श्रवण कुमार कथा मंचन दशरथ मरण एवं भारत मिलाप की कथा का किया गया मंचन
जुन्नारदेव —– नगर की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर श्री रामलीला के शताब्दी वर्ष में रामलीला का भव्य मंचन श्री रामलीला समिति द्वारा प्रति दिवस किया जा रहा है, इसी कड़ी में शनिवार 17 अक्टूबर को श्रवण कुमार कथा से मंचन प्रारंभ किया गया जहां पर राजा दशरथ शब्दभेदी बाण पशु को मारने के लिए छोड़ते हैं, किंतु गलती से उस बाण का शिकार श्रवण कुमार हो जाते हैं, जो अपने प्यासे माता-पिता के लिए नदी से जल लेने आते हैं। इसके बाद श्रवण कुमार मरते समय राजा दशरथ से उनके माता-पिता को जल पिलाने की बात कहते हैं, तब राजा दशरथ जल लेकर श्रवण कुमार के माता-पिता के पास पहुंचते हैं, जहां पर श्रवण कुमार की बाढ़ लगने से हत्या हो जाने पर उनके माता-पिता राजा दशरथ को पुत्र वियोग में प्राण त्यागने का श्राप देते हैं और स्वयं भी मृत्यु को प्राप्त कर लेते हैं। इसी श्राप को फलीभूत होते राजा दशरथ द्वारा देखा जाता है और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागे जाते हैं।
पिता की मृत्यु का समाचार मिलने के बाद भारत और शत्रुघ्न अपने ननिहाल से अयोध्या वापस लौटते हैं वहां पर भारत कैकई संवाद दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा, इसके उपरांत भरत गुरुदेव की आज्ञा लेकर राम को मनाने के लिए माताओं, गुरुजनों और प्रजा को साथ लेकर वन में श्री राम को मनाने पहुंचते हैं। जहां पर भारत का श्री राम के प्रति आघात प्रेम और उनके प्रति समर्पण को मंच से दिखाया गया दर्शन इस दृश्य को देखकर भाव विभोर हो गए। अंत में भारत श्री राम के खड़ाऊ सर पर रखकर अयोध्या की ओर गमन करते हैं। कथा के उपरांत श्री राम वन की ओर गमन करते हैं जहां पर वह काग की आंख फोड़कर उसे जीवनदान प्रदान करते हैं।
इन पत्रों ने निभाई भूमिका —– शनिवार को श्री रामलीला मंच पर श्री राम की भूमिका में अनुरूप शर्मा, श्री लक्ष्मण शैलेंद्र (मिंटू) शर्मा, माता सीता श्रेय सोनी, भारत धर्मेंद्र मालवीय, शत्रुघ्न दिव्यांश मालवीय, राजा दशरथ राजेश श्रीवास्तव, नारद तरुण बत्रा, काग नितिन (चिंटू) बत्रा, सहित अन्य पात्रों नेअभिनय किया।