Deepfake और AI कंटेंट पर सरकार का सख्त एक्शन, 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे नए नियम
IT Rules में संशोधन: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ी, Safe Harbour सुरक्षा पर सख्ती
Deepfake और AI कंटेंट पर सरकार का सख्त एक्शन, 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे नए नियम
IT Rules में संशोधन: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ी, Safe Harbour सुरक्षा पर सख्ती
नई दिल्ली::केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए जाने वाले Deepfake, मॉर्फ्ड वीडियो, फर्जी ऑडियो और अन्य भ्रामक डिजिटल कंटेंट पर कड़ा नियंत्रण लगाने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा 10 फरवरी 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना (सं. 114, सा.का.नि. 120(ब)) के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 अब 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे।
यह संशोधन IT Act, 2000 की धारा 87 के तहत किया गया है, जिसके जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और बढ़ा दी गई है।
क्या है नए नियमों में खास?
संशोधित नियमों के तहत AI और एल्गोरिथ्मिक टूल्स से तैयार कंटेंट को स्पष्ट रूप से कानून के दायरे में शामिल किया गया है।
मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
“सिंथेटिक रूप से जनित सूचना” की स्पष्ट परिभाषा जोड़ी गई है।
Deepfake और सिंथेटिक मीडिया को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए संभावित खतरा माना गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंटरमीडियरी को ऐसे कंटेंट की पहचान, लेबलिंग और त्वरित हटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकारी आदेश या वैध शिकायत मिलने पर कंटेंट हटाने की समय-सीमा कम कर दी गई है।
आपात स्थिति में तत्काल ब्लॉकिंग की व्यवस्था की गई है।
“सिंथेटिक रूप से जनित सूचना” की परिभाषा
नए नियमों के अनुसार, ऐसी कोई भी ऑडियो, वीडियो या दृश्य सामग्री जो कंप्यूटर संसाधन या एल्गोरिथ्म के माध्यम से इस प्रकार बनाई या बदली गई हो कि वह वास्तविक प्रतीत हो, उसे सिंथेटिक रूप से जनित सूचना माना जाएगा।
हालांकि, सामान्य संपादन, रंग-संशोधन, तकनीकी सुधार, अनुवाद, फॉर्मेटिंग या शैक्षणिक सामग्री तैयार करने जैसे सद्भावनापूर्ण कार्यों को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है, बशर्ते वे मूल संदर्भ या अर्थ को भ्रामक रूप से परिवर्तित न करें।
नियम न मानने पर सख्त कार्रवाई
यदि कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे IT Act के तहत मिलने वाली “Safe Harbour” सुरक्षा समाप्त की जा सकती है। इसके अलावा कानूनी कार्रवाई, दंड और अकाउंट ब्लॉकिंग जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।
क्यों जरूरी था यह कदम?
हाल के वर्षों में Deepfake तकनीक के दुरुपयोग से चुनावी प्रक्रिया, सामाजिक सौहार्द और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर खतरे की आशंकाएं बढ़ी हैं। सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से डिजिटल स्पेस में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
20 फरवरी 2026 से लागू होने वाले ये नियम भारत में डिजिटल कंटेंट रेगुलेशन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

