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फर्जी वारिसाना और ऋण पुस्तिका बनाकर 3.5 हेक्टेयर आदिवासी भूमि हड़पी, EOW रीवा में 9 से अधिक आरोपियों पर केस दर्ज

बिचौलियों ने 2.50 करोड़ में कंपनी को बेची जमीन, असली मालिक को नहीं मिला एक भी रुपया

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फर्जी वारिसाना और ऋण पुस्तिका बनाकर 3.5 हेक्टेयर आदिवासी भूमि हड़पी, EOW रीवा में 9 से अधिक आरोपियों पर केस दर्ज

 

बिचौलियों ने 2.50 करोड़ में कंपनी को बेची जमीन, असली मालिक को नहीं मिला एक भी रुपया

 

सतना/मैहर। मैहर जिले के ग्राम भदनपुर में आदिवासी परिवार की लगभग 3.500 हेक्टेयर बेशकीमती कृषि भूमि फर्जीवाड़े से हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायत के सत्यापन के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने 9 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

जांच में पाया गया कि ग्राम भदनपुर दक्षिण पट्टी निवासी रामसिंह गोड़ के नाम वर्ष 2010-11 तक राजस्व अभिलेखों में दर्ज करीब 3.500 हेक्टेयर भूमि को वर्ष 2012-13 में कथित रूप से फर्जी तरीके से उनके पुत्र राजेन्द्र सिंह के नाम वारिसाना दर्ज कर दिया गया। यह कार्रवाई बिना सक्षम राजस्व अधिकारी के आदेश और बिना वास्तविक भू-स्वामी की जानकारी के की गई। उस समय रामसिंह गोड़ जीवित थे तथा उनके दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं।

 

आरोप है कि तत्कालीन हल्का पटवारी अशोक सिंह एवं अन्य बिचौलियों ने फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार कराई और राजेन्द्र सिंह को बैंक से ऋण दिलाने का झांसा देकर जमीन का नामांतरण करा दिया। बाद में उक्त भूमि शोभा कोल एवं बैजनाथ कोल के नाम दर्ज कराई गई।

 

जांच में यह भी सामने आया है कि हड़पी गई उक्त भूमि को बाद में UltraTech Cement के मैहर स्थित सरला नगर प्लांट को लगभग 2.50 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि वास्तविक भूमि स्वामी या उनके परिवार को इस सौदे की कोई जानकारी नहीं थी और उन्हें जमीन के बदले कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई

 

EOW ने इस मामले में तत्कालीन पटवारी अशोक सिंह, शोभा प्रसाद कोल, बैजनाथ कोल सहित दीपक लालवानी, गोपाली उर्फ गोपाल आसवानी, अज्जू उर्फ अजय सावलानी, कमला उर्फ प्रदीप कुमार सेन, रामप्रकाश जायसवाल तथा अन्य संबंधित राजस्व अधिकारियों एवं व्यक्तियों को आरोपी बनाया है।

 

आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468, 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)(ए), 13(2) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।

 

प्रकरण ने मैहर जिले में आदिवासी भूमि की सुरक्षा और राजस्व तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के बाद आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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