रिपोर्ट – मो. रागिब खान
स्थान – बलरामपुर
*सीएमओ प्रणव राय पर तानाशाही का आरोप, पार्षदों ने बैठक का किया बहिष्कार*
गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 15 पार्षद, अध्यक्ष सहित छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री रामविचार नेताम जी से मिलकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए करते हुए उन्हें हटाने की गुहार भी लगा चुके हैं…
बलरामपुर/ नगर पालिका परिषद बलरामपुर में आज आयोजित परिषद की बैठक नहीं हो पाई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में एक भी पार्षद उपस्थित नहीं हुए।
पार्षदों का आरोप है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रणव राय द्वारा यह कहा गया कि नगर पालिका परिषद की बैठक और पार्षदों की उपस्थिति के बिना भी नगर पालिका का संचालन किया जा सकता है। इस कथित बयान से नाराज़ पार्षदों ने इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
पार्षदों ने यह भी कहा कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रणव राय परिषद की बैठकों में पारित एजेंडों पर कोई कार्रवाई नहीं करते और अपनी मनमर्जी से नगर पालिका का संचालन करते हैं। उनका कहना है कि अब तक परिषद की लगभग चार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन उन बैठकों में पास प्रस्तावों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई, बैठक केवल कोरम पूरा करने के लिए किया जाता है।
नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष दिलीप सोनी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना पीआईसी (PIC) की बैठक बुलाए परिषद की बैठक किस प्रकार विधि सम्मत मानी जा सकती है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन न होने का आरोप लगाया।
बताया जा रहा है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी लगातार पार्षदों के विरोध का सामना कर रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय क्यों नहीं बन पा रहा है?
इस पूरे मामले में जब हमारे द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रणव राय से बात की गई तो उन्होंने नगर में होने वाले विकास कार्यों का हवाला देते हुए कहा की हमारे नगर में कई बड़े विकास कार्य हो रहे हैं जैसे नालंदा परिसर मांगलिक भवन एवं कई विकास कार्य लगातार चल रही है, कई पार्षद हमारे समर्थन में है नगर पालिका का विकास अच्छे से हो रहा है, कुछ ऐसे पार्षद है जो अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए इस तरह का आरोप लगा रहे हैं उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में पार्षदों ने मुझे सम्मानित भी किया है।
लेकिन सवाल यह भी खड़ा होता है कि यदि सब कुछ सही ढंग से चल रहा है तब फिर परिषद की बैठक का बहिष्कार यह भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है, अब देखने वाली बात यह होगी कि कब नगर पालिका में अधिकारी कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधियों का समन्वय बना पाता है।

