हिमांशु उपाध्याय/ नितिन केसरवानी
कौशाम्बी: जिले के चायल ब्लॉक के मनौरी बाजार में शुक्रवार को लक्ष्मी वाटिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष और विशिष्ट अतिथि के रूप में विनीता गुप्ता और अनीता शर्मा का आगमन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत भुनेश्वर महराज ने की। कार्यक्रम में मंच का संचालन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला सेवा प्रमुख प्रमोद चंद्र ने किया। इस दौरान सह प्रांत सेवा प्रमुख पवन और जिला कार्यवाह कौशांबी दिलीप और जिला प्रचारक शिव प्रसाद भी उपस्थित रहें। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सुभाष ने कहा कि भारत की आत्मा सनातन वैदिक धर्म में निहित है। उन्होंने जोर दिया कि भारत के गौरवशाली अतीत को समझने के लिए सनातन वैदिक परंपरा को जानना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, भारत की पहचान उसके सनातन संस्कारों से जुड़ी है। मुख्य अतिथि ने आगे कहा कि हमारे जीवन में दो माताएं होती हैं: एक जन्म देने वाली और दूसरी पालन करने वाली, जो भारत माता हैं। उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार जन्म देने वाली मां के प्रति हमारा ऋण होता है, उसी प्रकार भारत माता के प्रति भी हमारा कर्तव्य और ऋण है, जिसे हमें अपने आचरण और सेवा भाव से पूरा करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि विनीता गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि आज हिंदू समाज को एकजुट होने की सख्त आवश्यकता है। हमें सामाजिक बुराइयों को त्यागकर एक साथ आना चाहिए। उन्होंने पर्यावरण सुरक्षा, महिला सम्मान, खाद्य सुरक्षा और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि अनीता शर्मा ने जोर देकर कहा कि हिंदू समाज को अपनी प्राचीन सनातन संस्कृति को समझना होगा और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना होगा। अनीता शर्मा ने बहुत से उदाहरण देकर हिंदुओं को एकजुटता दिखाने का आवाह्न किया।अध्यक्षता कर रहे महंत भुनेश्वर महराज ने कहा कि हमारी संस्कृति ने विश्व को आयुर्वेद और योग जैसे अमूल्य उपहार दिए हैं। इनका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता और ये हमें स्वस्थ तथा सुंदर बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति संपूर्ण विश्व के कल्याण की बात करती है। हिंदू सम्मेलन के आयोजन कर्ता प्रमोद चंद्र केसरवानी ने छुआछूत और जातिगत भेदभाव पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि समाज की सेवा करने वाला कोई भी व्यक्ति अछूत नहीं हो सकता। भगवान राम का केवट से प्रेम, शबरी के जूठे बेर, कृष्ण का सुदामा के घर भोजन, यह केवल कथाएं केवल सुनाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए हैं। जब तक जाति और छुआछूत की भावना का समूल नाश नहीं होगा, तब तक हिंदू सम्मेलन केवल औपचारिकता रहेंगे।
इस दौरान पुरुषोत्तम दास, अनूप, केशव, प्रदीप, दौलत राम, विनय, शंभूलाल,राम चन्द्र, घनश्याम, रजत, संजीव, सुधीर, हर्ष, प्रमोद, पूनम सहित सैकड़ों हिन्दू समाज के लोग उपस्थित रहे।