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धान खरीदी केंद्र में अवैध धान की भरमार, किसानों का जमकर किया जा रहा शोषण।* *भारी तौलाई तो करते ही हैं छल्ली एवं गोदाम में रखवाने का भी वसूल रहे रुपए!* *औपचारिकता पूर्ण निरीक्षण व चेतावनी निर्देश तक सिमिट कर रह जाती है जिम्मेदारो की कार्यवाही*

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*धान खरीदी केंद्र में अवैध धान की भरमार, किसानों का जमकर किया जा रहा शोषण।*

 

*भारी तौलाई तो करते ही हैं छल्ली एवं गोदाम में रखवाने का भी वसूल रहे रुपए!*

 

*औपचारिकता पूर्ण निरीक्षण व चेतावनी निर्देश तक सिमिट कर रह जाती है जिम्मेदारो की कार्यवाही*

 

*अरविंद सिंह परिहार रीवा*

 

एक ओर जहां सरकार किसानों के हित के लिए निरंतर प्रयासरत है वही सरकार के प्रशासनिक नामुन्दे ही शोषणकारी नीति व उद्देश्य से भ्रष्टाचार कमीशन खोरी को अन्जाम दे सरकार की किरकिरी कर छवि बिगड़ने में भिड़े हुए हैं। लेकिन गनीमत की बात यह है कि प्रशासनिक अम्ल के साथ सत्ताधारी सरकार के प्रतिनिधि ऐसे मामलों को नजर अंदाज कर रखे हैं। जिसका ताजा हाल वर्तमान में धान उपार्जन केंद्र में देखने को मिल रहा है।

 

किसान अपनी फसल निर्धारित मूल्य अनुसार सुगमता पूर्वक बिक्री कर सके जिसके लिए सहकारी समितियां के साथ स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन फिर भी किसान परेशान व शोषित है। स्व सहायता समूह में तो फिर हाल कुछ डर बना हुआ है लेकिन सहकारी समितियों के उपार्जन केंद्र प्रभारी निर्भीकता पूर्वक किसानों का शोषण कर भ्रष्टाचार व कमीशन खोरी को अंजाम दे रहे हैं। सरकार द्वारा भाराई, तौलाई,सिलाई, छल्ली लगवाई के लिए भारी भरकम राशि कमीशन के रूप में समितियों व सहायता समूहों को प्रदान की जा रही है इसके बावजूद भी किसानों से भाराई, तौलाई तो कराई ही जाती है छल्ली लोडिंग तक के नाम से नगद राशि वसूली जाती है। जो किसान ऐसा नहीं करते उन्हें परेशान किया जाता है कई दिनों तक बोरी बारदाना उपलब्ध नहीं कराया जाता जिससे परेशान होकर किसान अपनी फसल व्यापारियों के हाथ सस्ते दरों पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं और किसानों द्वारा ही खरीदी गई धान व्यापारी उपार्जन केंद्र प्रभारियों को कमीशन मुहैया करा बड़े आसानी से शुभचिंतक किसनो जिनका पंजीयन फर्जी तरीके से स्वयं व्यापारियों द्वारा कराया गया होता है उनके नाम बिक्री कर लेते हैं। यहां तक की व्यापारियों एवं दलालों को घर में ही बुरी बारदाना प्रोवाइड कराया जाना बताया जा रहा है तथा देखने को भी मिल रहा है।

यह हाल किसी एक समिति या स्व सहायता समूह द्वारा संचालित उपार्जन केंद्र की नहीं बल्कि पूरे संभाग क्षेत्र में देखने- सुनने को मिल रहा है लेकिन जिस तरह से सीधी जिले में किसानों का शोषण कर भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी को अंजाम दिया जा रहा है शायद ही कहीं और होगा। लेकिन गनीमत की बातें है कि प्रशासनिक जिम्मेदारों के साथ सत्ताधारी एवं विपक्ष के जिम्मेदार प्रतिनिधि ऐसे मामलों को नजर अंदाज कर रखे हैं जिनके कार्य प्रणाली पर भी सवालिया निशान लगना- लगाना कहीं ना कहीं वाजिव ही माना जा रहा है।

 

*उपार्जन केंद्रों में आबैध धान की भरमार*

जिले के कई उपार्जन केंद्र में हजारों हजारों कुटल धान सैकड़ो गड्डो में रखी हुई है लोगों की माने तो यह धान किसानों से व्यापारी व खुद उपार्जन केंद्र प्रभारी व उनके कर्मचारी अधिकारी एवं दलाल खरीद रखे हुए हैं जिसकी शिकायत करने पर किसी न किसी को खड़ा कर उपार्जन केंद्र प्रभारियों द्वारा अधिकारियों कर्मचारियों को गुमराह कर दिया जाता है।

 

*प्रशासनिक कार्यवाही में असंतुष्टि*

 

उपार्जन केंद्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार, शोषण, एवं कमीशन खोरी को लेकर किसान लगातार मीडिया के माध्यम से व शिकायत कर शासन प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा कार्यवाही न किए जाने पर कार्य प्रणाली मे सवालिया निशान लग रहा है। किसने की माने तो यह कार्यवाही मात्र औपचारिकता पूर्ण निरीक्षण, चेतावनी निर्देश तथा कमीशन फिक्स तक सिमट कर रह जाती है यदि हम इसकी शिकायत अपने जनप्रतिनिधियों से करते हैं तो इनके द्वारा भी मेरे आवाज वी शिकायत को नजर अंदाज कर दिया जाता है ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कहीं ना कहीं उनकी ही मिली भगत से प्रशासनिक हमला इस तरह के भ्रष्टाचार कमीशन खोरी को अंजाम दे रहा है।

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