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उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा क्रान्ति की ओर अग्रसर

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News By-नितिन केसरवानी

आज विश्व के हर क्षेत्र में विकास करने के लिये विद्युत जरूरी है। बिना विद्युत के कोई भी यन्त्र, उपकरण, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण यातायात वाहन, घरेलू प्रकाश आदि नही चल पाते है। विद्युत उत्पादन, विद्युत शक्ति, जल से. कोयले आदि की उष्मा से, नाभिकीय अभिक्रियाओं से, पवन शक्ति से. पेट्रोलियम/प्राकृतिक गैस आदि से होती है। किन्तु यह संसाधन धीरे-धीरे खत्म हो रहे है। इसलिये मानव को विद्युत आवश्यकताओं के लिये सौर ऊर्जा व अन्य विद्युत उत्पादन संसाधनों पर निर्भर होना पड़ेगा। विश्व भौगोलिक क्षेत्र में सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा श्रोत है। सूर्य की ऊर्जा के कारण ही मौसम एवं जलवायु का श्परिवर्तन होता है। धरती पर सभी प्रकार के जीवन, जीव-जन्तु, पेड-पौधे आदि को सूर्य की ऊर्जा का ही सहारा है। इसी सूर्य की ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने को ही मुख्य रूप से सौर ऊर्जा कहा जाता है। सौर ऊर्जा वास्तव में अक्षय ऊर्जा श्रोत है जिसका उपयोग छोटे स्तर से लेकर बडे स्तर तक किया जा सकता है। सूर्य की उष्मा से प्राप्त सौर ऊर्जा उत्पादन में कोई प्रदूषण नहीं होता है। इससे संचालित उपकरणों का जीवन लम्बा होता है और रख-रखाव की कम आवश्यकता होती है। सौर ऊर्जा आधुनिक जीवन में महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्त्व में उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे है। सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश में सर्वाेच्च प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में हो गया है। प्रदेश में 3840 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के 09 सोलर पार्कों की स्थापना की जा रही, इसमें से 528 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है। सौर ऊर्जा की प्राकृतिक संभावना वाले सर्वश्रेष्ठ चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के पश्चात उत्तर प्रदेश देश में पांचवें स्थान पर है, जहां पर सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में बृहद स्तर पर कार्य किया जा रहा, प्रदेश के बुंदेलखंड और अन्य क्षेत्रों में सोलर पार्कों की स्थापना की जा रही है। प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से सोलर पार्कों की स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर निवेश प्राप्त हुआ है।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने बड़े ठोस कदम बढ़ाए हैं। इनमें सोलर पार्क के अतिरिक्त घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर लगाना, सोलर नगरों की स्थापना, कृषि फार्म को सौर ऊर्जा से बिजली देना, पंप स्टोरेज एवं जैव ऊर्जा का उत्पादन शामिल हैं। बायोमास ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत प्रदेश में 25 लाख घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहें है। इससे लोगों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी। प्रदेश में सौर ऊर्जा से 22 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य है। इसमें 6 हजार मेगावाट निजी व सरकारी भवनों में सोलर रूफटॉप संयंत्रों की स्थापना करके की जा रही है। तथा 14 हज़ार मेगावाट क्षमता की सौर उपयोगिता परियोजनाएं व सोलर पार्क स्थापित किये जायेंगे। राज्य में 3871.17 मेगावाट ग्रिड से जुड़ी नवीकरणीय क्षमता स्थापित की गई है। साथ ही कैप्टिव उपयोग, तीसरे पक्ष की बिक्री और डिस्कॉम, यूपीपीसीएल को बिजली की खुली बिक्री के तहत 2594 मेगावाट की ग्राउंड माउंटेड परियोजना स्थापित की गई। प्रदेश के 1.21 लाख घरों में 450 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं।

प्रदेश में पीएम कुसुम योजना के तहत 16.17 मेगावाट ग्रिड ट्यूबवेल को सौर ऊर्जा से संचालित किया गया है। 2000 से अधिक पम्पों का सोलराइजेशन किया गया है। किसानों के निजी ऑनग्रिड पम्प का सोलराइजेशन के साथ पृथक  कृषि विद्युत फीडरो का भी सोलराइजेशन कराया जायेगा। प्रदेश के 61 जिलों के गांवों में 886 मेगावाट के पेयजल पंपिंग स्टेशन सौर ऊर्जा से संचालित किए गए। पिछले एक वर्ष में 528 मेगावाट ग्राउंड माउंटेड यूटिलिटी स्केल चालू किया गया है। 6800 मेगावाट यूटिलिटी स्केल परियोजनाओं को स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। 2653 मेगावाट से अधिक क्षमता की परियोजनाओं का कार्य पूर्ण हो गया है।

 

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