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वन गमन एवं केवट प्रसंग कथा श्रवण कर भाव विभोर हुए कथा श्रोता।

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वन गमन एवं केवट प्रसंग कथा श्रवण कर भाव विभोर हुए कथा श्रोता।

 

समय का चक्र सर्वोपरि है, प्रेम भक्ति से बढ़कर कोई भक्त नहीं –हेरम्य कृष्ण महाराज।

 

*अरविंद सिंह परिहार सीधी*

समय का चक्र सर्वोपरि है समय का चक्र कभी किसी को नहीं छोड़ता। और प्रेम भक्ति से बढ़कर कोई भक्त नहीं उक्त वक्तव्य कथा व्यास श्रद्धेय हेरम्य कृष्ण महाराज जी द्वारा केसरवानी गुप्ता परिवार नगर परिषद मझौली वार्ड क्रमांक 12 रमाकांत गुप्ता के घर विगत 12 मई से संचारित हो रही संगीतमय श्रीमद्भाल्मीकीय रामायण कथा के आज सातवें दिन राम वन गमन केवट प्रसंग कथा पाठ का प्रासंगिक वर्णन करते हुए कहा।

 

कथा व्यास हेरम्य कृष्ण दीक्षित जी महाराज ने श्रद्धालुओं को राम वन गमन की मार्मिक कथा सुनाते कहा कि समय चक्र सर्वोपरि है जो सब पर भारी पड़ता है। राजा दशरथ के चारों पुत्रों का विवाह हो जाने से अयोध्या में खुशी का माहौल था राम के राज्याभिषेक करने की घोषणा हो चुकी थी लोग उत्साहित थे इसी दौरान समय का एसा चक्र घुमा रानी केकई द्वारा मांगी गई पुरानी वरदान की याद आई और वह राजा दशरथ से अपने पुत्र भरत के लिए राज् और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग ली लक्ष्मण और सीता के साथ पिता की आज्ञा का पालन करते हुए जब राम अयोध्या से वन को जाने लगे उसे समय अयोध्या में अंधेरा छा गया लोगों में मायूसी की लहर दौड़ गई। जिससे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। सभी कथा श्रोता कथा का प्रासंगिक वर्णन श्रवण कर भाव विभोर हो गए। कहा गया है भाग्य पढ़ नहीं होते हैं समय होत बलवान।

वही दूसरे पाठ में केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा व्यास महाराज जी द्वारा बताया गया कि प्रेम भक्ति से बढ़कर अन्य कोई भक्ति नहीं है। केवट निषाद राज राम नाम की प्रेम भक्ति में डूबा था। समय का ऐसा चक्र घुमा की प्रेम भक्ति भगवान राम को खुद वहां कीच लाई इतना ही नहीं केवट निषाद राज को भगवान राम के चना अमित जी अर्जित हो गया। जबकि केवट निषाद राज में केवल प्रेम भक्ति भावना थी। इसलिए मनुष्य में प्रेम भक्ति भावना का समावेश होना चाहिए प्रेम भक्ति भावना से प्रभु के साक्षात दर्शन हो जाते हैं। बताते चले की यह संगीतमय श्रीमद् वाल्मीकि कथा का शुभारंभ 12 मई को विशाल का कलश यात्रा के साथ किया गया है जहां मुख्य श्रोता के रुप में रामखेलावन- केसरिया गुप्ता विराजमान हो परिवार एवं क्षेत्रीय जनों के साथ कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।कथा के आज सातवें दिन वन गवन केवट प्रसंग कथा पाठ का प्रासंगिक वर्णन किया गया। 19 मई रविवार को राम मंगल यात्रा, 20 मई सोमवार को भरत चरित्र शबरी प्रेम, 21 मई मंगलवार को सुंदरकांड, राम राज्याभिषेक कथा पाठ वर्णन के साथ चढ़ोत्ती व हवन एवं 22 मई बुधवार को तर्पण, ब्राह्मण भोज, एवं विशाल भंडारा आयोजित किया जा रहा है उक्त अवसर पर आयोजक गुप्ता परिवार रमाकांत -तुलसी, बृजेश- शतरूपा, उमेश- रोहिणी (हेमा), रानी -कमल, राजीव, शिप्रा द्वारा क्षेत्रीय जनों से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की गई है।

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