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जैविक खेती, प्राकृतिक खेती एवं मोटे आनाज की खेती को बढ़ावा देने से निश्चित ही उत्तर प्रदेश विकसित एवं होगा समर्थ-श्रीमती अर्चना चन्द्रा

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News By- हिमांशु उपाध्याय / नितिन केसरवानी

समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश-2047 अभियान के अंतर्गत प्रबुद्धजन समिति की सदस्या सेवानिवृत प्रोफ़ेसर श्रीमती अर्चना चन्द्रा ने नोडल अधिकारी के साथ कृषि विज्ञान केन्द्र का भ्रमण किया।

कौशाम्बी: इस कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ0 अजय कुमार ने कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा विगत वर्षो में किये गए कार्यो को प्रजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया। कृषि विज्ञान केन्द्र जनपद के कृषक समुदाय के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि केवीके द्वारा 20000 से अधिक कृषको को प्रशिक्षित किया गया। 1283 प्रसार कार्यकर्ता को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। 68 प्रक्षेत्र परीक्षण (ओ.एफ़.टी.) किया गया। कुल सं० 2760 प्रक्षेत्र प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। 4435 कुंतल बीज उत्पादन किया गया। विभिन्न फसलो यथा धान, गेंहू, सरसों, उर्द एवं मूंग का लगभग 220000 पौध रोपण सामग्री तैयार करते हुए कृषको को प्रदान किया गया। 118200 कृषको को मोबाईल द्वारा कृषि परामर्श प्रदान किया गया। 2267 मृदा परीक्षण किया गया। 73739 कृषको को प्रसार गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभाग कराया गया। लाइवस्टाक के क्षेत्र में लगभग 12882 संख्या में मछली स्पान, चूजा इत्यादि का उत्पादन किया गया। बीज उत्पादन कार्यक्रम से जनपद में बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी एवं बीज प्रतिस्थापन दर को बढ़ाने में सहायता प्रदान की गयी। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा जनपद में वर्ष भर में चार फसल (मक्का-आलू-गेंहू-मूंग) की नई फसल पद्धति को बढ़ावा दिया गया, जिससे कृषको की आय बढ़ी। धान, गेंहू एवं सरसों को ऊसर रोधी प्रजातियों का बीज उत्पादन करते हुए जनपद में बढ़ावा दिया गया जिससे कृषको की आय बढ़ी। केवीके अनुसंधान प्रक्षेत्र में प्रकृतिक खेती, जैविक खेती एवं परम्परागत खेती का परीक्षण करते हुए तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है। एससीएसपी योजना के अंतर्गत 14 कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गयी, जिससे कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा मिला एवं ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी मिला। आर्या परियोजना के द्वारा बीज उत्पादन, मुर्गी पालन एवं बकरी पालन उद्यम से स्वरोजगार के अवसर को बढाकर ग्रामीण युवाओं का शहर की तरफ पलायन को कम किया गया। निकरा परियोजना के द्वारा चयनित गाँव में ऊसर रोधी तकनीक को प्रयोग करते हुए ऊसर भूमि को हरा-भरा किया गया। अमरुद फसल में विल्ट डिजीज को नियंत्रित करते हुए सम्बंधित तकनीक को जनपद में बढ़ावा दिया गया। केला में मिर्च फसल का अन्तः सस्यन करते हुए कृषको की आय बढाई गयी। अमरुद के बाग़ में हल्दी फसल का अन्तः सस्यन करते हुए कृषको की आय बढाई गयी।

प्रबुद्धजन समिति की सदस्या ने सम्बोधित करते हुए कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा कृषको के लिए बहुत ही अच्छा एवं सराहनीय कार्य किया जा रहा है। जैविक खेती, प्राकृतिक खेती एवं मोटे आनाज की खेती को बढ़ावा देने से निश्चित ही उत्तर प्रदेश विकसित एवं समर्थ हो पायेगा। उत्तर प्रदेश को विकसित बनाने के लिए कृषको एवं महिलाओ की भागीदारी सुनिश्चित हो। एफ.पी.ओ. के माध्यम से  मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।

नोडल आधिकारी/उपायुक्त स्वतः रोजगार ने अपने सम्बोधन में कहा कि कृषको को कृषि के बदलते स्वरुप को अपनाते हुए उन्नतिशील खेती करना चाहिए तथा कृषक भाई खेती के साथ-साथ पशुपालन अवश्य करेंद्य कृषको के एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए।

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