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ढोल और मांदल की थाप पर विश्व आदिवासी दिवस पर जमकर झुमे हजारों आदिवासी युवा

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*झिरन्या। खरगोन*

 

*संवाददाता दिलीप बामनिया*

 

*ढोल और मांदल की थाप पर विश्व आदिवासी दिवस पर जमकर झुमे हजारों आदिवासी युवा*

 

झिरन्या तहसील में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम हुआ जिसमे सिर्फ़ हमारे देश की समृद्ध आदिवासी विरासत का उत्सव है, बल्कि उनकी जीवनशैली, कला, संगीत, नृत्य और प्रकृति से जुड़ाव को समझने का एक अद्भुत अवसर भी है।

 

कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और गीतों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आदिवासी समुदाय की संस्कृति में जो सादगी, आत्मीयता और प्रकृति के प्रति सम्मान है, वह हमें बहुत कुछ सिखाता है।

इस विशेष दिन पर हमने सिर्फ़ उत्सव नहीं मनाया, बल्कि यह भी जाना कि कैसे हमें मिलकर इन समुदायों के अधिकारों, पहचान और अस्तित्व की रक्षा करनी है।

 

विश्व आदिवासी दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताक़त है। आइए, मिलकर इन परंपराओं को सम्मान दें और उनके योगदान को स्वीकार करें।

 

प्रकर्तिक पूजक आदिवासी समाज होने से आज 20 दिनों से बारिश नहीं हो रही थी आज बारिश भी हुई और किसानो के चेहरो पर जो खुशी और विश्व आदिवासी दिवस की खुशी से बारिश मे झूमे

 

जिसमे आज क्षेत्रिय विधायक आदरणीय झूमा सोलंकी ने आदिवासी संस्कृति , अस्मिता , अस्तित्व को संजोक कर रखने पर प्रकाश डाला और शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जाये

प्रकती का संरक्षण करने पर जोर दिया

 

आज का विश्व आदिवासी दिवस झिरन्या मे और एहतिहासिक रहा जिसमे हमारे समाज की बनी कलेक्टर मनीषा धार्वे दीदी द्वारा समाज को शिक्षा के लिए प्रेणा रही जिसमे दीदी द्वारा समाज का कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहे है शिक्षा हि समाज को बदल सकता है सभी बच्चो को पालक को अपने बच्चो को पढ़ाने और मेहनत करने का बोला

 

जिला पंचायत सदस्य जिंदरसिंह बड़ोले ने जो समाज मे देजा की कुरीति फैली उस पर अंकुश लगाने पर बोले और जो समाज ने देजा का नियम बनाया है उसका पटेल अमल किया जाये

 

जयस ब्लॉक अध्यक्ष मगन जाधव ने 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस क्यू मानते है इसका मुख्य उद्देशय क्या है और ये दिवस कब के बना रहे है विश्व आदिवासी दिवस को संपक्षित मे बताया और आदिवासी समाज की बोली भाषा ,रीति रिवाज, संस्करती, अस्मिता अस्तित्व को बचाये रखने पर जोर दीय गया

 

आदिवासी एकता परिषद अध्यक्ष रमेश पटेल द्वारा जो आदिवासी समाज मे आये दिन जो शोषण अत्याचार हो होते है उस पर जोर दिया गया

 

समाज सेवी डॉ हितेश मुजाल्दे सर द्वारा जो समाज मे लगातार सिकल शेल के मरीज बड़े रहे उस विस्तृत जानकरी दी

 

कार्यक्रम का मंच संचालन कर्ता राजू डुडवे सरपंच ,साईसिंह सिसोदिया ,योगेश कर्जले ने किया

 

जो झिरन्या नगर मे रैली निकली गई और जो झांकी के साथ आदिवासी महापुरषों के रूप मे डॉ बाबा साहेब का रोल धर्मेद्र सिसोदिया जयस उपाध्यक्ष ने किया ,टंटिया मामा के रूप मे दुर्गेश सिसोदिया थे

 

आज के कार्यक्रम मे उपस्तिथ सीताराम डावर उपाध्यक्ष, बाबूलाल चौहान सर, गणपत चौहान सर, आम्ब सर, गेंदराम चौहान सर, शोभाराम सेनानी सर, जगदीश किराड़े, मुन्ना भाई मोरे इंदरसिंह बर्डे उपाध्यक्ष,

 

कार्यक्रम का आभार छोटासिंह बड़ोले सर द्वारा किया गया

 

*झिरन्या। संवाददाता दिलीप बामनिया की रिपोर्ट*

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