हक की हुंकार: पंचायत सचिवों ने फूंका आंदोलन का बिगुल, 16 सूत्रीय मांगों को लेकर जनपद सीईओ को सौंपा ज्ञापन
*झिरन्या। खरगोन*
*संवाददाता दिलीप बामनिया*
*हक की हुंकार: पंचायत सचिवों ने फूंका आंदोलन का बिगुल, 16 सूत्रीय मांगों को लेकर जनपद सीईओ को सौंपा ज्ञापन; मांगे नहीं मानी तो ठप होगा काम*
*आर-पार की लड़ाई के मूड में 76 पंचायत सचिव, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा मांग पत्र; अनिश्चितकालीन हड़ताल की दी दो-टूक चेतावनी*

*झिरन्या। मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन के प्रांतीय आह्वान पर स्थानीय पंचायत सचिवों ने अपनी वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों और शासन की अधूरी घोषणाओं को लेकर जोरदार मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को जनपद पंचायत के सभी 76 सचिवों ने संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र तिरोले के नेतृत्व में एकजुट होकर झिरनिया जनपद मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) डॉ. रीमा अंसारी को मुख्यमंत्री के नाम 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा*।
*प्रतिनिधिमंडल ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि शासन ने उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो पूरे प्रदेश के साथ यहां भी कलमबंद हड़ताल और अनिश्चितकालीन काम बंद आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी*।

ज्ञापन की 16 प्रमुख मांगें:
विभागीय संविलियन: पंचायत सचिवों का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संविलियन कर सेवा सुरक्षा व सेवा शर्तें तय की जाएं।
राजस्व व गैर-विभागीय कार्यों से मुक्ति: स्वामित्व योजना, ई-केवाईसी (e-KYC), नामांतरण व अधिकार अभिलेख जैसे राजस्व संबंधी कार्यों का जिम्मा मूल विभाग को सौंपकर सचिवों को इनसे पूरी तरह मुक्त किया जाए।
पूर्व घोषणाओं के आदेश जारी हों: 3 अगस्त 2023 को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित महासम्मेलन में की गई सभी शासकीय घोषणाओं के लंबित आदेश तत्काल जारी हों।
समयमान वेतनमान व विसंगति निवारण: नियमानुसार समयमान वेतनमान का लाभ मिले और वर्षों से लंबित वेतन विसंगतियों को अविलंब दूर किया जाए।
PCO पद पर 50% पदोन्नति कोटा: सचिवों के दीर्घ अनुभव को देखते हुए पंचायत समन्वय अधिकारी (PCO) पद पर 50 प्रतिशत विभागीय पदोन्नति कोटा लागू किया जाए।
पुरानी पेंशन (OPS) व सेवा गणना: प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना करते हुए समस्त सचिवों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए।
सेवानिवृत्ति राशि 10 लाख रुपए हो: सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली 3 लाख रुपए की एकमुश्त राशि को बढ़ाकर न्यूनतम 10 लाख रुपए किया जाए।
ग्रेच्युटी व NPS का तुरंत भुगतान: सेवानिवृत्त हो चुके सचिवों के ग्रेच्युटी और एनपीएस (NPS) से जुड़े समस्त देयकों का तत्काल एकमुश्त भुगतान हो।
300 दिवस अर्जित अवकाश नकदीकरण: राज्य कर्मचारियों की भांति पंचायत सचिवों को भी 300 दिवस के अर्जित अवकाश नकदीकरण की पात्रता मिले।
कैशलेस स्वास्थ्य बीमा: पंचायत सचिवों एवं उनके आश्रित परिजनों को आयुष्मान योजना और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का स्थायी सुरक्षा कवच प्रदान किया जाए।
मनरेगा में एकतरफा वसूली पर रोक: धरातलीय सत्यापन और गुणवत्ता जांच के बिना सचिवों व रोजगार सहायकों से की जा रही मनमानी व अनुचित वित्तीय वसूली पर तत्काल रोक लगे।
ओबीसी अनुकंपा आश्रितों को नियुक्ति: दिवंगत सचिवों के पात्र ओबीसी वर्ग के अनुकंपा आश्रितों के लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से निपटारा किया जाए।
CPCT में 2 वर्ष की छूट: अनुकंपा नियुक्ति के समय सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा की अनिवार्यता शिथिल कर कार्यभार ग्रहण करने के बाद 2 वर्ष का समय दिया जाए।

अतिरिक्त कार्यभार पर प्रतिबंध: मूल पंचायत कार्यों के अलावा अन्य विभागों के अतिरिक्त बोझ से सचिवों को मुक्त रखा जाए।
सम्मानजनक सेवा शर्तें: ग्रामीण विकास की रीढ़ माने जाने वाले पंचायत सचिवों को पद की गरिमा के अनुरूप सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण मिले।
स्थायी शिकायत निवारण तंत्र: वेतन, पदोन्नति, अवकाश और स्थानांतरण से जुड़ी समस्याओं के समयबद्ध निराकरण हेतु राज्य स्तर पर स्थायी शिकायत निवारण प्रकोष्ठ स्थापित हो।
*ज्ञापन सौंपने के दौरान सचिव संघ अध्यक्ष महेंद्र तिरोले, अशोक मासरे, शांतिलाल तिरोले, दिलीप सोनी, कमल दागोड़े, अरविंद जायसवाल, मुकेश सोनी, बारेलाल सोलंकी, प्रताप चौहान, धन सिंह जादव, शुभम लाहोर, प्रहलाद यादव, आशीष पिंडारे, संदीप डावर, लाल सिंह जादव, अनोप गोलकर, जयंती खरते, कल सिंह मेहरा, संजय वर्मा, कैलाश सोलंकी, वीरेंद्र पटेल, मुकेश गंगराड़े, नवल नार्वे, दशरथ भाई, सुरेश खांडे, ग्यार सिंह तडोले सहित जनपद पंचायत के सभी 76 पंचायत सचिव एकजुट होकर उपस्थित रहे*।
*झिरन्या। संवाददाता दिलीप बामनिया*