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प्रदेश में हो रहा है हर खेत तक पानी पहुंचाने का भागीरथी कार्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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प्रदेश में हो रहा है हर खेत तक पानी पहुंचाने का भागीरथी कार्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में तेज गति से हो रहा विकास
राज्यों के नदी विवादों को सुलझाकर नदी जोड़ो परियोजनाएँ हुई प्रारंभ
मुख्यमंत्री ने तराना में नर्मदा-क्षिप्रा माइक्रो-उद्वहन सिंचाई परियोजना का किया लोकार्पण
परियोजना के शुभारंभ के साथ ही 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा पानी
प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए निरंतर हो रहे है कार्य
आने वाले समय में लोकसभा एवं विधानसभा में महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण

उज्जैन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में नदी जोड़ो अभियान के माध्यम से हर खेत तक पानी पहुंचाने का भागीरथी कार्य किया जा रहा है। यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है कि केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी दो बहुउद्देशीय बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं का श्रीगणेश हुआ है। आज नर्मदा-क्षिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से नर्मदा का जल तराना में आया है। सूखे खेतों में पानी पहुंचेगा तो सोने जैसी फसलें लहलहाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 2 हजार 489 करोड़ 65 लाख रूपये की नर्मदा-क्षिप्रा बहुउद्देश्य माइक्रो बहुउद्देशीय परियोजना के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह को उज्जैन जिला प्रभारी एवं कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरी महाराज, सांसद अनिल फिरोजिया ने भी संबोधित किया। इसमें शाजापुर विधायक अरूण भीमावद, तराना विधायक महेश परमार सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तराना में जल संसाधन विभाग के 9.64 करोड़ रूपये लागत के इंदौर हाई लेवल ब्रिज, 5 करोड़ 73 की लागत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 5 करोड़ 21 लाख रूपये लागत की 11 नल जल परियोजनाओं का लोकार्पण किया। उन्होंने 7 करोड़ 15 लाख रूपये लागत के उप-स्वास्थ्य केंद्र के नवीन भवन तथा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत ग्राम कडेरी में हाई स्कूल भवन निर्माण का भूमि-पूजन भी किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में तेज गति से विकास हो रहा है। भारत आज विश्व में सबसे सशक्त देश बनकर उभरा है। भारत की आज पूरी दुनिया में कीर्ति है, सम्मान है। हर क्षेत्र में हम तरक्की कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में आज हमारे पास सबसे आधुनिक हथियार और उपकरण हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, यहां 250 से अधिक नदियां है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्षों से विभिन्न राज्यों के बीच चल रहे नदी विवादों को सुलझा कर नदी जोड़ो परियोजनाओं का कार्य प्रारंभ किया है। पार्वती-कालीसिंध- चंबल (पीकेसी) परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश और राजस्थान में 20 वर्षों से विवाद चल रहा था। अब विवाद समाप्त हो गया है और परियोजना मूर्त रूप ले रही है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश राज्यों में सहमति के बाद केन-बेतवा लिंक परियोजना पर कार्य प्रारंभ हो गया है। इन सभी परियोजनाओं से प्रदेश में हर खेत तक पानी पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में किसानों को प्रतिवर्ष 12000 रूपए की राशि दी जाती है। हमारी सरकार इस वर्ष से 2600 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन कर रही है। किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार पशुपालन को भी बढ़ावा दे रही है। सरकार ने 10 गाय पालने वालों को भी अनुदान राशि और दुग्ध उत्पादकों को 5 रूपये प्रति लीटर अनुदान देने का निर्णय लिया है। हमारा उद्देश्य दुग्ध उत्पादन में राज्य को नंबर वन बनाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नारी सशक्तिकरण हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने आने वाले समय में लोकसभा एवं विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का निर्णय लिया है। इसके लिए वर्ष 2029 तक इतनी अतिरिक्त सीटें बढ़ाई जाएगी। स्थानीय निकाय चुनाव में प्रदेश में महिलाओं को 50% तथा नौकरियों में 35% आरक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना जैसी योजनाएं महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई हैं। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग में काम करने वाली महिलाओं को 5000 रूपये प्रति महीना इंसेंटिव दिया जाएगा। महिलाओं को रेडीमेड गारमेंट्स का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार हर हाथ को काम देगी। हर युवा को उसकी योग्यता के अनुसार रोजगार मिलेगा। हम 1 वर्ष में लगभग 01 लाख सरकारी पदों पर भर्ती करने जा रहे हैं। पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में भर्ती की जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हजारों साल से सत्ता, धर्म सत्ता के अधीन चलती है। यह संस्कृति सनातन संस्कृति के नाम से जानी जाती है। राजा, महाराजा, सम्राट सब धर्म आधारित समाज के अधीन है। हमारी संस्कृति भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के नाम से जानी जाती है। भगवान राम ने हमारे प्रदेश के चित्रकूट धाम में 11 साल व्यतीत किये। चित्रकूट धाम को हम अयोध्या की तरह विकसित करेंगे। इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण की प्रदेश के विभिन्न स्थानों, जहां-जहां लीलाएं हुई है, उन्हें हम तीर्थ के रूप में विकसित करेंगे। सिंहस्थ-2028 के लिए सभी व्यवस्थाएं करते हुए सुनिश्चित करेंगे कि साधु-संतों एवं श्रृद्धालुओं को किसी प्रकार का कष्ट न हो।

