प्रयागराज में जमीन खोदकर निकाले गए करोड़ों रुपये, तीन ड्रमों में छिपाकर रखी गई थी ₹500 के नोटों की गड्डियां
News By-नितिन केसरवानी
नवाबगंज के बरईपुर रामनगर में पुलिस की छापेमारी से मचा हड़कंप, चार लोग हिरासत में; आयकर विभाग जुटा नकदी की गिनती और स्रोत की जांच में
प्रयागराज: जिले के गंगानगर जोन अंतर्गत नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में बुधवार शाम एक मकान के अंदर जमीन में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में नकदी मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मकान परिसर में खुदाई कराकर जमीन के नीचे दबाए गए तीन ड्रम बरामद किए। इन ड्रमों में ₹500 के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में बरामद रकम चार से पांच करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है, जबकि गांव में इससे कहीं अधिक, यहां तक कि 60 करोड़ रुपये तक नकदी होने की चर्चाएं हैं। हालांकि, बरामद रकम की अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। नोटों की गिनती और नकदी के स्रोत की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की छापेमारी
जानकारी के मुताबिक, 28 अक्टूबर की शाम पुलिस को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली थी कि नवाबगंज के बरईपुर रामनगर गांव स्थित एक मकान में चोरी की रकम जमीन के नीचे गाड़कर छिपाई गई है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए गंगानगर जोन के डीसीपी सोनम कुमार और एडीसीपी पुष्कर वर्मा समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई की गई।
पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर संबंधित मकान की घेराबंदी की और तलाशी अभियान शुरू किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। मकान के भीतर संदिग्ध स्थानों पर खुदाई कराई गई तो जमीन के नीचे दबाए गए तीन ड्रम सामने आए। ड्रमों को बाहर निकालकर खोला गया तो उनके अंदर पांच-पांच सौ रुपये के नोटों की गड्डियां मिलीं।
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद पुलिस ने रुपये अपने कब्जे में ले लिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों को भी सूचना दी गई।
चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मकान राकेश यादव के परिवार से संबंधित है। मामले में राकेश यादव समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जमीन में इतनी बड़ी मात्रा में नकदी किसने और कब छिपाई थी तथा इसका वास्तविक स्रोत क्या है।
प्रारंभिक सूचना के आधार पर पुलिस को आशंका थी कि रकम का संबंध चोरी और नकबजनी की घटनाओं से हो सकता है। इसी वजह से इस कार्रवाई को चोरी की घटनाओं के खुलासे के लिए चलाए जा रहे अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, बरामद पूरी रकम किसी विशेष आपराधिक घटना से जुड़ी है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस की जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि इतनी बड़ी रकम बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों में रखने के बजाय मकान के अंदर जमीन में ड्रमों में भरकर क्यों छिपाई गई थी। फिलहाल पुलिस इस संबंध में हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है।
आयकर विभाग को दी गई सूचना, नोटों की गिनती जारी
मकान के भीतर से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद मामले की जानकारी आयकर विभाग समेत संबंधित एजेंसियों को दी गई। नकदी की मात्रा अधिक होने के कारण नोटों की गिनती के लिए मशीनों की मदद ली जा रही है।
पुलिस ने बरामद रुपये को अपने कब्जे में लेकर नियमानुसार सील करने की कार्रवाई की है। मकान को भी सील किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल बरामद नकदी की वास्तविक राशि और उसके स्रोत का पता लगाना है।
गांव में नकदी की मात्रा को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। कुछ रिपोर्टों में चार से पांच करोड़ रुपये मिलने की आशंका जताई गई है, जबकि स्थानीय स्तर पर 60 करोड़ रुपये तक की रकम होने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों में अंतर को देखते हुए किसी भी बड़ी राशि को अंतिम आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा। नोटों की गिनती पूरी होने और पुलिस की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही बरामदगी की सही रकम स्पष्ट होगी।
लॉकडाउन के दौरान गांव लौटने के बाद संपत्ति खरीदने की चर्चा
इस मामले में गांव के लोगों के बीच परिवार की आर्थिक स्थिति और पिछले कुछ वर्षों में खरीदी गई संपत्तियों को लेकर भी चर्चा हो रही है। मीडिया रिपोर्टों में ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि परिवार का एक सदस्य कई वर्षों तक पुणे में रहकर काम करता था और वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन के समय गांव लौटा था।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव लौटने के बाद परिवार ने जमीन खरीदने के साथ मकान बनवाया और ट्रैक्टर सहित अन्य वाहन भी खरीदे। कुछ रिपोर्टों में कई बीघे जमीन खरीदने तथा लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से मकान बनवाने का दावा किया गया है।
हालांकि, ये जानकारियां फिलहाल ग्रामीणों के बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। परिवार की वास्तविक आय, संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल की गई रकम और जमीन में बरामद नकदी के बीच क्या संबंध है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस और संबंधित विभाग इन पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
पारिवारिक विवाद से जुड़ा पहलू भी जांच के दायरे में
मीडिया रिपोर्टों में परिवार के भीतर हाल में हुए विवाद का भी उल्लेख किया गया है। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद ही जमीन में छिपाकर रखी गई नकदी के बारे में जानकारी सामने आई। हालांकि, विवाद की वास्तविक वजह और नकदी बरामद होने के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि पुलिस को सूचना किस परिस्थिति में मिली, रकम कहां से लाई गई और उसे जमीन में छिपाने के पीछे क्या वजह थी। इन सवालों के जवाब पूछताछ, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

पुलिस की जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे
बरईपुर रामनगर में हुई इस बरामदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और संबंधित विभागों की जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है—
1. तीनों ड्रमों से कुल कितनी नकदी बरामद हुई?
2. इतनी बड़ी रकम का वास्तविक स्रोत क्या है?
3. क्या नकदी का संबंध चोरी या नकबजनी की घटनाओं से है?
4. परिवार की संपत्ति और आय के बीच क्या संबंध है?
5. नकदी जमीन में छिपाकर रखने की वजह क्या थी?
6. क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं?
इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
आधिकारिक पुष्टि के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल बरईपुर रामनगर में जमीन के नीचे दबे तीन ड्रमों से नकदी मिलने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस ने नकदी को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और आयकर विभाग समेत संबंधित एजेंसियों को सूचना दी गई है।
अब सबकी निगाहें नकदी की आधिकारिक गिनती और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रकम कितनी है, वह कहां से आई और क्या उसका किसी आपराधिक गतिविधि से संबंध है—इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा। तब तक गांव में चल रही चर्चाओं और अनुमानित रकम को पुष्ट तथ्य मानना जल्दबाजी होगी।