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उपार्जन केंद्र प्रभारियों पर गिर सकती है गाज?,भीगा गेहूं बोरी में जामा।

मीडिया के द्वारा अवगत कराए जाने पर एसडीएम ने किया निरीक्षण।

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उपार्जन केंद्र प्रभारियों पर गिर सकती है गाज?,भीगा गेहूं बोरी में जामा।

 

मीडिया के द्वारा अवगत कराए जाने पर एसडीएम ने किया निरीक्षण।

 

सीधी/ मझौली

 

वैसे तो सीधी जिले के मझौली उप खण्ड अंतर्गत सभी गेहूं उपार्जन केंद्र में अव्यवस्थाओं के साथ-साथ किसानों को किसानों को परेशान करते हुए जमकर शोषण किया गया है। एक ओर जहां ना तो बैठने की लिए छांव व पीने के लिए पानी की व्यवस्था की गई थी वहीं किसानों से डरा धमकाकर भाराई तौलाई भी कराया गया। नाम ना उजागर करते हुए किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि भारी तलाई न करने पर बोरिया नहीं दी जा रही हैं यहां तक की गेहूं बेचने के लिए सेवा शुल्क भी जमा करने की खबर है।

लेकिन मझौली एवं मड़वास उपार्जन केंद्र में जिस तरह से किसानों को परेशान किया गया है शायद ही जिले के उपार्जन केन्द्रों में किया गया हो। यहां भाराई तौलाई तो कराया ही गया किसानों को काफी परेशान कर जमकर शोषण किया गया है। कई दिनों तक बोरी के इंतजार में किसान उपार्जन केंद्र में बैठे रहे यहां तक की खरीदी किए गए गेहूं के साथ किसानों का गेहूं भी भीग गया। जिसका खामियाजा किसानों को ही भुगतना पड़ा। नाम ना उजागर करते हुए किसानों द्वारा बताया गया कि इतना परेशान होने के बावजूद भी सेवा शुल्क के बिना गेहूं बिक्री की रसीद नहीं दी जा रही है। हम लोग उपार्जन केंद्र में गेहूं लिए बैठे हैं बोरी नहीं मिल रही है। व्यापारियों एवं प्रभाव एल लोगों के घर ही बोरिया पहुंच गई हैं यहां तक की जब बोरिया लदकर गोदाम पहुंची तो तुरंत मीडिया को सूचित कर दिखाया गया जहां नई बोरी में तौला भरा गेहूं पाया गया यहां तक की खरीदी दिनांक 5 एवं 9 मई बीत जाने के बाद भी मझौली उपार्जन करने में 12 में तक गेहूं पहुंचना पाया गया। इस स्थिति से जिम्मेदार अधिकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से अवगत कराया गया लेकिन अभी तक एसडीएम मझौली के अलावा किसी का बयान नहीं आया है। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी अभिषेक सोनोढिया केवाईसी को लेकर विक्रेताओं की बैठक मझौली में की थी जिन्हें भी स्थितियों से अवगत कराया गया था जिनके द्वारा कहा गया था कि यदि गड़बड़ियां पाई गई तो कार्यवाही की जाएगी। अब ऐसी स्थिति में जबकि किसानों को परेशान कर शोषण किए जाने के बावजूद उपार्जन केंद्र में खरीद गेहूं एक नहीं दो बार भीग चुका है जो जमीन में तो छोड़िए बोरी के अंदर भी अंकुर छोड़ दिया है जिन्हें बगैर सुखाए छल्ली लगवाए सीधे गोदाम के अंदर करवाया जा रहा है जिस स्थिति से भी वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचने की संभावना है ऐसे में लापरवाह उपार्जन केंद्र प्रभारी पर मुख्यमंत्री के आने से पहले निलंबन की गाज गिर सकती है।

 

*प्राइवेट व्यक्तियों के हवाले उपार्जन केंद्र की जिम्मेदारी*

 

मड़वास उपार्जन केंद्र प्रभारी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भले ही चाहे उपार्जन केंद्र से नदारत रहते हैं पर एक कर्मचारी समिति का जरूर उपार्जन केंद्र में पाया गया लेकिन मझौली उपार्जन केंद्र प्रभारी भूपेंद्र सिंह मनमानी व निर्भीकता पूर्ण उपार्जन केंद्र प्राइवेट व्यक्तियों के हवाले कर नदारत रहते हैं जिससे किसानों को परेशानियां और मुसीबत का सामना करना पड़ता है। मझौली उपार्जन केंद्र में देरी से खरीदी चालू होने के बावजूद भी समय पर किसानों को बोरिया उपलब्ध नहीं हो सकी जिसके कारण अभी भी किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।

 

*कई वर्षों से व्याप्त अव्यवस्थाओं पर नहीं लग रही रोक*

 

धान एवं गेहूं उपार्जन केंद्र में कई वर्षों से किसानों को परेशान कर शोषण किया जा रहा है। इस स्थिति का समय-समय पर खबर प्रकाशन जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों को अवगत कराया जा रहा है लेकिन किसी तरह की कार्यवाही न होने से उपार्जन केंद्र प्रभारियों का मनोबल बढ़ रहा है जो लगातार किसानों को परेशान कर श्रम एवं धन से उनका शोषण कर रहे हैं अब देखना होगा कि ऐसे दबंग एवं लापरवाह उपार्जन केंद्र प्रभारियों पर जिम्मेदार अधिकारी क्या कुछ कार्यवाही कर पाते हैं?

 

*अलग-अलग व्यक्ति के लिए अलग-अलग नियम*

 

बात करें मझौली उपार्जन केंद्र की तो उपार्जन केंद्र प्रभारी भूपेंद्र सिंह शासन प्रशासन के नियमों को दरकिनार अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग-अलग के नियम खुद बना रखे हैं भले ही चाहे गरीब किसान जो 6 महीने से परेशानियां से जूझते हुए किसी तरह अनाज लेकर गोदाम पहुंचा हो जिसे बोरी के लिए हफ्तों भर इंतजार करना पड़ा हो लेकिन व्यापारियों एवं प्रभावशील व्यक्तियों के यहां पूर्व में ही बोरिया पहुंचाए जाने की खबर है । जिनका गेहूं खरीदी बंद होने बाद भी 12 मई तक गोदाम पहुंच रहा है। इससे साथ जाहिर होता है कि इन लोगों के घर पर ही गेहूं खरीदी कर रसीद जारी कर दी गई थी?

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