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टेलीग्राम बन गया गंदे वीडियोज का अड्डा, ऐप पर आतंकियों को भी मिल रही पनाह

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नई दिल्ली
 2013 में दो रूसी भाइयों ने टेलीग्राम मैसेंजर नाम से एक ऐप बनाया, जो अगले 10 साल में ही पॉपुलर होने के साथ दुनिया के लिए चुनौती भी बन गया। प्रोग्रामर और गणितज्ञ निकोलाई वालेरेविच दुरोव और बिजनेस एक्जीक्यूटिव रहे उनके भाई पावेल दुरोव के दिमाग में पहली बार यह आइडिया तब आया, जब दोनों रूसी सोशल नेटवर्क वीके के लिए काम करते थे। मगर, दोनों ने यह सोच लिया था कि कुछ तो अलग करना ही है। 2014 में दोनों भाइयों ने टेलीग्राम की खातिर कंपनी छोड़ दी। उनका यह कदम रूस की व्लादिमीर पुतिन सरकार को रास नहीं आया। दोनों पर इतना दबाव बढ़ा कि उन्हें देश छोड़ना पड़ा। हाल ही में पेरिस में टेलीग्राम के चीफ एग्जीक्यूटिव पावेल दुरोव को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद से ही भारत में टेलीग्राम के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानते हैं कि क्यों टेलीग्राम को बैन किए जाने की बात हो रही है? आखिर टेलीग्राम को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

टेलीग्राम पर NEET परीक्षा लीक और यूजीसी नेट परीक्षा विवाद

हाल ही में यूजीसी नेट और नीट परीक्षा विवाद में भी टेलीग्राम का नाम सामने आया था। इसी साल 5 मई को आयोजित NEET UG परीक्षा को बिहार, झारखंड, राजस्थान और हरियाणा के विभिन्न जिलों में लीक कर दिया गया था। जांच में टेलीग्राम को इस माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया बताया गया था। टेलीग्राम फेसबुक, यूट्यूब, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और वी चैट के बाद सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में से एक है।
हेट स्पीच और आतंकी प्रोपेगंडा को रोकने के लिए लग सकती है पाबंदी

टेलीग्राम यूजर्स को पायरेटेड कंटेंट जैसे फिल्में, संगीत, सॉफ्टवेयर, ई-बुक्स वगैरह शेयर करने के लिए भी जाना जाता है। वहीं, इस प्लेटफॉर्म का उपयोग हेट स्पीच और चरमपंथी प्रचार को फैलाने के लिए किया जा रहा है। इन अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए भारत में टेलीग्राम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें ऐप पर प्रतिबंध लगाने की आशंका भी लगाई जा रही है।

क्या है टेलीग्राम और किन प्लेटफॉर्म्स पर करता है काम

टेलीग्राम एक क्लाउड-आधारित इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप है जो दुनिया भर के लोगों द्वारा एक्सेस किए जाने वाले कई प्लेटफॉर्म पर काम करता है। आपको अपने संपर्कों को किसी भी प्रकार के संदेश, फोटो, वीडियो और फाइलें मुफ्त में भेजने की अनुमति देता है। आप असीमित कॉन्टैक्ट्स या यूजर्स के लिए प्रसारण के लिए 200,000 लोगों तक के समूह या चैनल भी बना सकते हैं। यह अपने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन चैट के साथ-साथ वीडियो फोन कॉल के लिए भी जाना जाता है। टेलीग्राम में शामिल प्लेटफॉर्म में से एक है मेलचिंप। टेलीग्राम के इस वक्त पूरी दुनिया में 700 मिलियन से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। खास बात यह है कि यह कि इस ऐप का कभी विज्ञापन नहीं किया जाता है। जनवरी, 2021 में यह दुनिया का सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया था। 6.3 करोड़ डाउनलोड के साथ यह नंबर वन बन चुका है। ऐप ने कहा कि सालाना करीब एक अरब यूजर टेलीग्राम का इस्तेमाल कम्युनिकेशन और सूचना के लिए करते हैं।

