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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का पहला मेडिकल कॉलेज झाबुआ में बनेगा, MBBS, आयुर्वेद, होम्योपैथ और नर्सि

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झाबुआ

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) का पहला मेडिकल कॉलेज झाबुआ में स्थापित किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने इसके लिए 100 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है, और इस महीने के अंत तक जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। योजना के अनुसार, 2028-29 से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू होगी। हालांकि, इससे पहले झाबुआ इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग में अगले सत्र से अस्थायी रूप से मेडिकल कॉलेज संचालित करने का प्रस्ताव रखा गया है।  

डीएवीवी की पिछली कार्यपरिषद बैठक में झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद जमीन की तलाश शुरू की गई। जिला अस्पताल से करीब 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में 100 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। डीएवीवी कुलपति और झाबुआ कलेक्टर के बीच इस जमीन को लेकर सहमति बन गई है। दावा किया जा रहा है कि यहां अगले तीन वर्षों में मेडिकल कॉलेज शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में एमबीबीएस कोर्स की मान्यता प्राप्त की जाएगी, और बाद में बीडीएस, आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथी के कोर्स भी इसी कैंपस में जोड़े जाएंगे। झाबुआ में लंबे समय से मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग की जा रही थी। यहां के स्थानीय लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए गुजरात के दाहोद जाना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज खुलने से स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा सुधार होगा और लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।  

1200 करोड़ होगी अनुमानित लागत  
झाबुआ मेडिकल कॉलेज की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने पर विचार शुरू हो चुका है। इसकी अनुमानित लागत 1200 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस परियोजना में राज्य सरकार से अनुदान मिलेगा, जबकि शेष राशि विश्वविद्यालय के बजट से खर्च की जाएगी। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की शुरुआत के लिए झाबुआ इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन को विकल्प के रूप में रखा गया है। इस भवन का उपयोग किया जाए तो मेडिकल कॉलेज की शुरुआत के लिए केवल 600 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव भेजा है कि यदि इंजीनियरिंग कॉलेज का भवन उपलब्ध हो जाता है, तो 2026-27 सत्र से ही मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई शुरू की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर विचार करने और इसे आरजीपीवी (राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) को भेजने के निर्देश दिए हैं।  

डीएवीवी की पिछली कार्यपरिषद बैठक में ही झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद वहां जमीन की तलाश शुरू हुई थी। जिला अस्पताल से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर डूंगरा लालू क्षेत्र में ही 100 एकड़ जमीन मिल गई है।

डीएवीवी कुलपति व झाबुआ कलेक्टर के बीच इस जमीन को लेकर सहमति बन गई है। दावा किया जा रहा है कि यहां अगले तीन साल में मेडिकल कॉलेज शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में एमबीबीएस की मान्यता ली जाएगी। इसके बाद बीडीएस, आयुर्वेदिक और होम्योपैथी के कोर्स भी इसी कैंपस में चलाए जाएंगे। मालूम हो, झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। अभी यहां के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दाहोद जाना पड़ता है।

1200 करोड़ आंकी जा रही है लागत झाबुआ मेडिकल कॉलेज की डीपीआर को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है। इसकी अनुमानित लागत 1200 करोड़ आंकी जा रही है। इसमें राज्य शासन की ओर से अनुदान मिलेगा। बाकी राशि यूनिवर्सिटी के बजट से खर्च की जाएगी। हालांकि, शुरुआत के लिए विकल्प के तौर पर झाबुआ का इंजीनियरिंग कॉलेज भी रखा गया है।

यहां 600 करोड़ से ही शुरुआत हो सकेगी। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने सीएम डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव दिया कि अगर इंजीनियरिंग कॉलेज का भवन मिल जाए तो अगले सत्र (2026-27) से ही मेडिकल कॉलेज शुरू हो सकता है। सीएम यादव ने इसे लेकर आरजीपीवी को प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है।

कॉलेज के लिए इसी महीने से काम शुरू कर देंगे ^झाबुआ में 100 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित कर ली है। स्थानीय प्रशासन से इसकी सहमति मिल गई है। हमारी कोशिश है कि इसी माह नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग मिलती है तो 2026 से ही एमबीबीएस कोर्स शुरू कर दिया जाएगा।

– प्रो. राकेश सिंघई, कुलपति, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी

यूनिवर्सिटी प्रशासन को जमीन पसंद आ गई है ^जिला अस्पताल से 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में जमीन यूनिवर्सिटी प्रशासन को पसंद आई है। एक और विकल्प इंजीनियरिंग कॉलेज के पास की 12 हेक्टेयर जमीन का भी है। यह मिल जाती है तो इस जगह को एजुकेशन हब के तौर पर विकसित किया जा सकता है। – नेहा मीणा, कलेक्टर, झाबुआ

जल्द शुरू होगा कॉलेज का काम  
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश सिंघई ने बताया कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज के लिए 100 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित कर ली गई है और स्थानीय प्रशासन से इसकी स्वीकृति भी मिल चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की योजना है कि इस महीने के अंत तक जमीन का नामांतरण पूरा कर लिया जाए और मेडिकल कॉलेज के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। अगर इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग मिल जाती है, तो 2026 से ही एमबीबीएस कोर्स शुरू कर दिया जाएगा।  

झाबुआ प्रशासन ने दी हरी झंडी
झाबुआ की कलेक्टर नेहा मीणा ने बताया कि जिला अस्पताल से 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन को जमीन पसंद आई है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग कॉलेज के पास स्थित 12 हेक्टेयर जमीन का भी एक विकल्प है। यदि यह जमीन मिल जाती है, तो इस क्षेत्र को एक प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। इस मेडिकल कॉलेज के निर्माण से झाबुआ और आसपास के क्षेत्रों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी और लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।

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