नर्मदा-क्षिप्रा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के मुख्य बिंदु

नर्मदा-क्षिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से क्षेत्र के कुल 100 ग्रामों की 30 हजार 218 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे उज्जैन जिले की दो तहसीलों तराना एवं घटिया के कुल 83 ग्रामों की 27 हजार 490 हेक्टेयर तथा शाजापुर जिले की शाजापुर तहसील के कुल 17 ग्रामों की 2728 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। परियोजना का कुल कमाण्ड क्षेत्र 30 हजार 218 हेक्टेयर है। परियोजना अंतर्गत ओंकारेश्वर जलाशय से (जिला खंडवा के ग्राम बड़ेल के समीप) 03 मीटर व्यास की पाईप लाईन से 15 घन मीटर प्रति सेकण्ड की दर से 435 मीटर की ऊंचाई तक जल उद्वहन किया जायेगा।

परियोजना की मुख्य पाईप लाईन की कुल लंबाई 200 किलोमीटर है। जल उद्वहन के लिये 06 पंपिंग स्टेशन में कुल 50 पंप मोटर्स सेट्स की स्थापना की गई है। जल उद्वहन करने में कुल 89 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। परियोजना में वितरण प्रणाली के लिए 2.5 हेक्टेयर चक तक कुल 2254 किलोमीटर (03 मीटर व्यास से 63 मिलीमीटर व्यास तक) पाईप लाईन बिछाई गई है। परियोजना में प्रति 20 हेक्टेयर पर एक ओ.एम.एस. बाक्स अर्थात कुल 1539 बाक्स स्थापित किये गये हैं। परियोजना का संपूर्ण संचालन स्काडा के माध्यम से किया जाकर 2.5 हेक्टेयर चक तक 20 मीटर दबाव से जल उपलब्ध कराया जायेगा। प्रधानमंत्री मोदी के ‘पर ड्रॉप-मोर-क्रॉप’ आव्हान अनुरूप दाबयुक्त जल उपलब्ध होने पर कृषक स्प्रिकंलर एवं ड्रिप के माध्यम से कम जल से अधिक सिंचाई का लाभ ले सकेंगे। इस पद्धति से सिंचाई मिलने पर कृषकों को खेत समतल करने की आवश्यकता नहीं होगी एवं कम पानी में अधिक उपयोगी सिंचाई का लाभ एवं उत्पादन मिलेगा।

 

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