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*खंडवा में शर्मनाक मामला दो IAS अधिकारियों पर फर्जी आकड़ें देने का आरोप*
DM ऋषव गुप्ता और CEO नागार्जुन गौड़ा पर बड़ा आरोप! जल संरक्षण के नाम पर AI (Gemini) से बनी तस्वीरें अपलोड कर फर्जी काम दिखाया गया! उसी आधार पर राष्ट्रीय पुरस्कार ले लिए गए!
*अवार्ड लेने के चक्कर में किया मध्य प्रदेश का नाम खराब* AI से बने फोटो वीडियो पूरे देश में हो रहे वायरल
मध्य प्रदेश कैडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारी नागार्जुन गौड़ा और खंडवा डीएम ऋषव गुप्ता सुर्खियों में हैं। दोनों के बारे में दावा किया जा रहा है कि इन्होंने AI से फर्जी फोटो बनाकर और फर्जी आंकड़े पेश कर राष्ट्रीय अवार्ड ले लिया है। शुरुआती जांच में 2-2 फीट के गड्ढों को कुएँ बताने, सामग्री दबाने और फोटो से AI watermark तक न हट पाने की बात सामने आई।
दरअसल मध्य प्रदेश को जल संरचनाओं के निर्माण और संरक्षण के उत्कृष्ट कार्यो के लिए पहला पुरस्कार मिला है लेकिन वह इस साल का सबसे बड़ा सरकारी झूठ माना जा रहा है। जिन तालाब, कुआं, डक वैल और स्टाफ डैम के निर्माण का दावा किया था आरोप है कि वह जमीनी स्तर पर है ही नहीं। स्थानीय लोगों ने जमीनी स्तर पर पड़ताल की तो जहां तालाब बताया गया था वहां गेहूं की फसल लगी है और दूसरी जगह खाली मैदान है जिन्हें कुआं बताया गया था वह मात्र 2 फीट के गड्ढे निकले। लेकिन कागजों में लाखों काम पूरे दिखाकर जिले को देश में नंबर वन घोषित कर दिया गया!
राष्ट्रपति से पुरस्कार और करोड़ों की प्रोत्साहन राशि भी ले ली गई, लेकिन ज़मीन पर न जन भागीदारी दिखी और न ही असली जल संरक्षण। उधर वायरल हो रहे इस दावे का खंडवा जिला प्रशासन ने खंडन करते हुए बताया है कि खंडवा जिले द्वारा कुल 1.29 लाख फोटो अपलोड की गई थीं.
उन्हीं के आधार पर जल संचय, जनभागीदारी अभियान अंतर्गत पुरस्कार प्राप्त हुआ है. अब जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों के आधार पर झूठ फैलाया जा रहा है। दावों का जल संचय, जनभागीदारी अभियान से कोई संबंध नहीं है
*लेकिन एक सवाल तो साफ़ है।*
👉राष्ट्रपति से मिला सम्मान अगर गलत आंकड़ों पर आधारित है, तो यह केवल प्रदेश की नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के साथ भी धोखा है।
👉 क्या पुरस्कारों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया फेल है?
👉 अगर यह सच है तो जिम्मेदारी और कार्रवाई कब?