रायसेन की रामलीला। साधु का भेष धारण कर लंका पति रावण
*दैनिक प्राईम संदेश जिला ब्यूरो चीफ राजू बैरागी जिला *रायसेन*
ने किया सीता का हरण
मध्य प्रदेश जिला रायसेन
28 दिसंबर2023
आकाश मार्ग से चला लंका की ओर।
रास्ते में जटायु ने रोका रास्ता तो रावण ने काटे पंख, प्रभु राम के हाथों जटायु का हुआ उद्धार
श्री रामलीला महोत्सव के चलते गुरुवार को रामलीला मैदान में सीता हरण प्रसंग की आकर्षक लीला का मंचन कलाकारों द्वारा शानदार ढंग से प्रस्तुत किया गया जिसे देखकर रामलीला में मौजूद दर्शक भी मंत्र मुग्ध हो गए।
प्रस्तुत की गई लीला के अनुसार सूर्फनाखा अपने भाई लंका पति रावण के पास पहुंचती है और उन्हें अपनी पूरी दास्तान सुनाती है बोलती है कि भैया पंचवटी पर दो तपसी बालक हैं जिसमें से छोटे बालक ने मेरी नाक काट ली जब मैं यह बात खरदूषण को बताई तो उसे उसे भी उन्होंने मार दिया सूर्पनखा की इतनी बात सुनकर रावण किरोधित हो जाता है और कहता है कि हे बहन तुम चिंता मत करो तुम्हारी नाक का बदला में जरूर लूंगा मैं देखता हूं जाकर उन्हें कौन बालक है जिन्होंने मेरी बहन के नाक काटे इस प्रकार से लंका पति रावण दंडक वन की ओर चल देते हैं आगे चलकर उनकी भेंट मामा मारीच से होती है यहां पर मांरीच और रावण के बीच काफी देर तक संवाद होता है रावण योजना बनाते हुए कहते हैं कि हे मारीच तुम मेरा एक काम करो तुम मायावी सोने का मृग बनकर सीता के पास जाओ क्योंकि फिर मेरा काम सिद्ध हो जाएगा परंतु मामा मारीच रावण का कहना नहीं मानते हैं और रावण को समझाते हुए कहते हैं कि आप गलत काम करने जा रहे हैं आपको सीता का हरण नहीं करना चाहिए, प्रभु राम जी से बैर लेना अच्छी बात नहीं। इतनी बात सुनकर लंका पति रावण मारीच के ऊपर क्रोधित होता है और कहता है कि मैं समझ गया तुम मेरा कहना नहीं मानोगे तुम तो दूसरों के ही गुणगान करोगे तुम ऐसे नहीं मानोगे मैं तुम्हारा बध कर दूंगा जब रावण ने इतनी बड़ी बात बोली तो मारीच समझ गए कि अब लंका पति रावण मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे इससे अच्छा तो मैं उनके कहने पर सोने का मृग बन जाऊं जिससे क्यों ना मेरी मुक्ति परमात्मा भगवान राम के हाथों से हो और मेरा उधर भी हो जाएगा। इस प्रकार से मामा मारीच सोने का मायावी मृग बनकर और वन की ओर चल देते हैं विचरण करते हुए घूमते हैं इसी समय माता सीता की निगाह इस सोने के मृग की ओर जाती है तो वह मन ही मन प्रभावित होती हैं और वह प्रभु श्री राम से इसको पकड़ लाने के लिए बोलती हैं जबकि परमात्मा राम तो सभी समझ रहे थे क्योंकि बह तो अंतर्यामी है घट-घट के स्वामी हैं परंतु भगवान राम ने सीता से कहा कि तुमने पहली बार मुझसे कोई काम के लिए कहा है मैं उसे पकड़ कर लाता हूं। इस प्रकार से भगवान राम सीता से कहते हुए लक्ष्मण जी को समझते हैं कि तुम इनका ध्यान रखना मैं मृग को पकड़ने के लिए जा रहा हूं और वह वन में मृगा के पीछे-पीछे चल देते हैं परंतु वह इधर-उधर भागते हुए घूमता है आगे आगे चलता है और प्रभु श्री राम उसके पीछे-पीछे चलते हैं आगे चलकर भगवान राम इस मृग को वान मार देते हैं जिससे वह घायल होकर पृथ्वी पर गिर जाता है और उसके मुंह से राम-राम की आवाज आती है। इधर यही आवाज जब माता सीता के कानों में पड़ती है तो वह पहरे पर लक्ष्मण थे उनसे कहती है कि हे लक्ष्मण हो न हो यह मेरे स्वामी राम की आवाज हे
वह किसी बड़े धर्म संकट में फंस गए हैं आप जाकर देखो। इधर लक्ष्मण जी माता सीता को समझाते हुए लक्ष्मण रेखा खींचते हैं और वन की ओर चल देते हैं, इधर राम लक्ष्मण दोनों ही भाई वन में वृक्ष, पेड़, पौधों और लताओं से पूछते हैं कि आपने सीता को देखा है । इस प्रकार से विलाप करते हुए वन में भगवान विचरण करते हैं तभी उन्हें राम-राम की आवाज सुनाई देती है तो उन्हें जटायु पृथ्वी पर पड़ा मिलता है जहां जटायु से भगवान राम ने भेंट करते हुए पूछा कि यह हाल तुम्हारा किसने किया तब जटायु ने भगवान राम को बताया कि लंका का राजा रावण आकाश मार्ग से सीता को हर कर ले गया है मैंने उसका रास्ता रोककर विरोध किया तो उसने मेरे ही पंख काट दिए और मेरी यह हालत कर दी । भगवान राम ने जटायु की बातों को ध्यान से सुन उसका उद्धार कर दिया। इस आकर्षक लीला का मंचन दर्शको ने देखा तो वह अपने आप को रोक नहीं पाए इस दौरान कई दशकों की आंखों से आंसू छलक पड़े, इस प्रकार से आकर्षक प्रसंग की लीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे थे।
रामलीला में शुक्रवार को सुग्रीव मित्रता एवं बाली वध प्रसंग की लीला की होगी प्रस्तुति
रामलीला मेला आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी सी एल गौर ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को रामलीला मैदान में स्थानीय कलाकारों द्वारा श्री राम सुग्रीव मित्रता एवं बाली वध की लीला का मैदानी आकर्षक मंचन किया जाएगा, अब रामलीला मेले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में दर्शक मेले का आनंद लेने के लिए आ रहे हैं।