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चीन तेजी से अपनी वायुसेना को खतरनाक और खूंखार बना रहा है, हर साल 240 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तैयार हो रहे

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नई दिल्ली

चीन लगातार अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स (PLAAF) की फ्लीट बढ़ा रहा है. उसे और ताकतवर और खूंखार बना रहा है. चीन हर साल अपने यहां करीब 240 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बना रहा है. यानी अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमान. इसमें 100 से ज्यादा तो J-16 हिडेन ड्रैगन फाइटर जेट्स हैं.

इसके अलावा 100 J-20 माइटी ड्रैगन, 40 J-10C विगोरस ड्रैगन बनाए जा रहे हैं. रूसी फाल्कन फाइटर जेट के चीनी वर्जन J-11 और J-15 के प्रोडक्शन की तो संख्या ही नहीं पता. इन्हें टक्कर देने के लिए भारतीय वायुसेना के पास अभी मिग, मिराज, राफेल, जगुआर, तेजस, सुखोई जैसे फाइटर जेट्स हैं. लेकिन चीन तीन ऐसे विमान बना रहा है, जिनसे इंडियन एयरफोर्स की मुसीबत बढ़ सकती है… आइए जानते हैं इनके बारे में…

चीन का खतरनाक स्टेल्थ बॉम्बर, भारत के किसी भी शहर पर कर सकता है हमला

चीन के एयरफोर्स लेटेस्ट स्टेल्थ बॉम्बर H-20 भारत के किसी भी शहर पर हमला कर सकता है. भारतीय सेनाओं के पास स्टेल्थ टेक्नोलॉजी नहीं है. न ही स्टेल्थ फाइटर जेट्स को मार गिराने वाला कोई एंटी-स्टेल्थ हथियार.

भारत की हवाई सुरक्षा के लिए जरूरी है कि कम से कम ऐसे राडार जो इस विमान को ट्रैक कर सकें. फिर एक ऐसा सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम जो चीन के इस बमवर्षक को मारकर गिरा सके.  H-20 स्टेल्थ फाइटर जेट में राडार की किरणों को घुमाने की तकनीक है. इसलिए इसे पकड़ना मुश्किल है.  

चीन अगर इस फाइटर जेट को अपने आसमान से उड़ाता है तो वो आसानी से भारतीय इलाके में घुसकर सीमा, एयरबेस, नौसैनिक अड्डों, संचार सेंटर्स या सैन्य अड्डों को निशाना बना सकता है.इसलिए भारत को लंबी दूरी की हवा से हवा और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस एयर डिफेंस सिस्टम बनाने होंगे.

ऐसी मिसाइलें बनानी होंगी जो स्टेल्थ बॉम्बर को इंटरसेप्ट कर सकें. दो साल पहले ही चीन के इस स्टेल्थ बॉम्बर से पर्दा हटा था. H-20 लंबी दूरी का बमवर्षक है, जो अधिकतम 13 हजार km तक हमला कर सकता है. H-20 बॉम्बर का कॉम्बैट रेंज 5 हजार km है, यानी यह भारत के किसी भी हिस्से में हमला कर सकता है.  

J-31 या FC-31 Gyrfalcon स्टेल्थ फाइटर जेट, इसकी टक्कर का भी विमान भारत में नहीं

चीन की पांचवीं पीढ़ी का यह स्टेल्थ फाइटर जेट के कई नाम हैं. जैसे- J-31, FC-31, शेनयांग एफसी-31 स्टेल्थ फाइटर जेट, फॉल्कन हॉक या स्नोवी आउल या J-35. इसे शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन बनाता है. J-31 को एक ही पायलट उड़ाएगा. जे-31 को 56.9 फीट लंबे इस लड़ाकू विमान की ऊंचाई 15.9 फीट है. टेकऑफ के समय अधिकतम वजन 28 हजार kg है.

यह अधिकतम 1400 km/hr की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. जे-31 की कॉम्बैट रेंज यानी हथियारों के साथ यह 1200 km है. अगर बीच में फ्यूल मिले तो ये 1900 km तक आ-जा सकता है. अधिकतम 52 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है.

J-31 फाइटर जेट में 6 बाहरी और 6 अंदरूनी हार्डप्वाइंट्स हैं. इसमें मीडियम रेंज की हवा से हवा में मार करने वाली 12 मिसाइलें लगा सकते हैं. हवा से जमीन पर हमला करने वाली 8 सुपरसोनिक मिसाइलें, 500 kg वजन के 8 डीप-पेनेट्रेशन बम या 30 छोटे बम लगा सकते हैं.  भारत के पास फिलहाल इस पीढ़ी का कोई फाइटर जेट नहीं है. भारत में अभी AMCA फाइटर जेट बनाया जा रहा है.

इस फाइटर जेट का पूरा नाम है- एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट. एक बार यह फाइटर जेट बन गया तो भारत पाकिस्तान पर ज्यादा भारी पड़ेगा. क्योंकि इसकी गति 2600 km/hr रहेगी. इसकी कॉम्बैट रेंज 1620 km और पूरी रेंज 3240 km होगी. यह अधिकतम 65 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकेगा.

छठीं पीढ़ी का फाइटर जेट, भारत तो इस रेस में अभी कहीं है ही नहीं… कैसे देगा इसे टक्कर?

चीन छठीं पीढ़ी का फाइटर जेट बना रहा है. इसका नाम J-XD है. यानी XD मतलब शिन दाई. इसके बारे में लोगों को कम जानकारी है. ज्यादातर जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. इसे और भी डेवलप किया जा रहा है. चीन के छठीं पीढ़ी फाइटर जेट प्रोग्राम में लगातार अपग्रेड हो रहा है. इसमें एडवांस सेंसर्स होंगे.

लॉयल विंगमैन ड्रोन होगा. लेजर वेपन्स होंगे. इसमें मैन्ड और अनमैन्ड जेट्स और ड्रोन्स की टीमिंग होगी. यानी जब तक भारत पांचवीं पीढ़ी का AMCA बनाकर सेना में शामिल करेगा, तब तक चीन छठीं पीढ़ी का विमान उड़ा रहा होगा.

 

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