बैतूल स्वास्थ्य विभाग में स्टोर कीपर पोस्टिंग में महा घोटाला ?
क्या मध्यप्रदेश विधानसभा को भी गुमराह करने का कार्य किया बैतूल सीएमएचओ ने ?
बैतूल स्वास्थ्य विभाग में स्टोर कीपर पोस्टिंग में महा घोटाला ?
क्या मध्यप्रदेश विधानसभा को भी गुमराह करने का कार्य किया बैतूल सीएमएचओ ने ?
भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी में नंबर 1 बैतूल CMHO
मध्य प्रदेश संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं क्षेत्रीय संचालक के आदेश की अवहेलना बैतूल महकमा का काम
मनीष कुमार राठौर । 8109571743
भोपाल/बैतूल । जिले के स्वास्थ्य विभाग में स्टोर कीपर पदस्थापना को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय सूत्रों और कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद जिले में स्टोर कीपर का कार्य कथित रूप से नियम विरुद्ध तरीके से कराया जा रहा है। मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठ रही हैं। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं क्षेत्रीय संचालक द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों में वरिष्ठ एवं नियमित फार्मासिस्ट से ही स्टोर संबंधी कार्य लेने का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद बैतूल जिले में नियमित संविदा कर्मचारियों से स्टोर कीपर का कार्य कराया जा रहा हैं। जानकारों का कहना है कि जिले में नियमित एवं वरिष्ठ फार्मासिस्ट उपलब्ध होने के बाद भी नियमों की अनदेखी कर अन्य कर्मचारियों को जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े करता है।
विधानसभा प्रश्न के बाद भी नहीं हुआ सुधार?
सूत्रों के मुताबिक पूर्व में यह मामला विधानसभा तक पहुंच चुका है, जहां प्रदेश के विभिन्न जिलों में नियम विरुद्ध व्यवस्थाओं को लेकर प्रश्न उठाया गया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि बैतूल जिले से शासन को क्या जानकारी भेजी गई और क्या वास्तविक स्थिति उससे मेल खाती है? कर्मचारियों और जानकारों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
“गलत आदेश सुधारने के बजाय जारी है पुरानी व्यवस्था”
स्वास्थ्य विभाग के अंदरूनी सूत्रों का आरोप है कि पूर्व में जारी आदेशों में यदि कोई त्रुटि थी तो उसे सुधारने के बजाय वर्तमान अधिकारियों द्वारा उसी व्यवस्था को जारी रखा गया। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं विभागीय स्तर पर किसी प्रकार का संरक्षण तो नहीं दिया जा रहा।
भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप
स्वास्थ्य विभाग में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर आमजन और कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर विभागीय कार्यों का संचालन किया जा रहा है, जिससे शासन की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि शासन के निर्देशों की अवहेलना माना जा सकता है।


