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उठाओ के अभाव में भींग रही धान,बचाव में जुटे उपार्जन केंद्र प्रभारी।

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उठाओ के अभाव में भींग रही धान,बचाव में जुटे उपार्जन केंद्र प्रभारी।

 

अरविंद सिंह परिहार सीधी

 

जिले भर के उपार्जन केंद्रो में खरीदी गई भारी संख्या में धान की बोरियां जो भरी सिली एवं छल्ली मारी हुई बे मौसम हुई बारिश में भीग रही है जिन्हें बचाने उपार्जन केंद्र प्रभारी पूरी तन्मयता के साथ लगे हुए हैं।

बताते चलें कि धान की बोरियां उठाव की जिम्मेदारी जिले स्तर पर टेंडरिंग के रूप में प्रायवेट परिवहनकर्ता को दी गई है लेकिन परिवहन कर्ता धान उठाव में कोई सकारात्मक भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं ।जिनके कमियो का खामियाजा उपार्जन केंद्र प्रभारी को भुगतना पड़ रहा है।जो खुले में सिली एवं छल्ली मारी कई सौ टन धान को बचाने में पूरी तन्मयता के साथ जुटे देखें गए। 28 दिसंबर की सुबह से ही मौसम ने अपना मिजाज बदला देखते ही देखते हल्की-हल्की बारिश चालू हो गई। तब हमारे स्थानीय संवाददाता द्वारा मझौली उपखंड के उपार्जन केंद्र समिति ताला, मझौली तथा सीमा स्व सहायता समूह ताला का जायजा लिया गया जहां धान की बोरियों को बचाने में उपार्जन केंद्र प्रभारी पूरी तन्मयता से लगे देखें गए। लेकिन जिस हिसाब से उठाव के लिए पूरी कंप्लीट धान की बोरियां बाहर पड़ी थी उसको बचा पाना उपार्जन केंद्र प्रभारी के लिए मुश्किल लग रहा था लेकिन फिर भी समिति ताला एवं मझौली उपार्जन केंद्र प्रभारी पूरी तन्मयता से लोगों के साथ धान की बोरियों को भीगने से बचाने में जुटे रहे।

 

*नाम मात्र की धान की बोरियों का उठाव*

 

28 दिसंबर की सुबह उपार्जन केंद्र समिति ताला ,मझौली एवं सीमा स्व सहायता समूह ताला के का आंकड़ा लिया गया जहां पाया गया कि उपार्जन केंद्रों में खरीदी एवं कंप्लीट कराई गई धान की बोरियों का परिवहन कर्ता द्वारा काफी कम मात्रा में उठाव किया गया है। जो पुरी की पूरी धान खुले में पड़ी थी जिसे बचाने उपार्जन केंद्र प्रभारी तन मन से जुटे हुए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार उपार्जन केंद्र ताला में 463, किसानों की 23 हजार 90 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। जिसमें से जो स्थान गोदाम में था रखा दी गई थी।परिवहन करता द्वारा मात्र 3240 बोरी का उठाव किया गया। जहां कुल 8476 कुंतल धान का उठाव किया जाना बताया गया। वही उपार्जन केंद्र मझौली में 415 किसानों से 16 हजार 78 कुंटल खरीदी की गई जिसमें से मात्र 17 सौ 31 कुंटल का उठाव परिवहन कर्ता द्वारा किया गया है। बाकी की भारी सिली एवं छल्ली मारी धान की बोरियां बाहर खुले में पड़ी थी जिसको बचाने के लिए उपार्जन केंद्र प्रभारी कई लोगों के साथ जुटे हुए थे। सीमा स्व सहायता समूह ताला का जायजा लिया गया जहां पर कोई जिम्मेदार तो नहीं मिले एक दो लोग उपार्जन केंद्र में देखरेख में लगे हुए थे काफी संख्या में धान की बोरियां बाहर पड़ी थी। जिन्हें देखने में एक दो लोग लगे हुए थे। जिनके द्वारा बताया गया कि 160 किसानों से लगभग 10 हजार कुंटल की खरीदी हुई है जिसमें से मात्र 1हजार कुंटल का अभी तक उठाव किया गया है धान की बोरियां बचाने में हम लोग लगे हैं व्यवस्थापक लोग पन्नी त्रिपाल लेने गए हैं।

 

*कौन लेगा इसकी जिम्मेदारी*

जिले के उपार्जन केंद्रों में कई सौ टन धान खरीदी की जाकर भराई सिलाई करावा छल्ली लगवा दी गई थी। लेकिन समय पर उठाव ना होने से हल्की बारिश में धान की बोरियां भीग रही थी जिन्हें बचाने में भले ही उपार्जन केंद्र प्रभारी लगे हुए हैं पर यदि तेज वारिस हुई तो काफी संख्या में बाहर पड़ी धान की बोरियों को बचा पाना उपार्जन केंद्र प्रभारियों को मुश्किल हो सकता है। धान की भारी मात्रा में नुकसान हो सकता हैं ऐसे में इसकी जबाबदारी आखिर कौन लेगा।

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