खबर लगते ही एक्शन मोड में आए सीएमओ भूपेंद्र सिंह अवैध वसूली पर सख्त रुख, शाम 4 बजे तक रसीद नहीं तो थाने में एफआईआर के निर्देश*
खबर लगते ही एक्शन मोड में आए सीएमओ भूपेंद्र सिंह
अवैध वसूली पर सख्त रुख, शाम 4 बजे तक रसीद नहीं तो थाने में एफआईआर के निर्देश*
ज्ञानेंद्र पांडेय 8516868379
अनूपपुर।
नगर परिषद बरगवां अमलाई अंतर्गत बरगवां नाथ हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित प्राचीन मेले की बड़की (दुकान शुल्क) को लेकर हो रही कथित अवैध वसूली की खबर जैसे ही अखबारों में प्रकाशित हुई, मुख्य नगर परिषद अधिकारी (सीएमओ) भूपेंद्र सिंह तत्काल एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने बिना विलंब किए संबंधित कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई और स्वयं मेला प्रांगण पहुंचकर दुकानदारों से सीधी बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली।
मेला परिसर में मौजूद दुकानदारों ने सीएमओ को बताया कि उनसे शुल्क तो लिया गया, लेकिन बदले में रसीद नहीं दी गई। इस पर सीएमओ भूपेंद्र सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि “शाम 4:00 बजे तक यदि दुकानदारों को विधिवत रसीद नहीं मिलती है, तो संबंधित दुकानदार मेरे साथ थाने चलकर शिकायत दर्ज कराएं। बिना रसीद किसी भी प्रकार की वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
सीएमओ ने यह भी निर्देश दिए कि नगर परिषद के नाम पर होने वाली हर वसूली पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और नियमानुसार रसीद देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी भी कर्मचारी द्वारा अवैध वसूली की जाती है, तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी वे स्वयं लेंगे।
गौरतलब है कि एक छोटे दुकानदार से ₹500 की वसूली कर रसीद न देने का मामला सामने आया था, जिसकी जानकारी दुकानदार ने दैनिक विप्र एक्सप्रेस के जिला ब्यूरो ज्ञानेंद्र पांडे को दी। समाचार प्रकाशित होने के बाद सीएमओ भूपेंद्र सिंह स्वयं पत्रकार के साथ दुकानदार के पास पहुंचे, उसकी पूरी व्यथा सुनी और तत्काल समाधान के निर्देश दिए। यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का सराहनीय उदाहरण माना जा रहा है।
सीएमओ भूपेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि छोटे दुकानदारों से न्यूनतम शुल्क (₹50 या ₹100) लिया जाना तय है, लेकिन वह भी नगर परिषद के नियम-कायदों और कानून के दायरे में रहकर ही होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मेला केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि एक प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे सहेजकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाला यह मेला वर्षों से आस्था, परंपरा और व्यापार का केंद्र रहा है, जो कहीं न कहीं हमारे पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में मेले की गरिमा बनाए रखना और आमजन को शोषण से बचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्य नगर परिषद अधिकारी भूपेंद्र सिंह अपनी कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली के लिए पहले से ही चर्चा में रहे हैं। मजदूरों और कर्मचारियों के बीच खड़े होकर भुगतान सुनिश्चित करना, स्वच्छता व्यवस्था का नियमित निरीक्षण करना और समय-समय पर सख्त कार्रवाई करना उनकी पहचान बन चुकी है। इस पूरे मामले में उनका त्वरित हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि वे न केवल प्रशासनिक अधिकारी हैं, बल्कि जनहित के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह नेतृत्वकर्ता भी हैं।