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मारीच वध से अहिल्या उद्धार तक रामलीला में सजीं प्रभु श्रीराम की लीलाएं, फुलवारी में माता सीता से हुआ प्रथम मिलन

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News By-नितिन केसरवानी

फतेहपुर के कलाकारों ने किया मनमोहक मंचन, श्रीराम-सीता के प्रथम मिलन का प्रसंग देख भावविभोर हुए दर्शक, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा रामलीला पंडाल

भरवारी कौशांबी: श्री रामलीला कमेटी पुरानी बाजार भरवारी की ओर से आयोजित रामलीला में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया गया। फतेहपुर से आए कलाकारों ने अपनी सजीव अभिनय कला, भावपूर्ण संवाद और आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से मारीच वध, अहिल्या उद्धार और श्रीराम-सीता फुलवारी लीला का ऐसा मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया कि दर्शक देर रात तक मंचन में डूबे रहे। कभी प्रभु श्रीराम के पराक्रम पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजी तो कभी उनके करुणामयी स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

रामलीला का शुभारंभ भगवान श्रीराम की लीलाओं के मंचन के साथ हुआ। कलाकारों ने सर्वप्रथम मारीच वध प्रसंग को जीवंत किया। मंचन में दिखाया गया कि किस प्रकार मारीच अपने मायावी रूप और छल-कपट से ऋषि-मुनियों के धार्मिक अनुष्ठानों में बाधा उत्पन्न करता था। उसके आतंक से त्रस्त ऋषि-मुनियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम आगे आते हैं। प्रभु श्रीराम अपने अद्भुत पराक्रम और धनुष-बाण के कौशल से मारीच का वध कर धर्म और सत्य की रक्षा करते हैं। जैसे ही मारीच वध का दृश्य मंच पर प्रस्तुत हुआ, पंडाल तालियों और जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

इसके बाद अहिल्या उद्धार लीला का भावपूर्ण मंचन हुआ। कलाकारों ने गौतम ऋषि के श्राप के कारण वर्षों से शिला बनी अहिल्या की पीड़ा और प्रभु श्रीराम के आगमन का प्रसंग प्रस्तुत किया। वन मार्ग से गुजरते हुए भगवान श्रीराम जैसे ही अहिल्या शिला के समीप पहुंचे और उनके चरण स्पर्श से अहिल्या को श्राप से मुक्ति मिली, वैसे ही मंच पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बन गया। शिला से पुनः अपने वास्तविक स्वरूप में आईं अहिल्या ने प्रभु श्रीराम के चरणों में शीश नवाकर उनका आभार व्यक्त किया। इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया और पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

फुलवारी लीला में पहली बार आमने-सामने आए श्रीराम और सीता

रामलीला की सबसे आकर्षक प्रस्तुतियों में श्रीराम-सीता फुलवारी लीला रही। कलाकारों ने पुष्पवाटिका का सुंदर दृश्य तैयार कर जनकपुर की उस पावन बेला को मंच पर उतारा, जब माता सीता अपनी सखियों के साथ फुलवारी में पुष्प चुनने पहुंचती हैं और दूसरी ओर गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण भी पुष्पवाटिका में आते हैं।

इसी दौरान माता सीता की नजर पहली बार प्रभु श्रीराम पर पड़ती है। दोनों के बीच हुए प्रथम दर्शन के इस प्रसंग को कलाकारों ने बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। सीता जी का संकोच, सखियों की चुहल, श्रीराम की मर्यादित भाव-भंगिमा और दोनों के बीच मौन प्रेम की अनुभूति ने दर्शकों का मन मोह लिया। पुष्पवाटिका में खिले रंग-बिरंगे फूलों और कलाकारों की भावपूर्ण अदाकारी ने पूरे मंच को जनकपुर की फुलवारी जैसा रूप दे दिया। इस प्रसंग के दौरान दर्शक मंत्रमुग्ध होकर मंचन देखते रहे और तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।

फतेहपुर से आए कलाकारों ने अपने अभिनय, वेशभूषा, संवाद अदायगी और मंच सज्जा के माध्यम से तीनों प्रसंगों को जीवंत बना दिया। रामलीला के माध्यम से जहां भगवान श्रीराम के पराक्रम, करुणा और मर्यादा का संदेश दिया गया, वहीं भक्ति, प्रेम और धर्म की महत्ता भी दर्शकों तक पहुंचाई गई। देर रात तक रामलीला पंडाल श्रद्धालुओं से भरा रहा।

इस दौरान कई गणमान्य दर्शक सहित संतोष केसरवानी (अध्यक्ष) नीरज बनारसी (संयोजक),अमित वर्मा(महामंत्री),रमेश चंद्र केसरवानी (महामंत्री),मुकेश केसरवानी (कोषाध्यक्ष),राजेश केसरवान (कोषाध्यक्ष),विनाेद केसरवानी (उपाध्यक्ष) सुशील केसरवानी (उपाध्यक्ष) शानू कुशवाहा पार्षद (उपाध्यक्ष) तुषार केसरवानी पार्षद प्रतिनिधि (उपाध्यक्ष) नीरज केसरवानी (उपाध्यक्ष) राजा बाबू वर्मा (उपाध्यक्ष) अनमोल केसरवानी (उपाध्यक्ष) मोहित वर्मा(दंगल अध्यक्ष) अनिल यादव(सोशल मीडिया प्रभारी) व समस्त पदाधिकारी सहित अन्य कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कमेटी पदाधिकारियों ने रामलीला में पहुंचकर भगवान श्रीराम की लीलाओं का आनंद लेने वाले सभी श्रद्धालुओं का आभार जताया।

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