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मध्यप्रदेश में कफ सिरप का कोहराम:अब तक 16 बच्चों की मौत

देखिए स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल::बैतूल कलेक्टर ने एक वीडियो जारी किया

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मध्यप्रदेश में कफ सिरप का कोहराम:अब तक 16 बच्चों की मौत

 

देखिए स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल::बैतूल कलेक्टर ने एक वीडियो जारी किया

 

भोपाल/छिंदवाड़ा/बैतूल, प्रतिनिधि:मध्यप्रदेश में कफ सिरप के कारण कथित तौर पर हुई मासूमों की मौतों ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। अब तक सामने आए मामलों में 14 मौतें छिंदवाड़ा जिले से और 2 मौतें बैतूल के आमला ब्लॉक से दर्ज की गई हैं। यह मामला न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत बनता जा रहा है।

 

मासूमों की मौत, परिवारों का उजड़ना

 

छिंदवाड़ा जिले में बीते कुछ सप्ताहों के दौरान 14 बच्चों की मौत हुई है, जिनका इलाज स्थानीय निजी चिकित्सकों के यहां किया जा रहा था। बच्चों को बुखार, खांसी और जुकाम के इलाज के दौरान एक खास कफ सिरप दिया गया। कुछ समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और किडनी फेलियर से मौत हो गई।

 

इसी तरह बैतूल जिले के आमला ब्लॉक में दो और मासूमों ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि परासिया के डॉक्टर ने इलाज के दौरान कफ सिरप दी थी, जिसके बाद बच्चों की हालत बिगड़ने लगी।

 

स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी, अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं

 

स्वास्थ्य विभाग ने दोनों जिलों में जांच टीम भेजी है, जिसमें मेडिकल, ड्रग कंट्रोल और एफएसएल के विशेषज्ञ शामिल हैं। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौतें वास्तव में सिरप के कारण हुईं या इलाज में कोई और लापरवाही हुई।

 

CMHO छिंदवाड़ा और बैतूल दोनों ही मामलों में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सिरप के सैंपल जांच की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

 

कौन सा कफ सिरप? अब तक नहीं हुआ खुलासा

 

अभी तक प्रशासनिक तौर पर यह साफ नहीं किया गया है कि किस कंपनी का कफ सिरप बच्चों को दिया गया था। कुछ रिपोर्टों में “कोल्ड्रिफ” नामक सिरप का ज़िक्र किया गया है, जबकि कुछ मामलों में अन्य नाम सामने आए हैं। इस मुद्दे पर दवा कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

 

प्रशासन का दावा – जिले में नहीं बिक रही यह दवा! फिर कहां से आई?

 

बैतूल कलेक्टर ने एक वीडियो जारी कर बताया कि “कोल्ड्रिफ सिरप” जिले में अधिकृत रूप से बिक्री में नहीं है। सवाल उठता है

 

क्या यह सिरप अवैध तरीके से बेचा जा रहा था?

 

क्या पुराने स्टॉक या एक्सपायर्ड दवाएं इस्तेमाल में लाई गईं?

 

स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

 

इन मौतों ने मध्यप्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।

 

अनधिकृत क्लिनिक

 

बिना पंजीकरण वाले डॉक्टर

 

बिना जांच के दवा का उपयोग

इन सबने मिलकर एक भयावह स्थिति को जन्म दिया है।

 

कफ सिरप से पहले भी हुई हैं अंतरराष्ट्रीय घटनाएं

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि कुछ देशों में खराब क्वालिटी की कफ सिरप से बच्चों की मौतें हुई हैं। इसमें भारत निर्मित कुछ ब्रांड्स के नाम भी सामने आ चुके हैं।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

 

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में बिना चिकित्सकीय परीक्षण के दवा देना बेहद खतरनाक हो सकता है, विशेष रूप से किडनी और लीवर पर इसका असर पड़ता है।

 

अंतिम सवाल — कौन है जिम्मेदार?

 

क्या यह एक दवा घोटाला है?

 

क्या यह डॉक्टरों की लापरवाही है?

 

या फिर सिस्टम की नाकामी?

 

 

जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक जवाब अधूरे हैं — लेकिन मासूमों की जानें अब लौटकर नहीं आएंगी।

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