क्षेत्र में नवदुर्गा उत्सव की धूम, मां की भक्ति में लीन हुए लोग, दुर्गा गीतों से गुंजायमान हो रहा क्षेत्र व नगर, देवी मंदिरों में उमड रहा भक्तों का जनसैलाब।
क्षेत्र में नवदुर्गा उत्सव की धूम, मां की भक्ति में लीन हुए लोग, दुर्गा गीतों से गुंजायमान हो रहा क्षेत्र व नगर, देवी मंदिरों में उमड रहा भक्तों का जनसैलाब।

सीधी/मझौली
शारदीय नवरात्र का पर्व विगत 11अक्टूबर से नवदुर्गा उत्सव के रूप में हर्षोल्लास पूर्वक बड़े धूमधाम से जिले भर में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में मझौली उपखंड क्षेत्र अन्तर्गत गांव व नगर में आस्था के इस पर्व की धूम मची हुई है। लोगों एवं दुर्गा उत्सव समितियां द्वारा हजारों की संख्या में दुर्गा मूर्ति की स्थापना की जाकर पूजा अर्चना की जा रही है। जिससे एक ओर जहां दुर्गा गीतों से क्षेत्र व।नगर गुंजायमान हो रहा है वही क्षेत्र की प्रसिद्ध मंदिरों में भक्तों का जनसैलाब देखा जा रहा है।
विदित हो कि शारदीय नवरात्र पर्व नवदुर्गा उत्सव के रूप में लोग मानते आ रहे हैं। यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत पर परिलक्षित है। ऐसी मान्यता है कि पराक्रमी महा शक्तिशाली रावण का वध भगवान राम द्वारा देवी शक्तियों के उपस्थिति में की गई थी तभी से यह पर्व प्रतिवर्ष नवदुर्गा उत्सव के रूप में मनाया जाता है। लोग दुर्गा मूर्ति की स्थापना कर 9 दिनों तक मां दुर्गा के नव रूपों की अलग-अलग दिनों प्रथम दिवस मां शैलपुत्री, द्वितीय दिवस मां ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिवस मां चंद्रघंटा, चतुर्थ दिवस मां कुष्मांडा, पंचम दिवस मां स्कंदमाता, षष्ठम दिवस मां कात्यायनी, सप्तम दिवस कालरात्रि, अष्टम दिवस मां महागौरी, नवम दिवस मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करते हैं दसवे दिन वाहनों में झांकियां सजाकर रावण के पुतला दहन वाले स्थान पर एकत्रित होती हैं जहां पर रावण का पुतला दहन किया जाता है तत्पश्चात दुर्गा मूर्ति प्रवाहित की जाती है।

*कुलदेवी मंदिर में उमड रहा भक्तों का जनसैलाब*
मझौली क्षेत्र की कुलदेवी मंदिर जो कि नगर क्षेत्र मझौली के केंद्र बिन्दु वार्ड क्रमांक 7 में स्थित है। इस मंदिर में मां दुर्गा नवो रूपों में एक ही स्थान पर विराजमान है जिस मां के दरबार के रूप में मान्यता है। माता का यह दरबार बरदायिनी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां क्षेत्र के दूर दराज यहां तक की अन्य जिलों के लोग मन्नत मनाने आया करते हैं साथ ही मन्नत पूर्ण होने पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर मन्नत पूर्ति की जाती है। नवरात्रि के समय देवी पूजा का अपना अलग महत्व एवं प्रभाव होता है। नवदुर्गा उत्सव में देवी भक्ति भावना में लीन लोग विशेष रूप से मां दुर्गा के दरबार में पहुंच पूजा अर्चना करते हैं तथा मन्नत मानते हैं। नवदुर्गा माता के दरबार के साथ भगवान भोलेनाथ के स्थापित मूर्तिका भी बड़ा महत्व है दुर्गा जी के पूजा अर्चना के बाद लोग भोलेनाथ के मंदिर में भी माथा टेकते हैं। बताया जा रहा है कि माता मंदिर के ठीक बगल में भगवान भोलेनाथ की प्राचीन पत्थर की मूर्ति खुले में विराजमान थी जहां रातों-रात मात्र पत्थरों से विना बालू -सीमेंट के उपयोग से अपने आप मंदिर बनकर तैयार हो गई थी।जिसे जीव जंतुओं के घुसने के डर से अभी कुछ वर्ष पूर्व सीमेंट -बालू का मसाला ज्वाइंटों में लगा दिया गया

इस मंदिर प्रांगण में कई पुरानी एवं नवीन मंदिरों का निर्माण कराया जाकर अलग-अलग मंदिरों में भी देवी देवताओं की मूर्ति स्थापित की गई है। अभी हाल ही में सुंदर सुशोभित मंदिर निर्माण कराया जाकर दक्षिण मुखी हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की गई है जो देवी मंदिर प्रांगण को और अधिक सुशोभित कर रही है। इस मंदिर के निर्माण हो जाने से मझौली नगर क्षेत्र के युवा वर्ग हर मंगलवार को शाम के समय इकट्ठा हो पूजा अर्चना कर प्रसाद वितरित करते हैं।