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बैतूल के आठनेर में अष्टविनायक वेयरहाउस मूंग खरीदी घोटाले का गढ़ बना। 

तुलाई और गुणवत्ता में गड़बड़ी से शासन को करोड़ों का नुकसान। जांच पर उठे सवाल।

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बैतूल के आठनेर में अष्टविनायक वेयरहाउस मूंग खरीदी घोटाले का गढ़ बना।

 

तुलाई और गुणवत्ता में गड़बड़ी से शासन को करोड़ों का नुकसान। जांच पर उठे सवाल।

 

अष्टविनायक वेयरहाउस घोटाला – मूंग तुलाई में हेराफेरी, शासन को लाखों का चूना

 

स्टेज 4 और 8 में चोरी का खेल! जांच पर भी उठे सवाल, किसानों में आक्रोश”

 

क्या प्रशासन खुद इस भ्रष्टाचार की परतों पर पर्दा डाल रहा है?

 

जांच की ‘सेटिंग’ पर भी उठे सवाल

 

मनीष कुमार राठौर

8109571743

 

बैतूल/आठनेर । अष्टविनायक वेयरहाउस आठनेर में विगत दिनों हुई मूंग खरीदी अब एक बड़े घोटाले का रूप लेती जा रही है। किसानों की शिकायतों और नागरिकों की आशंकाओं के बीच एसडीएम और कलेक्टर बैतूल ने जांच के आदेश दिए, जिसके तहत APC समूह के अधिकारी जांच में जुटे। जांच में जो सच सामने आया उसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि किसानों का आरोप है कि वजन में कटौती, नीचे-बीच के कट्टों में हेराफेरी है

 

स्टेज नंबर 4 में लगभग 3100 कट्टे रखे गए हैं। किसानों का कहना है कि मूंग खरीदी में 50 किलो 800 ग्राम प्रति बोरी तौली जानी थी, लेकिन गोदाम मालिक और शासकीय वेयरहाउस के चपरासी की मिलीभगत से कट्टों में मात्र 45 से 48 किलो ही मूंग भरी गई। यानी हर बोरी में औसतन 2–5 किलो मूंग की सीधी चोरी की गई।

यहां तक कि स्टेज नंबर 8 में रखे गए माल की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई, जिसे किसानों के मुताबिक जानबूझकर खरीदा गया और शासन को नुकसान पहुंचाने के लिए गोदाम में भरकर रखा गया।

 

जांच की ‘सेटिंग’ पर भी उठे सवाल

 

किसानों ने आरोप लगाया कि जांच दल ने केवल ऊपर रखे कट्टों की तुलाई की, जबकि असली हेराफेरी नीचे और बीच में रखे कट्टों में की गई है। इससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

 

सबसे बड़ा संदेह इस बात पर है कि जांच दल के आने से पहले ही सुबह से वेयरहाउस खोल दिया गया था, और जांच के दौरान भी गोदाम की चाबी प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहीं रही। यह स्थिति भ्रष्टाचार की बू को और तेज करती है।स्टेज नंबर 4 और 8 के बीच में रखे कट्टों की जांच मीडिया की मौजूदगी में की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक वेयरहाउस की चाबी प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में रखी जाए।

 

 

भ्रष्टाचार का बड़ा खेल – शासन को करोड़ों का नुकसान

किसानों का आरोप है कि यह पूरा खेल वेयरहाउस संचालक की मिलीभगत से किया गया है। शासन को जहां किसानों की फसल से मुनाफा होना चाहिए था, वहीं भ्रष्टाचार की मिलीभगत से लाखों-करोड़ों रुपए का नुकसान कराया जा रहा है।

 

 

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसानों की शिकायतें और सबूत साफ हैं, तो जांच को ‘ऊपरी तौर’ पर क्यों किया जा रहा है?

 

चाबी पर नियंत्रण वेयरहाउस संचालक के पास क्यों छोड़ा गया?

 

क्या प्रशासन खुद इस भ्रष्टाचार की परतों पर पर्दा डाल रहा है?

जांच की ‘सेटिंग’ पर भी उठे सवाल

 

किसानों और आम जनता का कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष नहीं हुई तो यह मामला प्रदेशव्यापी घोटाले का रूप ले सकता है।

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