लोकेशन धामनोद
मुखबिर होने के शक में युवक को अगवा कर मारपीट का आरोप, 20 घंटे बाद दर्ज हुई FIR
धामनोद में शराब कारोबार से जुड़े विवाद की आशंका, शिकायत दर्ज करने में देरी से पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
धामनोद, जिला धार। धामनोद थाना क्षेत्र में शराब के अवैध कारोबार से जुड़े विवाद का एक मामला सामने आया है। फरियादी ने आरोप लगाया है कि उसे शराब की सूचना देने वाला मुखबिर समझकर कुछ लोगों ने रास्ते में रोककर गाड़ी में बैठाया और उसके साथ जमकर मारपीट की।
घटना 24 अक्टूबर की बताई जा रही है, जबकि पुलिस ने 25 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की। शिकायत दर्ज होने में हुई देरी को लेकर अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मुखबिर समझकर निशाना बनाने का आरोप


धामनोद थाने में दर्ज एफआईआर क्रमांक 0546/2026 के अनुसार, फरियादी ने राज, रोहित, अमित, राहुल जायसवाल, सुनील और प्रद्युम्न सहित अन्य लोगों पर मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। फरियादी के मुताबिक, उसे शराब की सूचना पुलिस को देने वाला मुखबिर समझे जाने के बाद उसके साथ यह घटना हुई।
एफआईआर में घटना का समय 24 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच बताया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 296(बी), 115(2) और 351(3) सहित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
घटना के अगले दिन दर्ज हुई एफआईआर
दस्तावेज के अनुसार, घटना 24 अक्टूबर की है, जबकि एफआईआर 25 अक्टूबर को दोपहर 1:36 बजे दर्ज की गई। घटना के बताए गए समय और एफआईआर दर्ज होने के बीच करीब 20 से 24 घंटे का अंतर दिखाई देता है। हालांकि, थाने में सूचना मिलने का समय और शिकायत दर्ज करने में हुई देरी के वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
ऐसे में सवाल उठता है कि फरियादी ने पुलिस से संपर्क कब किया? क्या घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना दी गई थी? यदि सूचना पहले मिली थी, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? इन बिंदुओं पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
शराब कारोबार से संबंध की जांच जरूरी
फरियादी को मुखबिर समझकर निशाना बनाए जाने के आरोप के बाद यह जांच महत्वपूर्ण हो गई है कि कथित मारपीट के पीछे शराब कारोबार से जुड़ा कोई विवाद था या नहीं। साथ ही, आरोपियों और शराब कारोबार से जुड़े लोगों के बीच किसी संबंध की आशंका की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
हालांकि, फिलहाल उपलब्ध एफआईआर के आधार पर शराब ठेकेदार की मिलीभगत या पुलिस की संलिप्तता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
घटना के अगले दिन एफआईआर दर्ज होने के पीछे क्या कारण रहे?


फरियादी ने पहले सूचना दी थी तो पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
क्या मारपीट के पीछे मुखबिर होने का संदेह ही मुख्य वजह था?
क्या शराब कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है?
क्या मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी?
अब निगाहें पुलिस की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण पर हैं। मामले में मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच के साथ शिकायत दर्ज करने में हुई देरी के कारणों को स्पष्ट करना भी जरूरी है, ताकि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो और किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।