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भ्रष्टाचार का अड्डा बनी चोपना समिति : एक और फर्जीवाड़ा आया सामने 

सहकारी समिति चोपना में सिकमी के नाम से चल रहा फर्जी खेल

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भ्रष्टाचार का अड्डा बनी चोपना समिति : एक और फर्जीवाड़ा आया सामने

 

सहकारी समिति चोपना में सिकमी के नाम से चल रहा फर्जी खेल

 

चोपना सहकारी समिति में पहले भी हो चुके है करोड़ों के घोटाले

 

मनीष कुमार राठौर

8109571743

भोपाल / बैतूल । जिलें की घोड़ाडोंगरी तहसील के अंतर्गत आने वाली सहकारी समिति चोपना में प्रतिवर्ष किसी न किसी प्रकार के घोटाले और भ्रष्टाचार की कहानी सामने निकल कर आती है और कार्रवाई होने के बाद भी लगातार फर्जीवाड़ा चल रहा है ।

 

समिति के कर्मचारी और व्यापारियों की मिली भगत से शासन की नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है, आदिवासियों की जमीन बगैर अधिकारियों के आदेश के बिना व्यापारी अपने नाम से सिकमी करवा कर फर्जी खेल खेल रहे है, जिसकी जानकारी चोपना समिति को है उसके बाद भी ऐसे किसान जो समिति में कर्जदार है अपने कर्ज लौटा नहीं पा रहा है उसे समिति के कर्मचारियों द्वारा दूसरे लोगों के नाम पर सिकमी पर लेकर धान की विक्रय किया गया है जबकि किसानों को पता ही नहीं कि उनके जमीन सिकमी पर समिति में पंजीयन कर अन्य व्यक्ति के नाम से पंजीयन कर धान का विक्रय किया गया है। चोपना सहकारी समिति के कर्मचारी व्यापारियों के सामने नत मस्तक है। चोपना सहकारी समिति व्यापारियों के इशारे पर चलने के लिए मजबूर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार चोपना समिति में सिकमी के नाम पर चला फर्जी खेल आसानी से समझ पाना संभव नहीं है। जिसे समझने के लिए बिंदु पर अलग-अलग देखने की आवश्यकता है ।

 

*मामला प्रथम:* एक ऐसा किसान जो समिति में कर्जदार है अपने कर्ज लौटा नहीं पा रहा है समिति के कर्मचारियों द्वारा प्रलोभन दिया गया है कि तुम्हारा कर्ज लौटना नहीं पड़ेगा बदले में तुम तुम्हारी खेती करो और तुम्हारी खेती को हम दूसरे किसी के नाम से सिकमी करके मैं खुद धान दूंगा। एक ऐसा मामला है जिसमें किसान अपने खेती स्वयं कर रहा है जबकि उसका खेत का सिकमी दूसरे व्यक्ति के नाम पर किया गया है जो खेती नहीं कर रह है और तीसरे व्यक्ति समिति के कर्मचारी इस सिकमी पर अपने धान बिक्री किया है।

 

*मामला दूसरा:* ऐसा भी किसान है जो ना खेती करता है ना ही उसे समिति से कोई लेनदेन है उनके जमीन बगैर जानकारी के दूसरे व्यक्ति के नाम पर सिकमी करवा कर धान का विक्रय किया है।

 

*मामला तीसरा:* शासन के नियम अनुसार किसी आदिवासियों की जमीन सामान्य वर्ग के किसी भी व्यक्ति के साथ सिकमी नहीं किया जा सकता है । लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए शासन के अधिकारियों के बगैर आदेश के बिना समिति के कर्मचारियों द्वारा आदिवासियों का जमीन का सिकमी व्यापारियों के नाम से किया गया है।

 

*अगले अंक में*

 

चोपना समिति के कौन अधिकारी कर्मचारी है फर्जीवाड़े में शामिल देखिए अगली खबर में

 

कैसे बैतूल कलेक्टर, तहसीलदार और एसडीएम को गुमराह कर रहे समिति के कर्मचारी ?

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