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4 साल पहले मर चुका शख्स “जिंदा” होकर बेच गया करोड़ों की जमीन

पटवारी, नायब तहसीलदार और रजिस्ट्रार की मिलीभगत क्या हो गया नामांतरण

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4 साल पहले मर चुका शख्स “जिंदा” होकर बेच गया करोड़ों की जमीन

 

पटवारी, नायब तहसीलदार और रजिस्ट्रार की मिलीभगत क्या हो गया नामांतरण

 

मध्यप्रदेश में राजस्व विभाग का चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा — 4 साल पहले मर चुके व्यक्ति ने ‘बेच दी’ करोड़ों की जमीन, रजिस्ट्री भी हो गई

 

सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले में राजस्व विभाग और रजिस्ट्री कार्यालय की मिलीभगत का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। यहाँ चार साल पहले मर चुके एक व्यक्ति के नाम से न केवल वारसाना (नामांतरण) कर दिया गया, बल्कि उसी दिन करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई।

 

मामला शहर से सटे ग्राम सोहौला का है, जहां त्रिवेणी प्रसाद सिंगरहा नामक युवक की मौत 3 जुलाई 2021 को हो गई थी। ग्राम पंचायत द्वारा जारी आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र में साफ दर्ज है कि उनकी मृत्यु 74 वर्ष की उम्र में हुई। मृत्यु प्रमाण पत्र 6 जुलाई 2021 को जारी हुआ और सरकारी रिकॉर्ड में अद्यतन भी है।

 

मृतक के नाम से आवेदन, नामांतरण और जमीन बिक्री — सब कुछ कुछ ही घंटों में

 

जानकारी के मुताबिक 16 जून 2025 को मृतक त्रिवेणी प्रसाद सिंगरहा के नाम से ही वारसाना (उत्तराधिकार) आवेदन किया गया। हैरानी की बात है कि महज दो दिन के भीतर 18 जून 2025 को यह नामांतरण न केवल मंजूर कर दिया गया बल्कि उसी दिन 1.587 हेक्टेयर की करोड़ों रुपये कीमत की जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई।

 

राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में इस पूरे लेन-देन को वैध दर्शाया गया है, जबकि संबंधित व्यक्ति का निधन चार साल पहले हो चुका था। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय पटवारी, नायब तहसीलदार, और रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

 

परिवार के आरोप — “हम गुहार लगाते रहे, अधिकारियों ने आंख मूंद ली”

 

मृतक के परिजनों का कहना है कि त्रिवेणी प्रसाद के निधन के बाद उनकी पत्नी ने 3 जुलाई 2024 को दूसरी शादी कर ली थी और वह दूसरे गांव में रहने लगी। इसके बावजूद मृतक के नाम से जमीन का सौदा करवाना और रजिस्ट्री करना, राजस्व तंत्र की सीधी लापरवाही और भ्रष्टाचार को दर्शाता है।

मृतक की मां और अन्य परिजन लगातार अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने भी उनकी सुनवाई नहीं की।

 

करोड़ों की सरकारी भूमि पर भी खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस तरह मृत व्यक्तियों के नाम से फर्जी नामांतरण और बिक्री संभव है, तो जिले में सरकारी जमीनों पर भी इसी तरह के घोटाले हो सकते हैं। यह पूरा मामला न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि रजिस्ट्री कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

 

जांच और कार्रवाई की मांग

 

ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने मांग की है कि इस मामले की जांच उच्चस्तरीय समिति से कराई जाए, और दोषी पटवारी, नायब तहसीलदार, तथा रजिस्ट्री कार्यालय के जिम्मेदार अफसर-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही जमीन की रजिस्ट्री रद्द कर असली वारिसों को हक दिलाया जाए।

 

यह मामला इस बात का सबूत है कि प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार किस हद तक पैठ चुका है, और मृतकों के नाम पर भी करोड़ों का खेल खेला जा रहा है।

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