नर्मदा भक्त दादा गुरु मां नर्मदा की परिक्रमा करने के दौरान पहुंचे धामनोद_* *_पूरा नगर हुआ भक्ति मय, कई समाजसेवी संगठनों ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत_* *_बात राष्ट्र की हो तो पक्ष – विपक्ष नहीं, निष्पक्ष होकर कार्य करें — दादा गुरु_*
लोकेशन धामनोद
संवाददाता मोनू पटेल
*नर्मदा भक्त दादा गुरु मां नर्मदा की परिक्रमा करने के दौरान पहुंचे धामनोद_*
*_पूरा नगर हुआ भक्ति मय, कई समाजसेवी संगठनों ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत_*
*_बात राष्ट्र की हो तो पक्ष – विपक्ष नहीं, निष्पक्ष होकर कार्य करें — दादा गुरु_*
*धामनोद ।* दादा गुरु एक नाम नहीं बल्कि एक संत हैं जो मां नर्मदा के परम भक्त तो हैं ही अपितु मां नर्मदा के संरक्षण और पर्यावरण को बचाने का बीड़ा उठा कर मां नर्मदा की परिक्रमा कर रहे है । वहीं साथ में हजारों की संख्या में उनके शिष्य भी साथ चल कर मां नर्मदा की परिक्रमा कर धर्म लाभ ले रहे हैं ।
ऐसे निराहारी पवन संत दादा गुरु के नगर धामनोद में हुए आगमन से नगर में आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। 1500 से अधिक नर्मदा परिक्रमा वासियों के साथ गुरु देव ने नगर में प्रवेश किया, जहां संपूर्ण नगरवासियों सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ पुष्प वर्षा कर गुरुदेव का स्वागत किया। रात्रि विश्राम एवं भोजन प्रसादी की व्यवस्था माँ नर्मदा एकेडमी परिसर में की गई । जहां आध्यात्मिक एवं भक्तिमय वातावरण निर्मित हो गया।
इस गरिमामयी अवसर पर महिला एवं बाल विकास केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर तथा धरमपुरी विधायक कालूसिंह ठाकुर की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के संचालक डॉ. मनोज नाहर एवं रीना नाहर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने संतजनों, अतिथियों एवं परिक्रमा वासियों का आत्मीय स्वागत करते हुए सभी परिक्रमा वासियों को साड़ी एवं धोती भेंट कर सेवा–भाव का परिचय दिया।
अपने प्रेरक प्रवचन में दादा गुरु ने भारत के सनातन धर्म की वैश्विक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जब बात राष्ट्र की हो, तब पक्ष–विपक्ष से ऊपर उठकर निष्पक्ष भाव से कार्य करना ही सच्चा राष्ट्रधर्म है।” उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को नैतिक और धार्मिक कर्तव्य बताते हुए “पर्यावरण बचाओ” का संदेश दिया तथा संस्कृत भाषा की गरिमा, सनातन धर्म में परिक्रमा के महत्व और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर साध्वी सत्यप्रिया गिरी ने भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए धर्म, संस्कार और नारी शक्ति की भूमिका पर ओजस्वी विचार रखे, जिससे श्रोतागण गहन आध्यात्मिक प्रेरणा से अभिभूत हुए।
प्रवचन के दौरान गोवर्धन परिक्रमा पूर्ण कर चुकी गाय माता की विधिवत पूजा–अर्चना एवं छप्पन भोग अर्पित किया गया, जिससे कार्यक्रम और अधिक पावन बन गया। दादा गुरु ने गौ–सेवा के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में अन्य संतों एवं कलाकारों द्वारा भजन–कीर्तन और धार्मिक गीतों की मधुर प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ मनोज नाहर ने किया, जबकि समापन अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सहयोग करने वाले समस्त जनमानस के प्रति आभार व्यक्त किया। अंत में सभी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।