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एक ही भूमि पर स्टे पर स्टे लगा, तहशीलदार ने छ: माह से रोक रखे हैं गृह निर्माण कार्य?

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एक ही भूमि पर स्टे पर स्टे लगा, तहशीलदार ने छ: माह से रोक रखे हैं गृह निर्माण कार्य?

 

ग्राम पंचायत कपुरी कोठार का मामला नायब तहसीलदार के सीमांकन को तहसीलदार द्वारा निरस्त करने का आरोप।

 

परेशान यूवक न्याय पाने ब्लॉक से लेकर जिले का लगा रहा चक्कर।

 

*अरविंद सिंह परिहार सीधी*

 

मामला जिले के रामपुर नैकिन तहसीलदार का सामने आया है जहां एक ही भूमि पर दो-दो बार स्टे देने का मामला काफी सुर्खियों में बना हुआ है।यह मामला ग्राम पंचायत कपुरी कोठार निवासी पंकज गुप्ता का सामने आया है!बताया गया है कि ग्राम पंचायत कपुरी कोठार निवासी पंकज गुप्ता के द्वारा अपनी स्वयं की भूमि पर मकान निर्माण कराया जा रहा था। जिस पर तहसीलदार के द्वारा 10 दिसंबर 2025 को स्टे देकर निर्माण कार्य में रोंक लगा दी गई थी। उसके बाद तहसीलदार ने उक्त निर्माण कार्य पर निजी पर लगी भूमि हटा दी और कहा कि पंकज गुप्ता द्वारा अपनी स्वयं की भूमि पर ही निर्माण कार्य किया जा रहा है। उसके बाद तहसीलदार के द्वारा पुन: 18 मार्च 2026 को उक्त निर्माण कार्य पर रोंक लगाते हुए कहा कि आपके द्वारा शासकीय आराजी क्रमांक 406, रकवा 0.200 हे. आबादी मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए सुरक्षित है। उक्त शासकीय भूूमि पर आपके द्वारा गिट्टी-बालू रखकर अवैध अतिक्रमण किया गया है। इस कारण मकान निर्माण पर रोंक लगाई जा रही है। इतना ही नहीं तहसीलदार के द्वारा नायब तहसीलदार के नेतृत्व में सीमांकन टीम गठित की गई। जिसके सीमांकन के दौरान पंकज गुप्ता के द्वारा अपनी भूमि पर निर्माण कार्य होना पाया गया। इसके बाद भी तहसीलदार ने नायब तहसीलदार के द्वारा किए गए सीमांकन को गलत मानकर सीमांकन अमान्य कर दिया गया। इस तरह 6 माह से पंकज गुप्ता के निर्माण कार्य में बिना किसी कारण के रोंक लगाई गई है। निर्माण कार्य पर रोंक लगने के बाद पीडि़त द्वारा लगातार सभी कागजात लेकर तहसील कार्यालय का चक्कर काटा जा रहा है। सभी वैध कागजात होने के बावजूद तहसीलदार द्वारा उनको अमान्य अपने तरीके से किया जा रहा है। खबर है कि पीडि़त द्वारा कलेक्टर सीधी के यहां भी आवेदन दिया गया जिसमें कहा गया कि ग्राम कपुरी कोठार में पंकज कुमार पिता रामदीन गुप्ता के नाम से 15 ढि़स्मिल जमीन है जिसका सर्वे नंबर 405 है। यह भूमि रजिस्ट्री पर खरीदी गई थी। उक्त भूमि में मकान का निर्माण किया जा रहा है। राजस्व अमले द्वारा जांच के दौरान 406 नंबर में 8 फुट कोना गलत नापकर फंसा दिया गया। 248 का मामला चलाया गया। जिसमें त तहसील न्यायालय में जवाब देने पर खारिच कर दिया गया। आदेश होने के बाद बार-बार हल्का पटवारी द्वारा 248 का नोटिस कटवाया जाता है। प्रकरण में आदेश होने के बाद ऊपर की अदालत में जाने के लिए कहा जाता है। तहसीलदार से निवेदन करने पर कोई सुनवाई नहीं की जाती। हल्का पटवारी एवं आरआई द्वारा दबाव में भूमि की गलत नाप की जाती है। उसकी निजी भूमि 405 नंबर को करीब 31 फुट सरकारी भूमि में नापा जाता है जो करीब 5 ढिस्मिल है।

 

*ड्राइवर पर दलाली करने का आरोप।*

 

तहसीलदार रामपुर नैकिन के वाहन का ड्राइवर इन दिनों पूरी तरह से भूमियों के मामले में दलाली का कार्य किया जा रहा है। कई पीडि़त किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि ड्राइवर द्वारा तहसील न्यायालय में भूमि विवाद को लेकर आने वाले लोगों से संपर्क कर कहा जाता है कि इस कार्य के लिए इतनी सुविधा शुल्क देनी होगी। ड्राइवर के माध्यम से सुविधा शुल्क देने वाले लोगों का काम हो जाता है। इस वजह से अब भूमि विवाद में मनमानी तौर पर फंसाए गए लोग मजबूरी में ड्राइवर की मदद ले रहे हैं। जिससे उनके पक्ष में न्यायालय का निर्णय आ सके।

 

*आबादी भूमि का कर दिया गया बंटवारा*

 

आरोप है कि तहसील रामपुर नैकिन अंतर्गत ग्राम बुढग़ौना की आबादी भूमि का प्रकरण 162/अ/27/2025-26 आदेश दिनांक 17 अप्रैल 2026 तहसीलदार की अधिकारिता क्षेत्र में न होने के बाद भी बंटवारा कर दिया गया। बताया गया है कि तहसीलदार को आबादी प्रकरणों की सुनवाई का अधिकार नहीं है फिर भी तहसीलदार रामपुर नैकिन द्वारा अपने अधिकारिता क्षेत्र से बाहर जाकर आबादी के प्रकरणों की सुनवाई की जा रही है। साथ ही उनमें मनमानी तौर पर आदेश में जारी किया जा रहा है। जिसके चलते तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं कि तहसीलदार को अपने अधिकारिता क्षेत्र के बाहर के मामलों की सुनवाई एवं फैसला करने का अधिकार कहां से मिल गया है? आपने आप में बड़ा सवाल है।

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