनकर खड़े होकर कलेक्टर को गुमराह करने का कार्य डीपीओ द्वारा किया जाता है। हालांकि कलेक्टर भी उनके सामने इसलिए बौने साबित हो रहे हैं क्योंकि पैसों में बहुत दम होता है। कहीं ना कहीं दोनों ही अधिकारी की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में बनी हुई है। जिसके चलते सारणी परियोजना प्रभारी अधिकारी संगीता धुर्वे जैसे दूध में आयरन बताने वाले अशिक्षित अधिकारियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। क्योंकि इनके द्वारा गलती होने पर कुत्ते को बोटी फेंक दी जाती है इस तर्ज पर कार्य किया जाता है। अगर भविष्य में प्रदेश स्तर से जिले के कप्तान गौतम अधिकारी की कार्य प्रणाली की निष्पक्ष जांच हो जाए तो निश्चित ही यह निलंबित होकर सलाखों के पीछे नजर आएंगे। और संगीता जैसे अशिक्षित प्रभारी अधिकारी को विभाग से नौ दो ग्यारह कर दिए जाएंगे। खैर मामला जो भी हो लेकिन इन दोनों एक और केंद्र सहित प्रदेशों में पोषण महा अभियान चलाया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर बच्चों को इल्ली कीड़े कच्ची रोटी वाला भोजन देकर जिले में कुपोषित का शिकार करवाया जा रहा है।

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