एसडीएम मझौली ने कराया निरीक्षण, अधिकारियों को गुमराह गए केन्द्र प्राभारी? मड़वास- मझौली धान उपार्जन केंद्र में जमकर हो रहा किसानों का शोषण।भारी पैमाने पर अवैध धान डम्प!
एसडीएम मझौली ने कराया निरीक्षण, अधिकारियों को गुमराह गए केन्द्र प्राभारी?
मड़वास- मझौली धान उपार्जन केंद्र में जमकर हो रहा किसानों का शोषण।भारी पैमाने पर अवैध धान डम्प!

सीधी/मझौली
किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सके जिसके लिए सरकारों ने सहकारी समितियों के साथ स्व सहायता समूह को गेहूं -धान के साथ अन्य दलहन ,तिलहन फसल खरीदी का जिम्मा सौंप रखी है। लेकिन यहां किसानों को परेशान कर पोषण किया जा रहा है। वही रसूखदारों एवं व्यापारियों को भरपूर सुविधा मुहैया कराई जा रही है यहां तक की जिस बोरी के लिए किसानों को हफ्तो इंतजार करना पड़ रहा है वही बोरी व्यापारियों को घर में ही उपलब्ध कराया जाना बताया जा रहा है। जब किसान इसका विरोध करते हैं तो उनका अनाज फेल कर दिया जाता है। वही यह भी बताया व देखा जा रहा है कि समितियां में हाथ से सिली हुई धान की बोरी छल्ली या गड्ढों में रखी हुई है लेकिन निरीक्षण अधिकारियों को शायद गुमराह कर आबैध धान को बैध बता दिया जाता है। फिर हाल यह स्थिति अधिकारियों के कार्य प्रणाली पर भी संदेह उत्पन्न कर रही है।
जिसका ताजा मामला मझौली उपखंड के मड़वास एवं मझौली सहकारी समितियो के उपार्जन केंद्र में देखने को मिल रहा है। कवरेज के दौरान देखा गया कि किसान अपनी धान रखें कई दिनों से बोरी-बरदाने के इंतजार में बैठे हैं वहीं ट्रैक्टर एवं गाड़ियों में तौली-तौलाई हाथ से सिली धान की बोरी आती है और सीधे छल्ली में रखा ली जाती है हद तो तब हो जाता है जब हजार से तीन चार हजार कुंटल तक की छल्ली में हाथ की सिली हुई बॉडी बिना टैग लगे रखी गई है फिर वहां अधिकारियों की नजर क्यों नहीं जाती। जबकि जानकारों की माने तो टैग लगा मशीन से सिलाई करा कर ही धान की छल्ली लगवाई जा सकती है यहां तक की धान की बुरी में किसान का हस्ताक्षर की गई किसान कोड की पर्ची भी लगाए जाने का शायद शासन का निर्देश है। लेकिन सारे नियम कानून को दरकिनार करते हुए मनमानी और सराहंगाई पूर्वक उपार्जन केंद्र प्रभारी किसानों को परेशान व शोषण कर काली कमाई करने में लगे हुए हैं!
*तौलाई भाराई के बाद किसानों से वसूली जा रही राशि*
नाम ना उजागर करने व कमरे से दूर जा मड़वास एवं मझौली सहकारी समिति उपार्जन केंद्र में धान बेचने आए परेशान व शोषित किसानों द्वारा बताया गया कि एक ओर यहां हमी लोगों से धान की भराई-तौलाई कराई जाती है। निर्धारित मात्रा से तौल भी ज्यादा 41 किलो 41.200 ग्राम तक ली जाती है।
मड़वास उपार्जन केंद्र के किसानों द्वारा नाम ना उजागर करने के शर्त पर बताया गया कि प्रतिबोरी यहां 10 रुपए प्रतिबोरी के दर से अन्य काम के बहाने राशि वसूली जा रही है। न देने व विरोध करने पर धान फेल करने की धमकी दी जाती है।
*मीडिया की सूचना पर एसडीएम ने कराया निरीक्षण*
खरीदी केंद्र में व्याप्त अनिमित एवं भ्रष्टाचार तथा किसानों के हो रहे शोषण को लेकर मीडिया द्वारा एसडीएम मझौली आरपी त्रिपाठी को अवगत कराया गया जिनके द्वारा नायब तहसीलदारों को भेज कर उपार्जन केंद्र का निरीक्षण करवाया गया जहां या तो उपार्जन केंद्र प्रभारी द्वारा पूर्व की तरह निरीक्षण करने गए अधिकारियों को गुमराह कर दिया गया या की अधिकारियों द्वारा किसी कारण वश कर्मियों को नजर अंदाज करते हुए शायद एसडीएम को अवगत कराया गया है की उपार्जन केंद्र में नियमानुसार सही ढंग से खरीदी की जा रही है। जबकि मीडिया के कवरेज के दौरान व मीडिया को सूचित कर खुद किसानों द्वारा उपार्जन केंद्र प्रभारियों एवं उनके कर्मचारियों के समक्ष गलत किए जाने की बात कही गई। मड़वास एवं मझौली सहकारी समिति उपार्जन केंद्र में वर्तमान में भी हजारों कुंटल विना टैग लगी हाथ से सिली बोरी छल्लियों एवं गड्ढों में रखी हुई है जिसको उपार्जन केंद्र प्रभारी द्वारा किसी ना किसी को खड़ा कर धान कबुलबाई जा रही है यहां तक की कर्मचारियों को ही खड़ा कर दिया जा रहा है।