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विश्व युवा दिवस पर 500 कलशो से युवाओं ने जिनेंद्र देव का किया महाभिषेक 

108 रिद्धि मंत्रों से मुनिद्वय के मुखारविंद से हुई शांतिधारा

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विश्व युवा दिवस पर 500 कलशो से युवाओं ने जिनेंद्र देव का किया महाभिषेक

*108 रिद्धि मंत्रों से मुनिद्वय के मुखारविंद से हुई शांतिधारा*

*ब्लॉक संवादाता ओम सोनी*

भवानीमंडी में दिगंबर जैन समाज के युवाओ द्वारा विश्व युवा दिवस पर 500 कलशो से जिनेंद्र देव का महाभिषेक व शांतिधारा की गई। दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष विजय जैन जूली ने बताया कि नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विश्व युवा दिवस के अवसर पर मुनिद्वय निष्पक्ष सागर व निष्पक्ष सागर महाराज की प्रेरणा व सानिध्य में जैन समाज के युवाओं द्वारा 500 कलशो से जिन अभिषेक किया गया इस दौरान मुनिद्वय के मुखारविंद से 108 रिद्धि मंत्रों का जाप किया गया। इस अवसर पर शांति धारा का लाभ ओम जैन नीता जैन परिवार, जीवंधर जैन राहुल जैन परिवार, प्रथम अभिषेक का लाभ राजेश सांवला अमन सांवला परिवार, सुधीर श्रीमाल परिवार, कैलाश जैन परिवार रामगंजमंडी, विजय जैन प्रभव जैन परिवार व श्रावक श्रेष्ठि का लाभ विमल जैन सचिन जैन फिरोजाबाद, मधु जैन सचिन जैन कपिल जैन परिवार व विजय जैन प्रीति जैन परिवार द्वारा लिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाजजन सहित युवा शक्ति मौजूद रही।

*युवा स्वयं में एक उत्सव है : मुनि निष्पक्षसागर महाराज*

मुनि निष्पक्ष सागर महाराज ने अपनी मंगल देशना में बताया कि नरको में धर्म करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, युवा दिवस उत्सव का दिवस है, युवा स्वयं में एक उत्सव है। युवा वह है जिसके हाथों में बल, पैरों में गति हो, जिसके हृदय में ऊर्जा, उत्साह, उमंग हो, जिसकी आंखों में कुछ कर गुजरने के सपने हो वही असल में युवा है। उम्र से कोई बूढ़ा या जवान नहीं होता। इस युग में युवाओं व श्रमण संस्कृति को ऊंचाइयों तक ले जाने वाला यदि कोई युवा हुआ है तो वह थे युवा विद्याधर, जिन्होंने तरुण अवस्था में ही क्रांतिकारी निर्णय लेते हुए मुनि अवस्था को प्राप्त किया। उनके साथ ही यह श्रमण धर्म भी युवा हो गया। प्रत्येक युवा महान बनने की क्षमता रखता है। युवाओं को उद्देश्य विहिन जीवन नहीं जीना चाहिए। समाज द्वारा जीवन में चार आश्रमों का निर्धारण किया गया था जिसे भंग किए जाने के कारण ही आज के समय में प्रत्येक घर में अशांति का माहौल बना हुआ है। जीने की कला तो दुनिया सिखाती है, मरने की कला केवल जैन दर्शन मे ही है, हमारे परिणाम हमारा मरण निर्धारित करते है। जीत सको तो दिल जीतो हार जीत मे क्या रखा है। छूटने से पहले ही छोड़ना सीख लो।

फोटो :~ 500 कलशो से युवा जिनेंद्र देव का

महाभिषेक करते।

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