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नगर परिषद बकहो में करोड़ों के भ्रष्टाचार की शिकायत — मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जांच शुरू

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नगर परिषद बकहो में करोड़ों के भ्रष्टाचार की शिकायत — मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जांच शुरू

 

शहडोल, | ज्ञानेन्द्र पांडेय (7974034465)

 

नगर परिषद बकहो में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर अब मुख्यमंत्री कार्यालय की पहल पर औपचारिक जांच शुरू हो गई है। शासन स्तर से मिले निर्देशों के बाद संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास शहडोल संभाग के अधीन प्रभारी कार्यपालन यंत्री अरविंद कुमार शर्मा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।

 

मुख्यमंत्री कार्यालय का हस्तक्षेप

 

भाजपा की पार्षद श्रीमती रेखा महेन्द्र सिंह (वार्ड क्रमांक 04) ने नगर परिषद बकहो में भ्रष्टाचार, अपव्यय और अनियमितताओं की विस्तृत शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय भोपाल को भेजी थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मध्यप्रदेश शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय भोपाल ने दिनांक 19 सितंबर 2025 को पत्र क्रमांक 3656/3663028/2025/18-3 के माध्यम से संभागीय संयुक्त संचालक शहडोल को जांच के निर्देश जारी किए थे।

 

निर्देशों के अनुपालन में संयुक्त संचालक आर.पी. मिश्रा ने 28 अक्टूबर 2025 को पत्र जारी कर प्रभारी कार्यपालन यंत्री अरविंद कुमार शर्मा को 7 दिवस की समय-सीमा में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

 

शिकायत के पांच गंभीर बिंदु

 

पार्षद रेखा महेन्द्र सिंह द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे गए पत्र में निम्नलिखित गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं—

1. हरित क्षेत्र विकास (अमृत योजना) के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 05 में वन विभाग की भूमि पर बिना अनुमति पार्क निर्माण कर करोड़ों रुपये का दुरुपयोग।

2. पौधारोपण कार्य में फर्जी बिलों के माध्यम से लाखों रुपये की हेराफेरी — “कागजों पर पौधे लगाए गए, जमीनी स्तर पर कुछ नहीं।”

3. ग्राम पंचायत बकहो के विघटन से पूर्व फर्जी कर्मचारियों को जोड़कर वेतन भुगतान का मामला।

 

4. अमृत 2.0 जल आपूर्ति योजना में कार्ययोजना बदलकर मनमाने ठेके और फंड के दुरुपयोग के आरोप।

5. नगर प्रकाश व्यवस्था में निम्न गुणवत्ता के उपकरणों की आपूर्ति, टेंडर घोटाला, तथा लापरवाही से एक व्यक्ति की मृत्यु तक की घटना।

कब शुरू होगी जांच?

 

28 अक्टूबर को जांच पत्र जारी होने के बाद से ही नगर परिषद और प्रशासनिक अमले में हलचल मची हुई है।

संभागीय संयुक्त संचालक ने निर्देश दिए हैं कि जांच अधिकारी अरविंद शर्मा तत्काल स्थल निरीक्षण कर 7 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

संभावना है कि 4 या 5 नवम्बर से औपचारिक जांच प्रक्रिया प्रारंभ होगी, जिसमें संबंधित रिकॉर्ड, भुगतान फाइलें और ठेकेदारों के बयान लिए जाएंगे।

 

जनता में उम्मीद और प्रशासन पर नजर

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बकहो नगर परिषद पिछले कई वर्षों से भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और मनमानी का अड्डा बनी हुई है।

अब जब जांच मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी में शुरू हो रही है, लोगों को उम्मीद है कि इस बार “फाइल नहीं, सच्चाई खुलेगी।”

भाजपा पार्षद द्वारा पार्टी के भीतर से ही उठाई गई यह शिकायत पार्टी की पारदर्शिता और जवाबदेही के दावे की वास्तविक परीक्षा मानी जा रही है।

 

अब निगाहें जांच अधिकारी पर

 

प्रभारी कार्यपालन यंत्री अरविंद कुमार शर्मा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे स्थानीय और राजनीतिक दबावों से मुक्त रहते हुए जांच को निष्पक्ष और तथ्यपरक दिशा दें।

जनता की नजर अब इसी पर टिकी है —

क्या बकहो नगर परिषद का “करोड़ों का भ्रष्टाचार” उजागर होगा या फिर एक बार फिर फाइलें सरकारी दफ्तरों की धूल में दब जाएंगी?

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