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हिन्दू पंचांग का आधार विक्रम संवत् की महाराजा विक्रमादित्य ने की थी शुरुआत*  *महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ शास्त्र अध्ययन शाला में ‘सम्राट विक्रमादित्य ज्ञान प्रतियोगिता’ आयोजित* 

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*हिन्दू पंचांग का आधार विक्रम संवत् की महाराजा विक्रमादित्य ने की थी शुरुआत*

 

*महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ शास्त्र अध्ययन शाला में ‘सम्राट विक्रमादित्य ज्ञान प्रतियोगिता’ आयोजित*

 

*छतरपुर*। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में भूगर्भशास्त्र विभाग के अंतर्गत 15 अप्रैल 2026 को विभागाध्यक्ष प्रो. पी के जैन के निर्देशन में ‘सम्राट विक्रमादित्य ज्ञान प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत के महान सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनके ऐतिहासिक योगदान की जानकारी देना हैं। विभाग के अतिथि विद्वान आशी जैन और मुमताज मंसूरी ने छात्रों को बतलाया कि विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक महान और लोकप्रिय राजा माने जाते हैं। उनका शासन उज्जैन (वर्तमान मध्य प्रदेश) से जुड़ा हुआ माना जाता है। इतिहास और लोककथाओं के अनुसार वे अत्यंत न्यायप्रिय, वीर और विद्वान शासक थे। विक्रमादित्य का सबसे बड़ा योगदान विक्रम संवत् की स्थापना माना जाता है। यह संवत 57 ईसा पूर्व से शुरू होता है। आज भी भारत और नेपाल में इसका उपयोग धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों में किया जाता है। विक्रम संवत के आधार पर हिंदू पंचांग तैयार किया जाता है। इसमें चंद्रमा और सूर्य की गति के आधार पर समय की गणना की जाती है।

तिथि, मास, पक्ष, ऋतु आदि की गणना इसी प्रणाली से होती है ।विक्रमादित्य न केवल एक महान् शासक थे, बल्कि उन्होंने भारतीय समय गणना प्रणाली को भी स्थिर रूप दिया। विक्रम संवत् आज भी उनकी ऐतिहासिक विरासत का प्रमुख प्रमाण है। इस अवसर पर विभाग की अतिथि विद्वान आशी जैन, मुमताज मंसूरी, आशिया बानो, गुट्टी लाल कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।

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