सीधी नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार पर लगी रोक। उच्च न्यायालय जबलपुर ने सुनाया अहम फैसला ,नियम विरुद्ध ठहराया गया अध्यक्ष का निर्वाचन।
सीधी नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार पर लगी रोक।
उच्च न्यायालय जबलपुर ने सुनाया अहम फैसला ,नियम विरुद्ध ठहराया गया अध्यक्ष का निर्वाचन।
*अरविंद सिंह परिहार सीधी*
उच्च न्यायालय जबलपुर ने नगर पालिका परिषद सीधी के अध्यक्ष पद के निर्वाचन को लेकर दायर याचिका में अहम फैसला सुनाया है, इस फैसले की जानकारी मिलते ही समूचे नगर पालिका परिषद सहित जिले भर में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। वहीं इस फैसले के साथ एक बार फिर नपा अध्यक्ष मुसीबत घिर चुकी है।
गौरतलब हो कि इस बार उच्च न्यायालय ने अध्यक्ष के वित्तीय पावर पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है और इसके साथ ही अध्यक्ष सहित पांच को नोटिस भेज कर जवाब मांगा है कि जब अधिकार नहीं था तो फिर किस आदेश के तहत इन्हें वित्तीय पावर प्रदान किए गए थे, बता दें कि अध्यक्ष श्रीमती काजल वर्मा को नियम विरुद्ध तरीके से वित्तीय पावर देकर कई वरिष्ठ अधिकारियों की गर्दन भी फंसा दी गई है! अब देखना यह होगा कि उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा जारी आदेश अनुसार प्रशासनिक अमला इस मनमानी को लेकर क्या जवाब प्रस्तुत करता है।
बता दें कि नगर पालिका परिषद सीधी के कर्मचारी संघ अध्यक्ष बृजेश सिंह द्वारा अध्यक्ष काजल वर्मा के वित्तीय पावर को लेकर एक याचिका दायर की थी, श्री सिंह की तरफ से उच्च न्यायालय जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ शुक्ला ने पैरवी की है। अधिवक्ता श्री शुक्ला द्वारा जो ठोस तर्क न्यायालय में पेश किए गए थे उसी के आधार पर यह फैसला माननीय न्यायधीश संदीप एन भट्ट उच्च न्यायालय जबलपुर ने अहम फैसला सुनाया है। अध्यक्ष काजल वर्मा को नियम विरुद्ध तरीके से वित्तीय पावर प्रदान करने वाले अधिकारी भी कटघरे में आ गए हैं।
*कर्मचारी संघ अध्यक्ष ने लगाई थी याचिका*
नगर पालिका परिषद सीधी के कर्मचारी संघ अध्यक्ष बृजेश सिंह ने अध्यक्ष काजल वर्मा एवं उनके ससुर कांग्रेस नेता विनोद वर्मा के द्वारा अनधिकृत रूप से कर्मचारियों पर दबाव बनाने सहित अन्य मुद्दों को लेकर मोर्चा खोला था, जिसके फलस्वरूप उन्हें निलंबन तक झेलना पड़ा, लेकिन वह इस लड़ाई को लेकर शांत नहीं बैठे। उन्होंने अपनी नुकसान की परवाह किए बिना मामले को न्यायालय की चौखट पर रखा, जिसका असर यह रहा कि विवादों से घिरी नगर पालिका परिषद सीधी की अध्यक्ष काजल वर्मा के वित्तीय अधिकार को छीनने का आदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने सुनाया है।
*इस लिए छिना वित्तीय पावर*
बताया जा रहा है कि साल 2023 में हुए निकाय चुनाव के दौरान पार्षदों के निर्वाचन को लेकर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन पार्षदों के निर्वाचन उपरांत अध्यक्ष के निर्वाचन को लेकर अधिसूचना नहीं जारी की गई, बावजूद इसके सीधी के तत्कालीन कलेक्टर ने अध्यक्ष का निर्वाचन सम्पन्न करा दिया, अब इसी मामले को लेकर नगर पालिका परिषद सीधी के कर्मचारी संघ अध्यक्ष बृजेश सिंह ने उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर की थी जिसकी सुनवाई उपरांत यह यह फैसला सुनाया गया है।
*यह है उच्च न्यायालय जबलपुर का फैसला*
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर याचिका डब्ल्यूपी क्रमांक 11116 वर्ष 2026
बृजेश सिंह बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य,दिनांक 06 अप्रैल 2026, सिद्धार्थ शुक्ला याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, सुश्री कनक गहरवार राज्य की सरकारी वकील, प्रवेश और अंतरिम राहत के प्रश्न पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता के विद्वान वकील ने प्रस्तुत किया कि डब्ल्यूपी संख्या 10957/2024 और डब्ल्यूपी संख्या 9866/2026 (इंदौर बेंच) वाली समान याचिका पर पहले ही विचार किया जा चुका है और अंतरिम राहत प्रदान की जा चुकी है।
उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए, प्रतिवादियों को आरएडी द्वारा सात कार्य दिवसों के भीतर प्रक्रिया शुल्क के भुगतान के लिए नोटिस जारी किया जाए, अन्यथा याचिका पीठ के समक्ष आगे संदर्भित किए बिना स्वतः ही खारिज हो जाएगी। नोटिस तीन सप्ताह के भीतर वापस करने योग्य बनाए जाएंगे। समानता बनाए रखने के लिए, अंतरिम उपाय के रूप में, यह निर्देश दिया जाता है कि अगली सुनवाई की तारीख तक, प्रतिवादी संख्या 5 अध्यक्ष के पद के लिए उपलब्ध अपनी वित्तीय शक्तियों का प्रयोग नहीं करेगी, यदि वह अधिसूचना जारी किए बिना अध्यक्ष के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है। यह आदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के माननीय न्यायधीश संदीप एन भट्ट द्वारा सुनाया गया है।