Breaking News : मध्य प्रदेश के 7 हजार 125 सरकारी स्कूलों में रोशनी की व्यवस्था
प्रत्येक स्कूल चार एलईडी या ट्यूबलाइट की व्यवस्था रखें, देखिए आदेश
विभाग ने हर विकासखंड को 20 हजार रुपए देकर बिजली की व्यवस्था के दिए निर्देश

Bhopal . लोक शिक्षण संचनालय ने माना कि स्कूलों में रोशनी की व्यवस्था नहीं है. प्रदेश के 7 हजार 125 सरकारी स्कूलों में रोशनी की व्यवस्था नहीं है. सर्दी के मौसम में दरवाजे खिड़की बंद करने के बाद स्कूल के कमरों में अंधेरा फैल जाता है.
स्कूल शिक्षा विभाग ने दिए ट्यूबलाइट लगाने के निर्देश
विभाग ने हर विकासखंड को 20 हजार रुपए देकर बिजली की व्यवस्था करने के लिए निर्देश हैं. साथ ही कहा कि कक्षा में पर्याप्त रोशनी के लिए कम से कम से कम चार एलईडी या ट्यूबलाइट की व्यवस्था रखें.
शासकीय विद्यालयों में पर्याप्त विद्युत व्यवस्था (रोशनी) हेतु आवश्यक निर्देश।
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प्रायः यह देखने में आया है कि राज्य के शासकीय विद्यालयों की कक्षाओं में पर्याप्त विद्युत रोशनी (ट्यूबलाईट/एल.ई.डी.) की व्यवस्था नहीं होती। विशेषकर सर्दियों के दिनों में ठंडी हवाओं के बचाव के लिए खिड़कियों, दरवाजों को बंद करने पर कक्षाओं में पर्याप्त प्रकाश की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि वांछित प्रकाश के अभाव में विद्यार्थियों के पठन-पाठन एवं सीखने का कौशल एवं क्षमता (Learning Skill & Capacity) पर विपरित प्रभाव पड़ता है।
उपरोक्त परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए शासकीय विद्यालयों के कक्षाओं में पर्याप्त प्रकाश/रोशनी (ट्यूबलाईट/एल.ई.डी.) की व्यवस्था हेतु निम्नानुसार निर्देश दिए जाते है :-
1. कक्षा में पर्याप्त रोशनी हेतु कम से कम चार एल.ई.डी., ट्यूबलाईट की व्यवस्था रखें।
2. यदि इस मद में पर्याप्त राशि उपलब्ध न हो तो अपने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी / विकासखण्ड स्रोत समन्वयक से संबंधित S.M.C./S.M.D.C. को मरम्मत मद में योजना 9545 “विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण” से 7125 विद्यालयों (हाईस्कूल / हायर सेकेण्डरी स्कूल) को प्रति विद्यालय को राशि रु 20,000/- (बीस हजार केवल) के मान से सभी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारियों को राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
3. उक्त राशि का उपयोग जिस कक्षा में वांछित प्रकाश हेतु ट्यूबलाईट/एल.ई.डी. की आवश्यकता हो, वही किया जाये।
4. इस मद में उपलब्ध राशि का उपयोग ट्यूबलाईट/एल.ई.डी. की व्यवस्था के साथ-साथ यथा-आवश्यकतानुसार बिजली के स्विज बोर्ड तथा आंतरिक विधुतीकरण, तार आदि में भी किया जावे।
5. एस.एम.सी./एस.एम.डी.सी. से कार्य समय-सीमा में पूर्ण कराया जावे।
6. कृत कार्य में गुणवत्ता एवं समय-सीमा का ध्यान रखा जावे।
7. यदि किसी समय विद्यालय में पूर्व से उपरोक्त वर्णित संपूर्ण व्यवस्था उपलब्ध है, तो उन्हें पृथक से यह कार्य कराने की आवश्यकता नहीं है।
8. उक्त कार्य का गहनता पूर्वक अनुवीक्षण विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जावेगा।
9. जिन विद्यालयों में विधुतीकरण नहीं है, प्राथमिकता के आधार पर वहाँ MPEB से प्राक्कलन प्राप्त कर स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजें।
10. विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारियों का यह दायित्व है कि उपरोक्तानुसार व्यवस्था सुनिश्चित करने एवं उनके द्वारा प्रभावी नियंत्रण एवं समय-समय पर इसकी विस्तृत मॉनिटरिंग की जावे।