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मैकल-अमरकंटक बायोस्फियर में क्रेशर माफिया का दबदबा!

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मैकल-अमरकंटक बायोस्फियर में क्रेशर माफिया का दबदबा!

पर्यावरणीय उल्लंघन पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार पर हमला, FIR दर्ज

ज्ञानेंद्र पांडेय 8516868379
अनूपपुर

मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ की सीमा पर अमरकंटक–मैकल पर्वत श्रृंखला से एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में स्टोन क्रेशर संचालन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर ग्राउंड रिपोर्टिंग कर लौट रहे पत्रकार सुशांत गौतम पर पर हमला कर दिया गया। घटना में पत्रकार की गाड़ी का कांच तोड़ा गया, उन्हें चोटें आईं, जबकि उनके साथी का मोबाइल छीनकर संपर्क बाधित करने की कोशिश का भी आरोप है। यह मामला अब केवल पत्रकार पर हमले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे खनन-क्रेशर माफिया, प्रशासनिक चुप्पी और जंगलराज की मानसिकता से जोड़कर देखा जा रहा है। घटना के बाद प्रदेशभर में आक्रोश की स्थिति बन रही है और पत्रकार सुरक्षा एवं अवैध खनन पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

नियमों का खुला उल्लंघन

मरवाही वनमंडल ने अनूपपुर खनिज विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि पमरा क्षेत्र में तीन स्टोन क्रेशरों द्वारा पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन किया गया। साथ यह भी दर्ज है कि वन क्षेत्र के बेहद करीब उत्खनन किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार क्रेशर/खनन संचालन में न्यूनतम 250 मीटर की दूरी होना चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित अधिकारियों द्वारा कलेक्टर अनूपपुर को पत्र लिखकर उत्खनन रोकने और जांच कराने की मांग भी की गई है। यह पूरा इलाका अमरकंटक–मैकल बायोस्फियर रिजर्व के पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

रिपोर्टिंग के बाद घेराबंदी’ हाईवा लगाकर रास्ता रोका
पत्रकार सुशांत गौतम ने बताया कि वे 8 जनवरी 2026 को शाम करीब 6 बजे ग्राउंड रिपोर्टिंग से लौट रहे थे, तभी जीपीएम जिले के धनौली गांव के पास उनकी गाड़ी को योजनाबद्ध तरीके से घेर लिया गया।
पीड़ित के अनुसार, एक कार आगे अड़ाई गई
बगल में एक हाईवा खड़ा कर दिया गया पीछे से एक अन्य वाहन लगाकर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया। इसके बाद गाली-गलौज और धमकियों का दौर शुरू हुआ और गाड़ी का दरवाजा खोलने का दबाव बनाया गया।

लोहे की रॉड से वार, कांच टूटा मोबाइल छीनने का आरोप
एक व्यक्ति ने लोहे की रॉड से गाड़ी के ड्राइवर साइड के कांच पर वार किया, जिससे कांच टूट गया। टूटे कांच के टुकड़े चेहरे और माथे पर लगे। उन्होंने फोटो, मेडिकल और वाहन क्षति का दस्तावेज़ तैयार कराया है। इतना ही नहीं, घटना के दौरान उनके साथी रितेश गुप्ता का मोबाइल छीनकर बंद कर देने का आरोप भी लगाया गया है। पत्रकार का कहना है कि यह हमला “गुस्से” में नहीं बल्कि सबूत रोकने और खबर दबाने के इरादे से किया गया।

माफियाओं पर कई गंभीर धाराओ के तहत अपराध दर्ज –
घटना के बाद पुलिस थाना में लिखित शिकायत दी गई, जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई। FIR नंबर 0014/2026 FIR में भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ 126(2), 296, 115(2), 351(3), 324(4), 304, 3(5) लगाई गई हैं। यह मामला संज्ञेय अपराध के दायरे में आता है। FIR में नामजद आरोपी
शिकायत के अनुसार FIR में जिन तीन व्यक्तियों को नामजद किया गया है, वे जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू) , लल्लन तिवारी
सुनील बाली “यह हमला मुझ पर नहीं, खबर पर था” पीड़ित पत्रकार ,

पत्रकार सुशांत गौतम ने कहा कि यह घटना केवल व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि दबाव बनाने के लिए झूठी शिकायतें/केस अन्य थाना क्षेत्रों में कराए जा सकते हैं, ताकि वे रिपोर्टिंग से पीछे हट जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे समझौता नहीं, न्याय चाहते हैं।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग
मामले के बाद पत्रकार संगठनों और नागरिक समूहों में चर्चा है कि केवल FIR दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। मांग की जा रही है कि नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो क्षेत्र में संचालित सभी स्टोन क्रेशरों की विशेष जांच हो
अवैध खनन/उत्खनन पर खनिज–वन–राजस्व की संयुक्त कार्रवाई हो
पीड़ित पत्रकार एवं गवाहों को सुरक्षा दी जाए।

सवाल वही बायोस्फियर में खनन, और सवाल करने पर हमला किसका संरक्षण? अमरकंटक मैकल क्षेत्र केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्यावरणीय सुरक्षा का विषय है। यदि बायोस्फियर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार को ही घेरकर हमला किया जा रहा है, तो सवाल उठता है कि ऐसी गतिविधियों को किसका संरक्षण प्राप्त है।

खास बात यह घटना ऐसे समय में हुई है जब खुद सरकारी पत्राचार/रिपोर्ट में क्षेत्र में क्रेशर संचालन और पर्यावरणीय उल्लंघन की बातें सामने आ रही हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

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