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रिपोर्ट न आने से कार्रवाई में हो रही देरी, बाजार में बिक रहे मिलावटी खाद्य पदार्थ,3 माह पहले जांच के लिए भोपाल भेजे 146 सैंपलों अब तक नहीं आई जांच रिपोर्ट

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रिपोर्ट न आने से कार्रवाई में हो रही देरी, बाजार में बिक रहे मिलावटी खाद्य पदार्थ,3 माह पहले जांच के लिए भोपाल भेजे 146 सैंपलों अब तक नहीं आई जांच रिपोर्ट
*दैनिक प्राईम संदेश जिला ब्यूरो चीफ राजू बैरागी जिला *रायसेन*
रायसेन। शहर की दुकानों होटल रेस्टोरेंट में खाद्य पदार्थ खुले में धड़ल्ले से बिक रहे हैं उन्हें ढका तक नहीं जा रहा।बारिश में मच्छर मक्खियों की सँख्या तेजी से बढ़ रही है।जिससे संक्रामक बीमारियां पसार रही हैं।जिम्मेदार विभाग के खाद्य अमले की बेगोरी से यह सबकुछ हो रहा है।
लोगों की सेहत से हो रहा खिलवाड़….
बाजार में खुले में बिक रही खाद्य पदार्थ की बिक्री से लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। मिलावटी वस्तुओं की बिक्री और उसको सही तरीके से नहीं ढंकने की वजह से लोग बीमार हो रहे हैं और उनकी सेहत के साथ जिम्मेदार अधिकारी भी खिलवाड़ कर रहे हैं। नागिन कौन है जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों से इस तरफ ध्यान देने का अनुरोध किया है।जांच सिर्फ गिनी चुनी होटल रेस्टोरेंट पर बाकी को छूट….
त्यौहारों पर जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के जिम्मेदारों को जांच की याद आती है।इसके पहले कुछ गिने चुने होटलों रेस्टोरेंट की जांच की रस्म अदायगी करते हैं।बाकी व्यपारियो को खुली छूट दी जाती है।लेकिन कार्रवाई के नाम पर अधिकारी हल्की जुर्माने की कार्रवाई कर मिलावटी सामग्री बाजार में ग्राहकों को बेचने की छूट दे दी जाती है।रेस्टोरेंट संचालकों के हौसले इतने बुलन्द है कि खाद्य पदार्थ में हानिकारक रंगों और कैमिकलों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।आलम यह है कि जिला प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
जिला खाद्य विभाग ने अप्रेल-मई में की थी कार्रवाई
इसी साल अप्रेल व मई में जिले के विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों से कुल 146 खाद्य नमूने लिए गए। इन सभी को जांच के लिए भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजा गया। 20 प्रकरण एडीएम न्यायालय व 3 प्रकरण सीजीएम कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। एडीएम कोर्ट से 20 प्रकरणों का निराकरण करते हुए संबंधित दुकानदारों पर ६ लाख २० हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। हालांकि इस राशि में से 4 लाख 90 हजार रुपए की ही राशि वसूली गई है। शेष वसूली अभी बाकी है। अब जब भोपाल से जांच रिपोर्ट आएगी, तब आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने तीन माह पहले शहर व जिलेभर की विभिन्न खाद्य पदार्थों की दुकानों से सैपल लेकर 146 नमूने भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजे थे, जिनकी जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। स्थानीय अधिकारी भी रिपोर्ट के इंतजार में बैठे हैं। वहीं जिले में खाद्य पदार्थों की जांच पड़ताल की रफ्तार इतनी धीमी है कि कोई कार्रवाई न होने से बाजार में मिलावटी पदार्थो की जमकर बिक्री हो रही है। जांच रिपोर्ट समय से न आने में खाद्य विभाग की इस पूरी कार्रवाई पर ही सवालिया निशान लगा रही है।जानकारी के मुताबिक दूध, दही, घी, मिठाइयां, सूखे मसाले से लेकर अन्य कई खाद्य पदार्थ है, जिनमें बड़े पैमाने पर मिलावट का काम शहर के अधिकांश कारोबारी करते हैं। इधर खाद्य विभाग के अधिकारी या तो किसी त्यौहार पर सैपल लेने की खानापूर्ति करते है अथवा जब कहीं किसी समारोह या कार्यक्रम में लोग भोजन करके फूड पॉइजनिंग का शिकार होते है। फूड विभाग जो सैपल लेने की कार्रवाई करता है।
इनका कहना है
मिलावटखोरों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में कंट्रोल करने के लिए फ़ूड सेफ्टी कानून 2006 बनाया गया है।अगर कोई व्यापारी मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचता पाया जाता है तो उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर नमूने लेकर लैब भोपाल जांच के लिए भेजे जाते हैं।दोषी पाए जाने पर मिलावट खोरी करने वाले व्यापारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जुर्माना भी किया जाता है।कल्पना अर्सिया जिला फ़ूड अधिकारी जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग रायसेन

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