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विपरीत परिस्थितियों में चमकी अंजली सिसोदिया, बिना कोचिंग 12वीं विज्ञान में हासिल किए 82.4% अंक

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*धुलकोट। बुरहानपुर*

 

*संवाददाता दिलीप बामनिया*

 

: विपरीत परिस्थितियों में चमकी अंजली सिसोदिया, बिना कोचिंग 12वीं विज्ञान में हासिल किए 82.4% अंक

धुलकोट–> मध्यप्रदेश बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम 15 अप्रैल को घोषित हुआ, जिसमें कई प्रतिभाओं ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से क्षेत्र का नाम रोशन किया। इन्हीं में से एक नाम खंडवा जिले की छात्रा अंजली सिसोदिया का है, जिसने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 12वीं विज्ञान संकाय में 82.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी मेहनत और लगन का परिचय दिया है।

 

अंजली सिसोदिया खंडवा जिले के पंधाना ब्लॉक की ग्राम पंचायत घाटीखास की मूल निवासी है। वर्तमान में वह खंडवा के सरस्वती शिशु मंदिर में अध्ययनरत थी। अंजली के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। उनकी माता सरिता सिसोदिया खंडवा जिला चिकित्सालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं, जबकि पिता खुमानसिंह सिसोदिया खेती-किसानी का काम करते हैं।

 

अंजली का बचपन भी संघर्षों से भरा रहा। जब वह मात्र 6 माह की थी, तभी उसकी मां की नौकरी जिला अस्पताल खंडवा में लग गई थी। गांव से शहर आए परिवार के लिए नए माहौल में ढलना आसान नहीं था। नौकरी की जिम्मेदारियों और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते अंजली को उसकी मां ने धुलकोट में अपने नाना-नानी के पास छोड़ दिया। नाना-नानी ने ही उसका पालन-पोषण और देखभाल की।

 

अंजली की प्रारंभिक शिक्षा धुलकोट के आशीर्वाद विद्यालय से शुरू हुई। शुरू से ही वह पढ़ाई में मेधावी रही और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसने हर कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके बाद उसने शासकीय कन्या शाला धुलकोट में प्रवेश लिया, जहां भी वह लगातार टॉप करती रही।

 

दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अंजली ने विज्ञान संकाय चुनने का निर्णय लिया। उसका सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। सीमित संसाधनों और बिना किसी कोचिंग के उसने 12वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 82.4 प्रतिशत अंक हासिल किए, जो उसकी कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम है।

 

अंजली की इस सफलता पर उसके परिवार, शिक्षकों और क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है। सभी ने उसकी इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

 

अंजली ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, नाना-नानी और शिक्षकों को दिया है। उसने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि मन में दृढ़ निश्चय और मेहनत करने की लगन हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

 

अंजली की यह सफलता उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। उसने साबित कर दिया कि सच्ची लगन और मेहनत के दम पर किसी भी परिस्थिति को पार किया जा सकता है और सफलता हासिल की जा सकती है।

 

*धुलकोट। से संवाददाता दिलीप बामनिया की रिपोर्ट*

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