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बैतूल में फर्जी पत्रकारों का आतंक: झूठी शिकायतों से अधिकारी परेशान, हो रही अवैध वसूली

देश के चौथे स्तंभ को चाटुकार बनते तथाकथित पत्रकार 

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बैतूल में फर्जी पत्रकारों का आतंक: झूठी शिकायतों से अधिकारी परेशान, हो रही अवैध वसूली

 

देश के चौथे स्तंभ को चाटुकार बनते तथाकथित पत्रकार

 

मनीष कुमार राठौर

8109571743

भोपाल / बैतूल । पत्रकार और पत्रकारिता को बाजारू बनाने वाले झोलाछाप लोगों ने जहां पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है जिसे शर्मशार करने में कोई कोर कसर फर्जियों के द्वारा नहीं छोड़ी जा रही है, वही बैतूल जिले में कुछ कथित फर्जी पत्रकार इस पवित्र पेशे को बदनाम करने में लगे हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि पंचायतें, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, जनपद और विकास कार्यों से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी इन कथित पत्रकारों की झूठी शिकायतों और ब्लैकमेलिंग से त्रस्त हैं। बैतूल में कथित फर्जी पत्रकारों की गतिविधियाँ न सिर्फ पत्रकारिता को कलंकित कर रही हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी बाधित कर रही हैं। अब समय आ गया है कि प्रशासन इस ओर ठोस कदम उठाए और पत्रकारिता की साख को बनाए रखने में सहयोग करे।

जिले में सक्रिय इन तथाकथित पत्रकारों ने सीएम हेल्पलाइन को अवैध वसूली का औजार बना लिया है। शिकायत का माध्यम बनाकर ये सरपंच, सचिव, उपयंत्री, जनपद कर्मियों और अन्य विभागीय अधिकारियों के खिलाफ बिना तथ्यों के शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। इसके बाद उन पर कार्यवाही का डर दिखाकर पैसे की मांग की जाती है। सीएम हेल्पलाइन बनी हथियार

खबरें लिखने में छूट जाते हैं पसीने, सिर्फ शिकायतें ही है आधार

सबसे बड़ी बात तो चौंकाने वाली यह है कि इनमें से कई लोग ऐसे हैं जिन्हें पत्र लेखन, समाचार संकलन या रिपोर्टिंग का बुनियादी ज्ञान भी नहीं है। न इनका कोई पंजीकृत प्रेस पहचान पत्र है, न ही कोई समाचार माध्यम से प्रमाणित संबंध। फिर भी ये खुद को पत्रकार बताकर सरकारी अधिकारियों को डरा-धमकाकर साख और करियर से खिलवाड़ कर रहे हैं।

इस विषय पर प्रशासन की चुप्पी ही सवाल के घेरे में

स्थानीय अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार ऐसी झूठी शिकायतें मिलने पर जांच में वे बिल्कुल निराधार पाई गईं। बावजूद इसके, इन पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हो रही है, जिससे सच्चे पत्रकारों की छवि धूमिल हो रही है।

अब पत्रकारिता की गरिमा हो रही है खंडित

वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि पत्रकारिता हमेशा से समाज के प्रति जवाबदेह रही है। लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा “पत्रकार” की आड़ लेकर पैसे ऐंठना और डर फैलाना बेहद निंदनीय और आपराधिक कृत्य है। इससे सिर्फ पत्रकारिता की प्रतिष्ठा ही नहीं, जनता और प्रशासन के बीच विश्वास भी कमजोर हो रहा है।

 

अगले अंक में देखिए

 

बैतूल जिले के किन ब्लॉक में है सबसे ज्यादा फर्जी पत्रकारों का आतंक, जो ले रहे हैं सीएम हेल्पलाइन का सहारा

 

जिले में चुनिंदा चिंदी चोर पत्रकार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत कर रहे हैं अवैध वसूली

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