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सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद पीथमपुर रामकी एनवायरो में कचरे के निपटान की प्रक्रिया शुरू

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सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद गुरुवार को धार के पीथमपुर स्थित रामकी एनवायरो में कचरे के निपटान की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आज 10 टन कचरे का निष्पादन होगा. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 17-18 घंटे लगेंगे.

अधिकारियों ने बताया कि भोपाल से लाए गए यूनियन कार्बाइड के कचरे को कंटेनर से निकालने, उसकी जांच करने, उसे भस्मक तक ले जाने समेत भस्मक को गर्म करने और कचरे को जलाने के साथ ही लैंडफिल में उसे दबाने तक की प्रक्रिया की जाएगी.

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की टीम रामकी एनवायरो कंपनी के अंदर मौजूद है. वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए रामकी एनवायरो के बाहर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं.  ⁠बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को फैक्ट्री के बाहर तैनात किया गया है.

पुलिसकर्मियों को फैक्ट्री के बाहर तैनात किया गया है.

⁠फैक्ट्री के अंदर भी पुलिसकर्मियों से भरी बस को भेजा गया है. ⁠फैक्ट्री की ओर आने वाले रास्ते पर पुलिस ने बैटिकेड लगा दिए हैं. हालांकि, अभी किसी को रोका नहीं जा रहा है.

पहले चरण में 10 टन कचरा जलाया जाएगा

कोर्ट के इस रुख के बाद पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के रासायनिक कचरे के निष्पादन का ट्रायल आज से शुरू होगा। रामकी एनवायरो फैक्ट्री में कचरा जलाने का दूसरा ट्रायल 4 मार्च और तीसरा 12 मार्च से शुरू होगा। इधर, कचरा जलाने के ट्रायल को लेकर प्रशासन सतर्क है। इंदौर देहात और धार जिले के 24 थानों से 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी पीथमपुर में फैक्ट्री के पास तैनात किए गए हैं।
इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद परीक्षण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेशानुसार, पहले चरण में 10 टन कचरा जलाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस केस की सुनवाई की। बेंच ने अपशिष्ट के निपटान के होने वाले परीक्षण पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में सुनवाई कर रहे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पास जाने का सुझाव दिया। नागरिक संगठनों और पीड़ित पक्षों की अपील को ठुकरा दिया।
भोपाल गैस त्रासदी: एक भयावह इतिहास

1984 की भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदाओं में से एक थी। दो और तीन दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था, जिससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए और हजारों लोग अपंग हो गए थे।
कचरे का पीथमपुर स्थानांतरण और विरोध प्रदर्शन

भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे को 2 जनवरी 2025 को पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में लाया गया था। इसके बाद, स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने इसके खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह कचरा इंसानों और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर सकता है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज कर दिया है और कहा है कि कचरे के सुरक्षित निपटान के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

 

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