व्हाट्सऐप से कितना अलग है टेलीग्राम ऐप

आज व्हाट्सऐप समेत कई पॉपुलर मैसेजिंग ऐप मौजूद हैं। एंड टू एंड एन्क्रिप्शन के साथ वॉयस और वीडियो कॉल की सुविधा टेलीग्राम और व्हाट्सऐप में एक जैसी हैं। व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के बीच सबसे बड़ा फर्क यह है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल तब भी किया जा सकता है, जब दूसरे का नंबर भूल गए हों। जबकि, मैसेज के लिए व्हाट्सऐप या अन्य मैसेजिंग ऐप में आपको दूसरे पक्ष का फोन नंबर पता होना चाहिए। टेलीग्राम में किसी भी व्यक्ति से सीक्रेट चैट किया जा सकता है, जबकि व्हाट्सऐप फोन नंबर के बिना सीक्रेट चैट की अनुमति नहीं है। एक फर्क यह भी है कि टेलीग्राम इस्तेमाल करने वाले अपनी पूरी मैसेज हिस्ट्री, फोटोज, वीडियोज और फाइलों को क्लाउड पर सहेज सकते हैं। इससे जरूरत पड़ने पर यूजर्स भविष्य में इनमें से किसी भी जरूरत को पूरी कर सकते हैं। व्हाट्सऐस या दूसरे मैसेजिंग ऐप ये सुविधाएं नहीं देते हैं।

बच्चों के गंदे वीडियो CP के नाम से बिक रहे

साइबर एक्सपर्ट मोनाली बताती हैं कि टेलीग्राम के कुछ ग्रुप पर ‘CP’ नाम से बच्चों के गंदे वीडियो की खरीद-फरोख्त की जाती है। टेलीग्राम चैनल ‘स्टॉप चाइल्ड अब्यूज’ पर पोस्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल 26 जुलाई को टेलीग्राम द्वारा बाल दुर्व्यवहार से संबंधित 2,193 से अधिक समूहों और चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जुलाई में ऐसे 53,000 ऐसे चैनलों और समूहों पर पाबंदी लगाई गई। इस साल 26 जुलाई तक 6,70,000 टेलीग्राम चैनलों और ग्रुप्स पर प्रतिबंध लगाया गया था। ऐसे गंदे वीडियो को पहले तो डार्क वेब से डाउनलोड किया जाता है, फिर उन्हें टेलीग्राम पर खरीदा या बेचा जाता है।

रक्तबीज की तरह पैदा हो जाते हैं टेलीग्राम पर डार्क ग्रुप्स

साइबर एक्सपर्ट मोनाली कृष्ण गुहा के अनुसार, टेलीग्राम पर एडल्ट कंटेंट और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो आसानी से मिल रहे हैं। टेलीग्राम चैनलों पर ऐसे कंटेंट की भरमार है। डार्क वेब की तरह टेलीग्राम भी मोबाइल यूजर्स के लिए डार्क वेब बनता जा रहा है। यूजर्स को ऐसे कंटेंट आसानी से मिल जाते हैं। इन्हें जब टेलीग्राम पर रिपोर्ट किया जाता है तो उन्हें बंद कर दिया जाता है, मगर अगले ही दिन ऐसे गंदे वीडियो बेचने वाले कई ग्रुप्स रक्तबीज की तरह पैदा हो जाते हैं। रक्तबीज एक मिथकीय राक्षस था जिसे मारने के बाद रक्त की जितनी बूंदे धरती पर गिरतीं, उतने ही रक्तबीज पैदा हो जाते थे।

टेलीग्राम बन रहा आतंकियों, ड्र्रग डीलरों के लिए अड्डा

टेलीग्राम की सुविधानजक मॉडरेशन नीतियों और एन्क्रिप्टेड सेवा ने इसे साइबर अपराधियों, आतंकी संगठनों और ड्रग डीलरों के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन बना दिया है। इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों ने सार्वजनिक रूप से हमलों की जिम्मेदारी लेने के लिए टेलीग्राम का अक्सर इस्तेमाल किया है। वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-हमास संघर्ष से जुड़े लोग और राजनीति से प्रेरित हैकर भी टेलीग्राम पर अपनी आपराधिक गतिविधियों के बारे में पोस्ट करते रहते हैं। इसके अलावा, हैकर्स भी टेलीग्राम का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों को छिपाने में करते हैं।

