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क्या आतंक और दहशत का माहौल पैदा कर रही मांझी सरकार ? चोपना थाना क्षेत्र के घर में घुसकर परिवार के साथ मारपीट

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क्या आतंक और दहशत का माहौल पैदा कर रही मांझी सरकार ?

चोपना थाना क्षेत्र के घर में घुसकर परिवार के साथ मारपीट

बैतूल / चोपना । मांझी सेना या मांझी सरकार आदिवासी हितों की रक्षा करने और प्रशासन की मददगार बन कर काम करने के लक्ष्य से शायद भटक चुकी है तभी तो न्याय का रास्ता छोड़ खुद को कानून से ऊपर रखते हुए खुलेआम दहशत फैला रही आप वीडियो फोटो में साफ देख सकते है, लठ और भाला लिए किस प्रकार लोगों को धमका रहे है । सूत्रों की माने तो उनका काम अब आदिवासियों की भलाई करने के बजाय अपनी रोटी सेकने का हो गया है तभी तो सिर्फ हित को सिद्ध करने के लिए हंगामा करते है परंतु जहां आदिवासियों भाई बहन को सुविधाएं नहीं मिल रही, शासन प्रशासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा वह शांत बैठें हुए है । सिर्फ हुड़दंग फैलाने के लिए रेत और अन्य मामलों में हाथ डालते है बाकी किसी गरीब को शौचालय, सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं के नाम पर चुप है ।

क्या है ताजा मामला

माझी सरकार संगठन के सदस्यों द्वारा ग्राम विष्णुपुर में पीड़ित के घर में घुसकर मारपीट की वही जान लेवा हमला हमला करने के साथ तोड़फोड़ करते हुए लुटपाट की वही कुछ लोग हथियार के घर में घुसे और जानलेवा हमला किए और पूरे क्षेत्र में दहशत फैलाना, इनका आतंक कम नहीं हुआ उनके द्वारा महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की गई ।

शिकायतकर्ता ने बताया कि माझी सरकार संगठन के सदस्यों के साथ दो तुफान और 10-12 मोटर सायकल जिसमें 3-3 लोग सवार थे जो कि लगभग 40-50 सदस्य जो उनके पारम्पारिक ड्रेस मे लाठी, भाला, तलवार, राड, हथियारों के साथ ग्राम विष्णुपुर में एक के घर पर सुनियोजित तरीके एवं आतंक फैलाया साथ ही घुसकर लाठी डंडे, भाला, तलवार के साथ घर में मौजूद महिला पुरुषों नाबालिक बच्चों के साथ हमला कर सबकी पिटाई की रिपोर्ट चोपन थाने में दर्ज के लिए पीड़ित ने आवेदन दिया ।

कौन है मांझी सरकार ?

मांझी सरकार, स्वतंत्रता सेनानी कंगला मांझी द्वारा गठित सरकार है. यह सरकार, आदिवासियों के अधिकारों के लिए आंदोलन करती रही है. कंगला मांझी ने महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस से प्रेरित होकर आज़ादी की लड़ाई में ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ मांझी सरकार बनाई थी ।
आजादी की लड़ाई में इन माझी सैनिकों का भी योगदान रहा है. आज भी जब किसी जनहित के मुद्दे पर आवाज बुलंद करना हो, या किसी आपातकालीन स्थिति में माझी सैनिक को बुलाया जाता है, तो हजारों की तादाद में सुभाष सेना की वर्दी पहनकर ये लोग सड़कों पर रैली धरना या मदद करते हैं. अकेले बैतूल जिले में माझी सेना के 50 हज़ार महिला और पुरुष सैनिक हैं. इस सेना में चौकीदार से लेकर कर्नल तक के रैंक के होते हैं ।

मांझी अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद आदिवासी किसान सैनिक का कार्यालय नई दिल्ली आदिवासी कैंप में है. हर जिले में इसके प्रतिनिधि हैं. इससे जुड़े सैनिक खेती किसानी करते हैं. वहीं,कुछ मजदूरी करते हैं. यह सभी नि:स्वार्थ भावना से संस्था से जुड़े हुए हैं. इसमें प्रतिनिधि, प्रेसिडेंट, सेकेट्री और चपरासी चार पद होते हैं. चार पद महिला को भी दिया जाता है. जिसका बिल्ला बैच उन लोगों को दिया जाता है. सैनिकों का कहना है कि वह आज भी मांझी के बताए रास्ते पर चल रहे हैं।

क्या कहना है ।

मामले की जानकारी मिली थी जिस पर पुलिस ने कार्यवाही करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है ।

अगले अंक में देखिए

चोपना क्षेत्र में किस तरह रेत और अन्य मामले में करते है हुड़दंग और छोड़ देते है जरूरी मुद्दे

क्या अपने मूल उद्देश्य से भटक रहा है मांझी सरकार संगठन ?

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