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UN ने PAK ट्रेन हाइजैक की निंदा की, बंधकों की तत्काल रिहाई की अपील की

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क्वेटा
पाकिस्तान के बलूच अलगाववादी विद्रोहियों ने बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को एक ट्रेन पर हमला करके उस पर कब्जा कर लिया है। ट्रेन में 200 से ज्यादा बंधक मौजूद हैं, जिन्हें छुड़ाने के लिए पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल जूझ रहे हैं। ये ट्रेन बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर के लिए जा रही थी। बलूच विद्रोहियों ने क्वेटा से 160 किमी की दूरी पर सिबी शहर के पास पहाड़ी इलाके में ट्रेन पर हमला किया, जब यह क्षेत्र में पड़ने वाली कई सुरंगों से गुजर रही थी। बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाले बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और बंधकों के कब्जे में होने का दावा किया है।
अब तक क्या हुआ?

पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार दोपहर को जब जाफर एक्सप्रेस क्वेटा से 160 दूर सुरंगों की शृंखला से गुजर रही थी, उस दौरान उस पर हमला किया गया। 9 डिब्बों वाली ट्रेन में 400 से ज्यादा यात्री सवार थे। पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने के लिए सैन्य अभियान जारी है। अधिकारियों ने अब तक 104 बंधकों को छुड़ाने का दावा किया है। क्वेटा में पाकिस्तान रेलवे के एक अधिकारी के हवाले से अल जजीरा ने बताया है कि महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों समेत लगभग 70 यात्री हमले की जगह से लगभग 6 किमी दूर पानिर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे।

क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन में नौ बोगियां जिनमें तकरीबन 500 लोग सवार हैं, जिनमें सेना और सीक्रेट एजेंट की भी अच्छी-खासी तादाद है. पेशावर जा रही ट्रेन जैसे ही टनल में घुसी, उसी वक्त घात लगाकर बैठे बलूच विद्रोहियों ने उस पर हमला कर दिया. ताजा खबर के मुताबिक अभी तक 104 बंधकों को छुड़ा लिया गया है. रेस्क्यू कराए गए बंधकों में 50 से ज्यादा पुरुष, 30 से ज्यादा महिलाएं और बच्चे भी हैं.

पाकिस्तानी सेना के लिए कितना मुश्किल है रेस्क्यू ऑपरेशन?

सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन की वजह से आतंकी दो समूहों में बंटे हुए हैं. बीएलए के विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को मशकाफ टनल (Mashkaf Tunnel) में हाईजैक किया. यह टनल क्वेटा से 157 किलोमीटर की दूरी पर है. यह टनल जिस इलाके में है, वह बेहद दुर्गम पहाड़ी इलाका है, जिसका सबसे नजदीकी स्टेशन पहरो कुनरी है.

बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने बताया कि पेहरा कुनरी और गदालर के बीच जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर फायरिंग कर बीएलए के आतंकियों ने उस पर कब्जा किया था. ठ्रेन को टनल नंबर 8 में रोका गया. बोलन के जिला पुलिस अधिकारी राणा मुहम्मद दिलावर का कहना है कि यह पूरा इलाका पहाड़ी है, जो सुरंगों से पटा पड़ा है.

उन्होंने बताया कि हाईजैक हुई ट्रेन इस समय बोलन दर्रे में खड़ी है. यह पूरा इलाका पहाड़ियों और सुरंगों से घिरा हुआ है, जिस वजह से मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है. इस वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें भी हैं. इस बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इन सब चुनौतियों के बावजूद सेना का मनोबल बना हुआ है.

बता दें कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे अशांत प्रांत है. यहां 1948 से ही बलूचों और पाकिस्तानी सेना के बीच टकराव होता रहा है. बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से अलग होने की मांग समय से कर रहे हैं. बीते कुछ समय में चीन का इस इलाके में दखल बढ़ा है. चीन इस इलाके में कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिस वजह से उन पर लगातार हमले भी हो रहे हैं.

BLA की मांग है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग किया जाए. BLA की सबसे प्रमुख मांग है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सरकार या सुरक्षा एजेंसी का कोई भी नुमांइदा वहां नहीं होना चाहिए. इसके अलावा चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) भी बलूचिस्तान से होकर गुजरता है. BLA इसका विरोध करती है.

पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों ने 16 बलूच चरमपंथियों के मारे जाने का दावा किया है। हालांकि, बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के दावों का खंडन किया है और इसे पाकिस्तानी आर्मी का प्रोपेगैंडा बताया है। बीएलए ने बंधकों को छुड़ाने की खबरों को भी खारिज किया और दावा किया कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इंसानियत के नाते छोड़ा गया है। समूह ने कहा कि पाकिस्तानी आर्मी की कोशिश को नाकाम कर दिया गया है और उनका स्थिति पर पूरा नियंत्रण है।

हर घंटे 5 बंधकों को मारने की धमकी

समूह ने दावा किया कि उन्होंने कम से कम छह सैन्य कर्मियों को मार दिया और रेलवे ट्रैक को उड़ा दिया, जिससे ट्रेन को रुकना पड़ा। बीएलए ने धमकी दी है कि अगर पाकिस्तानी सेना ने कोई अभियान शुरू किया तो बंधकों को मारना शुरू कर देंगे। इसके साथ ही बीएलए ने बलूच राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की है और 48 घंटे तक इसके पूरा न होने पर हर घंटे 5 बंधकों को मारने की धमकी दी है।

कैसे बीएलए की बढ़ी ताकत?

विश्लेषकों का मानना है कि बीएलए की बढ़ती ताकत और उसका मुकाबला करने में राज्य की विफलता पुरानी रणनीतियों पर उसकी निर्भरता को दर्शाती है। वाशिंगटन डीसी में स्थित बलूचिस्तान विशेषज्ञ मलिक सिराज अकबर ने कहा कि बीएलए छोटे पैमाने पर हमले करने से लेकर बड़े पैमाने पर ऑपरेशन करने तक विकसित हो गया है। समूह अब यात्री ट्रेन पर हमला कर रहा है, जो दिखाता है कि सरकार के पास उन्हें रोकने की क्षमता नहीं है। इसके साथ ही समूह अब मीडिया में बने रहने के तरीकों को सीख गया है, जो उसे नए लड़ाकों की भर्ती के लिए आकर्षित करने में मदद कर रहा है।

ट्रेन पर हमले के बाद समूह ने लगातार सोशल मीडिया पर बयान जारी किया है, जिसमें लगातार घटनाक्रम पर अपडेट दिया है। यही नहीं, इसने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के दावों को भी गलत ठहराने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया है। जिस इलाके में ट्रेन को रोका गया है, वह दुर्गम पहाड़ी दर्रा है, जहां मोबाइल नेटवर्क और संसाधन पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में पाकिस्तानी आर्मी के लिए एक कड़ा अभियान चलाने में मुश्किल आ रही है।

BLA ने बलूच कैदियों की रिहाई के लिए पाक सरकार को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की ओर से जारी बयान के अनुसार, बीएलए के लड़ाकों से आठ घंटे की भीषण झड़प के बाद पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ है. बीएलए ने पाकिस्तान को कैदियों की अदला-बदली के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि वह बलूच कैदियों और जबरन गायब किए गए लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करता है. साथ ही चेतावनी देता है कि अगर उसकी शर्तें पूरी नहीं की गईं तो पाक सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

BLA ने ट्रेन में मौजूद 30 से अधिक सैनिकों को मारा

जानकारी के मुताबिक, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 30 से अधिक सैनिकों को मार दिया है. उसने कैदियों की अदला-बदली के लिए पाकिस्तान सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.

क्या हैं BLA की मांगें?

बीएलए लंबे समय से बलूचिस्तान की आजादी की मांग कर रहा है. बीएलए की मांग है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान की किसी भी सुरक्षा एजेंसी के लोग नहीं होने चाहिए. साथ ही चीन के साथ चल रहे सभी CPEC प्रोजेक्ट्स भी हटाए जाएं.

बलूचिस्तान अब पाकिस्तान के कंट्रोल से बाहर हो चुका है’, बोले रिटायर्ड मेजर जनरल जी.डी. बक्शी

जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हुए हमले को लेकर मेजर जनरल जी.डी. बक्शी (रि.) ने कहा, ‘बलूचिस्तान अब पाकिस्तान के कंट्रोल से बाहर हो चुका है. पाकिस्तान सेना में भारी निराशा फैली हुई है. बलूचिस्तान में ट्रेन हाईजैक की घटना बेहद अहम है. ट्रेन में 450-500 लोग हैं, और आतंकियों ने उन सभी को बंधक बना लिया है. मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान सेना बिना किसी हताहत के बंधकों को रिहा कराने का ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर सकती है. ये बेहद सटीक ऑपरेशन होते हैं, जिन्हें हमारी NSG बहुत कुशलता से अंजाम देती है.’

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