News By- हिमांशु उपाध्याय / नितिन केसरवानी
मासूम बच्चों, महिलाओं और पुरुषों ने गंवाई जान; 5 गंभीर घायल, 6 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज — हादसे ने अवैध पटाखा कारोबार पर उठाए बड़े सवाल
सीएम योगी ने जताया गहरा दुख, मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये सहायता के निर्देश
कौशाम्बी: जिले के मनौरी क्षेत्र में संचालित अवैध पटाखा फैक्ट्री में सोमवार को हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के क्षेत्रों में तेज आवाज सुनाई दी और घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत की औपचारिक पुष्टि की गई है, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में मासूम बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया गया तथा घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। हादसे के बाद घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
हादसे में 11 लोगों की मौत
हादसे में जान गंवाने वालों के नाम सामने आए हैं—
1. प्रियांजलि – 5 वर्ष
2. प्रवीण सिंह – 13 वर्ष
3. जाह्नवी – 12 वर्ष
4. आदित्य – 12 वर्ष
5. रवि – 8 वर्ष
6. ज्ञान सिंह – 40 वर्ष
7. आदित्य – 8 वर्ष
8. अंजू – 32 वर्ष
9. विक्रम सरोज – 35 वर्ष
10. अंश – 6 वर्ष
11. नन्हा – 4 वर्ष
मृतकों की सूची में कई मासूम बच्चों के नाम होने से हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। घटना के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है।

अवैध निर्माण और भंडारण की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां पटाखों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था। अवैध रूप से पटाखा निर्माण या भंडारण की बात सामने आने के बाद प्रशासन के सामने सुरक्षा मानकों और अनुमति से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विस्फोट के कारणों का वास्तविक पता विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है।
6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
हादसे के मामले में 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपियों की भूमिका और फैक्ट्री संचालन से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच कर रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में जिसकी भी लापरवाही अथवा जिम्मेदारी सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिम्मेदार लोगों की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई की बात भी प्रशासन की ओर से कही गई है।


डीएम ने दिए जांच के आदेश
जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के साथ घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम ने कहा है कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सीएम योगी ने जताया गहरा दुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशाम्बी हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने घटना में हुई जनहानि को अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक बताते हुए मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने तथा पीड़ित परिवारों से संपर्क कर उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर—
मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये
घायलों को 50-50 हजार रुपये
की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की गई है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी जताया शोक
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और प्रशासन से राहत-बचाव कार्य तथा उपचार व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने की अपेक्षा जताई।

एक साल पुराने हादसे के बाद भी नहीं थमा सवाल
मनौरी की घटना ने जिले में पटाखा निर्माण और भंडारण की व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भरवारी क्षेत्र में करीब एक वर्ष पहले हुए पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद भी यदि जिले में अवैध रूप से पटाखा निर्माण या भंडारण का काम चल रहा था, तो यह प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध पटाखा निर्माण अथवा भंडारण की गतिविधियां चल रही थीं, तो समय रहते उनकी जानकारी संबंधित विभागों को क्यों नहीं हुई? क्या लाइसेंस, भंडारण क्षमता, अग्निशमन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की जा रही थी?
हादसे के बाद उठे कई बड़े सवाल
मनौरी की घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल छोड़ गई है—
❓ क्या जिले में संचालित सभी पटाखा निर्माण और भंडारण केंद्रों का सत्यापन कराया गया था?
❓ क्या संबंधित फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस और जरूरी अनुमति थी?
❓ क्या अग्निशमन विभाग और प्रशासन की ओर से स्थल का निरीक्षण किया गया था?
❓ यदि फैक्ट्री अवैध थी तो इसके संचालन की जानकारी जिम्मेदार विभागों को क्यों नहीं हुई?
❓ क्या हादसे के बाद जिले में ऐसे अन्य ठिकानों की भी जांच होगी?
❓ फैक्ट्री संचालन के साथ-साथ कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी?

अब आगे की कार्रवाई पर नजर
घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह है कि जांच केवल मुकदमा दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रहे। यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि फैक्ट्री में पटाखों का निर्माण या भंडारण कब से हो रहा था, किसकी अनुमति से हो रहा था, सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय करना जरूरी होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
फिलहाल प्रशासन और पुलिस की टीमें राहत-बचाव एवं जांच में जुटी हैं। घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों को लेकर जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।