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प्रदेश सरकार श्रमिक कामगारों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से दे रही है सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा

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News By- नितिन केसरवानी

लखनऊः प्रदेश सरकार श्रमिको के कल्याण के लिए हर स्तर पर उनकी सहायता कर रही है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्यों में संलग्न श्रमिकों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाते हुए उनकी सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण (नियोजन तथा सेवाशर्त विनियमन) नियमावली प्रख्यापित की जा चुकी है तथा उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन भी किया गया है। प्रदेश के 18-60 आयु वर्ग के निर्माण श्रमिक जो निर्माण प्रक्रिया के कार्यों में एक वर्ष में 90 दिन से अधिक कार्य किए है, ऐसे सभी श्रमिक अधिनियम के अन्तर्गत पंजीयन हेतु पात्र हैं। उ०प्र० शासन के द्वारा 40 से अधिक प्रक्रियाएं/कार्य निर्माण कार्यों की सूची में सम्मिलित किये गये है। इन निर्माण कार्यों में बेल्डिंग का कार्य, बढई कार्य, कुँआ खोदना, रोलर चलाना, छप्पर डालने का कार्य, राजमिस्त्री का कार्य, प्लम्बरिंग, लोहार, मोजैक पॉलिश, सड़क निर्माण, मिक्सर चलाने का कार्य, पुताई, इलैक्ट्रिक वर्क, हथौड़ा चलाने का कार्य, सुरंग निर्माण, टाईल्स लगाने का कार्य, कुएं से गाद (तलछट हटाने का कार्य/डिविंग). चट्टान तोड़ने का कार्य, या खनिकर्म, स्प्रे वर्क या मिक्सिंग वर्क (सड़क निर्माण से सम्बद्ध), मार्बल/स्टोन्स वर्क, चौकीदार (निर्माण स्थल पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए), चूना बनाना, मिट्टी का काम, (सीमेन्ट कंक्रीट, ईट आदि ढोने का कार्य), एवं स्वचालित सीढ़ी की स्थापना आदि कार्यों के श्रमिक सम्मिलित है।

इसी प्रकार सुरक्षा द्वार एवं अन्य उपकरणों की स्थापना का कार्य, मिट्टी, बालू व मौरंग के खनन का कार्य, ईट-भट्ठों पर ईट निर्माण का कार्य, सामुदायिक पार्क या फुटपाथ का निर्माण, रसोई में उपयोग हेतु माडूलर इकाईयों की स्थापना, खिड़की ग्रिल, दरवाजे आदि की गढ़ाई एवं स्थापना का कार्य, मकानों/भवनों की आन्तरिक सज्जा का कार्य, बड़े यांत्रिक कार्य, जैसे-मशीनरी, पुल निर्माण कार्य, अग्निशमन प्रणाली का स्थापना एवं मरम्मत का कार्य, ठंडे एवं गरम मशीनरी की स्थापना और मरम्मत का कार्य, बाढ़ प्रबन्धन व इसी प्रकार के अन्य कार्य से संबंधित सभी कार्य, बाँध, पुल, सड़क का निर्माण या भवन निर्माण के अधीन कोई संक्रिया, स्विमिंग पूल, गोल्फ कोर्स आदि/सहित अन्य मनोरंजन सुविधाओं का निर्माण कार्य, लिपिकीय/लेखा-कर्म (किसी निर्माण अधिष्ठान लिपिक व लेखाकार के रूप में कार्यरत सभी प्रकार के कर्मकार के लिए), सभी प्रकार के पत्थर काटने, तोड़ने व पीसने का कार्य निर्माण कार्यों के अन्तर्गत आते है।

इस अधिनियम के अन्तर्गत श्रमिकों के पंजीयन हेतु निर्धारित प्रारूप पर पूर्णतया भरे हुए हस्ताक्षरित आवेदन पत्र के साथ रू0 20/- आवेदन शुल्क तथा रू0 20 /- प्रथम वर्ष का अंशदान श्रमिक को देना पड़ता है। एक बार में 03 वर्ष का अंशदान भी जमा किया जा सकता है और आवश्यक अभिलेख के रूप में 02 पासपोर्ट आकार के फोटो, नियोजन प्रमाण पत्र, आधार कार्ड एवं बैंक पास बुक की प्रति प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।

प्रदेश में उ0प्र0 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार के अन्तर्गत निर्माण श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। सभी पंजीकृत श्रमिकों को संबंधित अधिष्ठानों द्वारा रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी प्रकार निर्माण स्थलों/अधिष्ठानों, जहाँ वर्ष में किसी भी दिन 10 या इससे अधिक निर्माण श्रमिक नियोजित है, निर्माण स्थलों/ऐसे अधिष्ठानों का पंजीयन भी अधिनियम के अन्तर्गत अनिवार्य है। रिहायशी भवनों की स्थिति में रू010 लाख से अधिक लागत के भवनों पर ही अधिनियम के प्राविधान लागू होते है। उ0प्र0 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम 1996 की धारा-3 द्वारा अधिनियम से आवर्त सभी भवनों एवं सन्निर्माणों के लागत का 01 प्रतिशत धनराशि उपकर के रूप में लिए जाने का प्राविधान है। उपकर के रूप में प्राप्त धनराशि का उपयोग पंजीकृत निर्माण श्रमिकों हेतु संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर व्यय किया जाता है।
प्रदेश के निर्माण श्रमिकों के लिए कई योजनाएं संचालित है जिनमें मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना, निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना, कन्या विवाह योजना, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना, निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना, महात्मा गांधी पेंशन योजना, आवासीय विद्यालय योजना, सन्त रविदास शिक्षा सहायता योजना, पं0 दीनदयाल उपाध्याय चेतना योजना, अटल आवासीय विद्यालय योजना, आपदा राहत सहायता योजना प्रमुख है। प्रदेश सरकार इन योजनाओं के माध्यम से लाखों श्रमिक कामगारों एवं उनके परिवारजनों को करोड़ों रूपये की आर्थिक सहायता दे रही है।

 

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