टेलीग्राम क्यों बना आतंकियों और ड्रग डीलरों के लिए स्वर्ग

साइबर एंड फॉरेंसिक लॉ एक्सपर्ट मोनाली कृष्ण गुहा बताती हैं कि एंड टू एंड एनक्रिप्शन, खुद का नया फोन नंबर बनाकर इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता,अपनी पहचान एवं लोकेशन छिपाने की सुविधा की वजह से इसका इस्तेमाल ड्रग डीलर्स, ऑर्म्स डीलर और आतंकी करते हैं। वहीं पीपल नियर बाय मी के द्वारा आपराधिक गतिविधियों में शामिल तस्करों की लोकेशन देखकर उनसे मिलना आसान होता है। टेंप बोट्स के फीचर्स के कारण टेंपररी ईमेल जनरेट करके सुरक्षित कम्युनिकेशन एक अन्य कारण है। वॉयसी बॉट के माध्यम से स्पीच टू टेक्स्ट फीचर के स्तेमाल से बोल कर टाइपिंग की सुविधा साथ ही अन्य ऐसे कई बॉट हैं जो फोटो से बैकग्राउंड रिमूव कर देते हैं जिससे खुफिया संदेश पहुंचाने और तस्करी में अपनी एवं आसपास की लोकेशन की पहचान छिपाने में मदद मिलती है।

सीक्रेट चैट को फॉरवर्ड नहीं किया जा सकता

टेलीग्राम के सीक्रेट चैट में क्या बात हो रही है, इसका पता लगाना मुश्किल होता हे। यूजर्स इन मैसेज को खुद भी फॉरवर्ड नहीं कर सकते। हालांकि, वो इन चैट्स को डिलीट जरूर कर सकते हैं। बड़ी चुनौती यह है कि टेलीग्राम पर भेजे गए कंटेंट या चैट को रोकन और भी कठिन हो जाता है। एपल और व्हाट्सऐप मैसेजेज भी डिफॉल्ट रूप से एन्क्रिप्टेड होते हैं, लेकिन ये यूजर्स को वर्चुअल फोन नंबर के साथ साइन अप की अनुमति नहीं देते हैं। इसके अलावा, टेलीग्राम अकाउंट्स को सिम कार्ड से लिंक करने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।

टेलीग्राम को डार्क वेब का दूसरा रूप क्यों कहा जाता है

डार्क वेब फोरम में मैसेजिंग सुविधाएं आमतौर पर एन्क्रिप्टेड नहीं होती हैं और उनमें अंतराल होता है क्योंकि वे ईमेल के समान ही काम करते हैं। डार्क वेब फोरम के विपरीत टेलीग्राम के पूरी तरह से डार्क होने की भी आशंका नहीं है। दरअसल, टेलीग्राम की सेवा की शर्तें इतनी अस्पष्ट हैं कि बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार सहित अवैध गतिविधियों को पनपने में सहायक होता है। हालांकि, टेलीग्राम अपने यूजर्स को आधिकारिक तौर प अश्लील सामग्री पोस्ट करने से रोकता है। मगर, लोचा यह है कि जब आप टेलीग्राम पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न करते हैं तो यह कहता है कि सभी टेलीग्राम चैट और ग्रुप चैट उनके प्रतिभागियों के बीच निजी हैं। हम उनसे संबंधित किसी भी अनुरोध पर कार्रवाई नहीं करते हैं।

किलनेट जैसे रूसी हैकर्स भी इनका करते हैं इस्तेमाल

रूस समर्थक हैकरों का एक ग्रुप किलनेट टेलीग्राम का इस्तेमाल करता है। इन हैकरों और साइबर अपराधियों ने टेलीग्राम के कई चैनलों का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया है। कहा तो यह भी जाता है कि इन हैकरों ने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने के लिए भी टेलीग्राम का खूब इस्तेमाल किया था। यह समूह अमेरिकी अस्पतालों, एयरपोर्ट्स से जुड़ी वेबसाइटों को जब-तब हैक करके गड़बड़ियां फैलाता रहता है। सितंबर 2022 में इस समूह ने एक अलग सुपरग्रुप बनाया, जिससे 5,000 हैकर्स ऐसे जोड़े गए, जिनका मकसद नए हैकरों की भर्ती करना है।

टेलीग्राम सर्विस में क्या है टर्म कंडीशन

टेलीग्राम ऐप की टर्म एंड कंडीशन में लिखा हुआ है कि साइन अप करके आप हमारी गोपनीयता नीति को स्वीकार करते हैं। यूजर्स को स्पैम या स्कैम के लिए हमारी सर्विस का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। सार्वजनिक रूप से टेलीग्राम चैनलों, बॉट्स आदि पर हिंसा को बढ़ावा देना और अवैध अश्लील सामग्री पोस्ट करने की भी मंजूरी नहीं है।

