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जनजातीय कार्य विभाग में 58 लाख की ‘रोटी मेकर’ मशीन खरीद में कालाधन का तांडव, नियमों की धज्जियां उड़ा खास सप्लायर को मिला फायदा

मशीनें बंद, बिजली नहीं, प्रशिक्षण नहीं; क्रय भंडार नियमों की हवा में उड़ाई गई बंधन, विभागीय अधिकारी जांच के घेरे में

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जनजातीय कार्य विभाग में 58 लाख की ‘रोटी मेकर’ मशीन खरीद में कालाधन का तांडव, नियमों की धज्जियां उड़ा खास सप्लायर को मिला फायदा

 

मशीनें बंद, बिजली नहीं, प्रशिक्षण नहीं; क्रय भंडार नियमों की हवा में उड़ाई गई बंधन, विभागीय अधिकारी जांच के घेरे में

 

मनीष कुमार राठौर/8109571743

भोपाल / नर्मदापुरम। जनजातीय कार्य विभाग में घोटाला कोई नई बात नहीं है। सालों से होते आ रहे इन अनियमितताओं पर रोक लगाने में नर्मदापुरम जिला के जिलाधीशों ने भी कोई खास रुचि नहीं दिखाई, जिसका नतीजा आज यह है कि यहां लाखों के भ्रष्टाचार तक मामला जा पहुंचा है। अब विभागीय खरीद में अनियमितताओं का अंबार लग गया है, जिसकी परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार, फरवरी-मार्च के दौरान लगभग 58 लाख रुपये की लागत से रोटी मेकर मशीनों की खरीदी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों से स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, कई स्थानों पर मशीनों का अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर प्रश्नचिह्न लग गया है ? आपको बता दे कि 28 छात्रावासों के नाम पर खरीदी अब हकीकत में क्या है इसकी सच्चाई तो आपको जानकारी हैरानी होगी कि यह संपूर्ण खरीदी 28 छात्रावासों, आश्रम, शालाओं, की आवश्यकता बताकर की गई थी, लेकिन तथ्य यह है कि मशीनें या तो उपयोग में नहीं हैं या उनकी क्षमता वास्तविक जरूरत से कहीं अधिक है। ऐसे में खरीदी प्रक्रिया और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो जाती है। सवाल यह भी है कि डिमांड किसने दी और कितने बच्चों के लिए, क्योंकि नियमों के तहत छात्रावास में बच्चों की संख्या के अनुसार ही खरीदी की जाती है। दर निर्धारण और टेस्टिंग पर भी सवाल खड़े हो गए है क्योंकि कुछ स्थानों पर इनका संचालन ही नहीं हो रहा है ।

 

मध्य प्रदेश क्रय एवं भंडारण नियम की धज्जियां उड़ाईं

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मध्य प्रदेश के क्रय एवं भंडारण नियम का उल्लंघन करते हुए खरीदी कैसे की गई? जानकारों के अनुसार, प्रदेश में लागू ‘मध्य प्रदेश भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम, 2015’ के तहत ₹50,000 से अधिक की वस्तुओं की खरीदी के लिए पारदर्शी बोली प्रक्रिया, जेम पोर्टल, मध्यप्रदेश टेंडर पोर्टल, खबर में निदिवा अपनाना अनिवार्य है। इसके बावजूद इस खरीद में नियमों की अनदेखी की गई। यहां तक कि मध्यप्रदेश के 28 जिलों में इसी तरह की गड़बड़ी के बाद विभागीय आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि टेंडर में ऐसी शर्तें न जोड़ी जाएं, जिनसे प्रतिस्पर्धा सीमित हो, लेकिन इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन किया गया।

 

क्या मशीन चलेगी? बिजली का लोड और फिटिंग का प्रश्न

 

खरीदी से पहले यह जांचना भी जरूरी था कि क्या मशीन चलाने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था है, क्या छात्रावासों की बिजली फिटिंग इतनी मजबूत है कि मशीन का लोड उठा सके, और क्या बिजली मीटर कनेक्शन की इजाजत है। सूत्रों की मानें तो इन सबकी जांच किए बिना ही खास सप्लायर से लाखों की खरीदारी कर दी गई।

 

कहां गए सवालों के जवाब?

 

· किसने मशीन के रेट की तुलना (Comparison) की?

· मशीनों पर कितना बिजली बिल आएगा?

· क्या ये मशीनें बिना प्रशिक्षण के चलाई जा सकती हैं?

· आखिरकार इतनी बड़ी खरीद की अनुमति किसने दी?

 

 

क्या कहना है ।

 

विवेक नागवंशी सहायक आयुक्त जिला अधिकारी नर्मदापुरम

 

खबर के विषय में कॉल किया गया परन्तु किसी प्रकार का पक्ष सहायक आयुक्त के द्वारा नहीं रखा गया ।

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