सनसनीखेज: बैतूल CMHO डॉ. मनोज हुरमड़े के विरुद्ध भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप पत्र, सरकारी खजाने को लगा चूना
नियुक्ति, कर्मचारियों के वेतन भुगतान का गंभीर आरोप
सनसनीखेज: बैतूल CMHO डॉ. मनोज हुरमड़े के विरुद्ध भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप पत्र, सरकारी खजाने को लगा चूना
नियुक्ति, कर्मचारियों के वेतन भुगतान का गंभीर आरोप
मनीष कुमार राठौर
8109571743
भोपाल/बैतूल। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर बड़ा घोटाला सामने आया है। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा ने बैतूल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज कुमार हुरमड़े पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के अपव्यय के गंभीर आरोप पत्र जारी कर पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है।
नियमों को ताक पर रखकर पुरानी एजेंसी को दिया ठेका
आरोप पत्र में कहा गया है कि डॉ. हुरमड़े ने वर्ष 2024-25 में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में शासन के स्पष्ट निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाईं। शासन ने 5 जुलाई 2024 को आदेश दिए थे कि भर्ती पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया या साक्षात्कार के माध्यम से हो, लेकिन डॉ. हुरमड़े ने बिना किसी विज्ञापन के ‘ज्यूस इंटरप्राइजेस’ को सीधा कार्यादेश देकर नियमों का उल्लंघन किया। यह सीधे तौर पर सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है और पद के दुरुपयोग का जीता-जागता उदाहरण है।
घोटाले की पराकाष्ठा: 350 कर्मचारियों के बदले 450 को वेतन
सबसे चौंकाने वाला आरोप वित्तीय गड़बड़ी का है। आरोप पत्र के अनुसार, जिले में मात्र 250 आउटसोर्स कर्मचारी थे, लेकिन डॉ. हुरमड़े ने लेखापाल भीमराव लोखंडे के साथ मिलीभगत कर दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में 450 कर्मचारियों का वेतन अदा कर दिया। इस प्रकार उन्होंने लगभग 200 गैर-मौजूद कर्मचारियों के वेतन को हड़पकर सरकारी खजाने को भारी चूना लगाया है। यह घोटाला पिछले दिनों सामने आए 2.14 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार प्रकरण को भी मात देता है।
नौकरी के नाम पर वसूली और रिश्वतखोरी का खुला बाजार
तीसरा और सबसे गंभीर आरोप भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर करता है। डॉ. हुरमड़े पर आरोप है कि उन्होंने अपने एजेंटों के माध्यम से नौकरी दिलाने के एवज में प्रति व्यक्ति 1 से 1.5 लाख रुपये की वसूली की और अपने रिश्तेदारों को नौकरी पर रखा। भर्ती के लिए कोई विज्ञापन जारी नहीं किया गया, जो भ्रष्टाचार की मंशा को साफ दर्शाता है। गौरतलब है कि इससे पहले भी डॉ. हुरमड़े के कार्यकाल में सारथक ऐप के माध्यम से 200 किलोमीटर दूर बैठकर उपस्थिति दर्ज करने वाले डॉक्टरों का मामला सामने आ चुका है, जिससे विभाग में उनकी पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल खड़े थे।
15 दिन का अल्टीमेटम, अन्यथा एकपक्षीय कार्रवाई
संचालनालय ने डॉ. हुरमड़े को आरोप पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर लिखित उत्तर देने का निर्देश दिया है। उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई और गवाह पेश करने का मौका दिया गया है, लेकिन अगर निर्धारित अवधि में जवाब नहीं आया तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के उपनियम (i), (ii), (iii) के उल्लंघन का आरोप इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है। इस घोटाले ने पूरे स्वास्थ्य विभाग की छवि को धूमिल किया है और अब सरकार से कठोर से कठोर कार्रवाई की मांग उठ रही है ताकि भ्रष्टाचार की इस परंपरा को समाप्त किया जा सके।
अगले अंक में देखिए
15,500 रुपये की मासिक तनख्वा के बदले MSW कर्मचारियों से खुली लूट !
6 से 8 और 10 हजार रूपये में CMHO कर रहे कर्मचारियों का शोषण ?
क्या कहना है ।
कॉल किया गया था परन्तु किसी प्रकार का जवाब देने से मना कर दिया गया ।
कमिश्नर IAS धनराजू एस भोपाल