क्यों अपराधियों के बीच फैल रहा है यह गंदा धंधा

साइबर फॉरेंसिक एंड लॉ एक्सपर्ट मोनालीकृष्ण गुहा कहती हैं कि अपराधियों और आतंकियों के बीच टेलीग्राम की पॉपुलैरिटी की बड़ी वजह है टेलीग्राम में जरूरी मॉडरेशन प्रक्रिया का पालन न किया जाना। टेलीग्राम के माध्यम से किसी भी व्यक्ति से विश्वस्तर पर जुड़ा जा सकता है। यह एक ऐसा कारण है जो अपराधियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इसमें जुड़े सुरक्षा फीचर्स अपराधियों द्वारा अपने आप को छिपाने में स्तेमाल किए जाते हैं। साथ भी कई अलग अलग ग्रुप बना कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को जोड़ पाने की सुविधा आपराधिक गतिविधियों को और आसान बना देती है।

शेयरों में सट्टेबाजी बनी पंप एंड डंप घोटाला

इस साल अप्रैल में बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) ने टेलीग्राम पर शेयरों में हो रही सट्टेबाजी की जांच की बात की थी। सेबी का मानना था कि इन चैनलों पर कुछ लोग शेयरों के भाव फर्जी तरीके से बढ़ा या घटा रहे हैं। इससे आम निवेशकों को नुकसान हो रहा है। सेबी ने 30 सितंबर 2021 को मिली शिकायत के आधार पर सेफबुल्स नामक चैनल के खिलाफ जांच शुरू की थी। सेबी ने जाच में पाया कि चैनल कई शेयरों की सिफारिश टेलीग्राम चैनल के जरिये कर रहा था और फिर इन्हें रीटेल निवेशकों को लेने की सलाह दे रहा था। उस वक्त इसे ‘पंप एंड डंप’ घोटाला कहा गया। मोनाली कृष्ण गुहा बताती हैं कि अभी दुनिया भर में इन्वेस्टमेंट फ्रॉड ट्रेडिंग हो रही हैं। टेलीग्राम से आने वाली वायरल लिंक अथवा .apk फाइल पर क्लिक करने से बचें।

क्या AI टेलीग्राम ऐप के गंदे कंटेंट को रोक सकता है

मोनालीकृष्ण गुहा बताती हैं कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI के माध्यम से इनमें रिस्ट्रिक्शन फिल्टर अप्लाई किए जाएं । इस ऐप में इस तरह के कंटेंट को रोकने को लेकर पर्याप्त तकनीकी जांच न होने के कारण इन्हें इस पर भेजना वायरल करना आसान है। आपराधिक कंटेंट को बढ़ावा न देना और रोकने में देश एवं सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग करना सभी सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज की नैतिक जिम्मेदारी है एवं इसके लिए कानूनी प्रावधान भी हैं। जिन्हें टेलीग्राम पर भी सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। इस पूरे नेटवर्क,इनके डेटाबेस,यूजर्स आदि की जांच की जाए तो निश्चित कई आपराधिक गिरोहों को पकड़ना आसान हो जाएगा।

क्या टेलीग्राम पर पाबंदी लगने के बाद इसके कुछ विकल्प हैं

भारत में टेलीग्राम पर पाबंदी को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं। ऐसे में टेलीग्राम के अलावा कई और भी विकल्प हैं, जो गोपनीयता और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। ये हैं व्हाट्सऐप (WhatsApp), सिगनल (Signal), ब्रोसिक्स (Brosix) और मैटरमोस्ट (Mattermost)।

टेलीग्राम के सीईओ को क्यों गिरफ्तार किया गया, क्या हैं आरोप

अधिकारियों के मुताबिक, 39 साल के अरबपति को मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम से संबंधित गतिविधियों के मामले में गिरफ्तार किया गया। दुरोव पर आरोप है कि टेलीग्राम पर हो रही आपराधिक गतिविधियों को रोकने में वो विफल रहे। टेलीग्राम पर आरोप है कि मादक पदार्थों की तस्करी, बाल यौन सामग्री और धोखाधड़ी के मामलों की जांच में इस ऐप ने अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं किया। हालांकि टेलीग्राम ने इस आरोप से इनकार किया है कि वो इस तरह की चीजों को रोकने में विफल रहे। टेलीग्राम ने एक बयान में कहा, ऐप का मॉडरेशन (अवांछित गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें काबू में करना) इंडस्ट्री के मानदंड के अनुसार हैं और लगातार इसमें सुधार भी हो रहा है।

 

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